“इतिहास में भारतीय इतिहास के सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक पक्षों की व्यापक समझ पर बल
होना चाहिए। भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन में अभ्यर्थियों से स्वतंत्रता आंदोलन की प्रकृति एवं चरित्र,
राष्ट्रवाद के विकास तथा स्वतंत्रता प्राप्ति की समग्र समझ अपेक्षित है।”
अध्याय
अध्याय 2.1प्राचीन भारतस्रोत · प्रागैतिहासिक काल · सिंधु सभ्यता · वैदिक काल · महाजनपद · मौर्य · गुप्त · दक्षिण भारत293 KB · 15 खंड · 36 तालिकाएँ · पुनरावृत्ति: 2 मानचित्र · 11 तिथियाँ · 5 सूत्र📖 पूरा अध्याय पढ़ें📌 दृश्य पुनरावृत्ति
अध्याय 2.2मध्यकालीन भारतराजपूत · तुर्क आक्रमण · दिल्ली सल्तनत · विजयनगर · भक्ति-सूफी · मुगल · मराठा326 KB · 14 खंड · 40 तालिकाएँ · पुनरावृत्ति: 3 मानचित्र · 15 तिथियाँ · 6 सूत्र📖 पूरा अध्याय पढ़ें📌 दृश्य पुनरावृत्ति
अध्याय 2.3आधुनिक भारतयूरोपीय आगमन · भू-राजस्व · आर्थिक नीतियाँ · अधिनियम 1773–1947 · सुधार आंदोलन · 1857263 KB · 14 खंड · 27 तालिकाएँ · पुनरावृत्ति: 1857 एवं भू-राजस्व मानचित्र · 27 तिथियाँ📖 पूरा अध्याय पढ़ें📌 दृश्य पुनरावृत्ति
अध्याय 2.4भारतीय राष्ट्रीय आंदोलनकांग्रेस · नरम-गरम दल · क्रांतिकारी · गांधी युग · भारत छोड़ो · विभाजन · एकीकरण301 KB · 15 खंड · 40 तालिकाएँ · पुनरावृत्ति: 4 मानचित्र · 22-तिथि समयरेखा · 6 सूत्र📖 पूरा अध्याय पढ़ें📌 दृश्य पुनरावृत्ति
अध्याय 2.5भारतीय कला एवं संस्कृतिस्थापत्य · मंदिर शैलियाँ · मूर्ति · चित्र · संगीत · नृत्य · दर्शन · विश्व धरोहर393 KB · 15 खंड · 49 तालिकाएँ · पुनरावृत्ति: 27 शैली-चित्र · 3 मानचित्र · 6 सूत्र📖 पूरा अध्याय पढ़ें📌 दृश्य पुनरावृत्ति
हर अध्याय की दो फ़ाइलें — क्यों?
📖 पूरा अध्याय — पहली बार सीखने के लिए। सम्पूर्ण विवेचन, तालिकाएँ, चित्र एवं मानचित्र सहित।
📌 दृश्य पुनरावृत्ति — केवल दोहराने के लिए। वही तथ्य मानचित्र, समयरेखा,
वंश-वृक्ष एवं स्मृति-सूत्र के रूप में, 15–20 मिनट में। चित्र एवं मानचित्र दोनों जगह हैं —
पढ़ते समय अलग फ़ाइल खोलने की आवश्यकता नहीं।
चित्रों के बारे में
सामग्री में केवल वे चित्र हैं जो कोई परीक्षा-योग्य तथ्य सिखाते हैं —
जैसे नागर बनाम द्रविड़ शिखर, मथुरा बनाम गांधार मुखाकृति, आठों शास्त्रीय नृत्यों की पहचान।
व्यक्तियों के चित्र (नेहरू, पटेल, अंबेडकर आदि) जान-बूझकर नहीं रखे गए — परीक्षा में चेहरा नहीं,
नाम↔कार्य↔वर्ष पूछा जाता है, जो तालिका से बेहतर याद होता है।
सभी चित्र स्थानीय रूप से सहेजे हैं, अतः बिना इंटरनेट भी दिखेंगे।
नया — स्वयं जाँच
हर अध्याय के प्रत्येक खंड के अंत में अब उसी विषय के वास्तविक प्रश्न जोड़े गए हैं
(कुल 204 प्रश्न, हमारे अपने 1950-प्रश्न बैंक से चुने हुए)। उत्तर छिपा रहता है —
पहले स्वयं हल कीजिए, फिर “उत्तर एवं व्याख्या देखें” पर क्लिक कीजिए।
यह जान-बूझकर है: दोबारा पढ़ने से याद नहीं होता, स्वयं को परखने से होता है।
जो प्रश्न गलत हो, उसी खंड को दोबारा पढ़िए — यही सबसे तेज़ तरीका है।
दृश्य पुनरावृत्ति पत्रों में अंतराल-पुनरावृत्ति अनुसूची भी दी गई है (दिन 1 · 7 · 21 · 45)।
इस भाग को कैसे पढ़ें
क्रम — 2.1 → 2.2 → 2.3 → 2.4 स्वाभाविक कालक्रम है। 2.5 (कला-संस्कृति)
सभी कालखंडों पर फैला है; इसे अंत में, या हर अध्याय के साथ समानांतर पढ़ें।
तालिकाएँ ही असली सामग्री हैं — पाँचों अध्यायों में कुल 192 सुमेलन-तालिकाएँ हैं।
UPPSC में सुमेलन, कालक्रम एवं अभिकथन–कारण मिलकर प्रश्नपत्र का 41% होते हैं।
पहली बार गद्य पढ़ें; पुनरावृत्ति में केवल तालिकाएँ एवं कालक्रम देखें।
ट्रैप-बॉक्स अवश्य पढ़ें — कुल 61 हैं। ये वही भ्रम हैं जिनसे आयोग
विकल्प (distractor) बनाता है; यहीं अंक कटते हैं।
उत्तर प्रदेश संदर्भ — कुल 72 बॉक्स। यही UPPSC को UPSC से अलग करता है,
इन्हें छोड़ें नहीं।
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UP का भार
इस भाग के UP-संदर्भ केवल “अतिरिक्त जानकारी” नहीं हैं। 2025 के मूल प्रश्नपत्र में
उत्तर प्रदेश से सीधे जुड़े प्रश्न थे — जैसे वर्तमान UP में स्थित सिंधु-सभ्यता स्थल। इतिहास में UP की
उपस्थिति (कौशांबी, श्रावस्ती, सारनाथ, कन्नौज, जौनपुर, आगरा, अवध, मेरठ, कानपुर, झाँसी, चौरी-चौरा, काकोरी)
इतनी सघन है कि इसे अलग से याद करने की आवश्यकता नहीं — अध्यायों में यथास्थान दिया गया है।