यह पृष्ठ पढ़ने के लिए नहीं, याद करने के लिए है। चित्र सजावट नहीं हैं —
हर कैप्शन में वही शैली-लक्षण है जिससे प्रश्न बनता है।
1. सम्पूर्ण कालखंड एक पट्टी में
पूर्व-मध्यकाल 750–1200तुर्क आक्रमण 1000–1206दिल्ली सल्तनत 1206–1526विजयनगर–बहमनी 1336–1565मुगल 1526–1707मराठा एवं उत्तर-मुगल 1707–1761
चौड़ाई कालावधि के अनुपात में नहीं; कालखंड ओवरलैप करते हैं — सल्तनत के भीतर ही विजयनगर, बहमनी एवं प्रांतीय राज्य उठे।
17गजनवी के आक्रमण (1000–1027)
5सल्तनत के वंश (1206–1526)
50%अलाउद्दीन का खराज
1565तालिकोटा — हम्पी का अंत
12अकबर के सूबे (1580)
8शिवाजी के अष्टप्रधान
25औरंगजेब के अंतिम वर्ष — दक्कन
2. निर्णायक युद्ध
तुर्क विजय 1191–94मुगल–अफगान 1526–40क्षेत्रीय निर्णय 1565, 1576राजधानी
तराइन हरियाणा में, चंदावर उत्तर प्रदेश में (फिरोजाबाद) — "स्थल ↔ राज्य" का यही युग्म सर्वाधिक उलटा जाता है। पानीपत तीन बार — 1526, 1556, 1761। खानवा 1527 · कन्नौज 1540 · हल्दीघाटी 1576 · तालिकोटा 1565। दौलताबाद — मुहम्मद बिन तुगलक की 1326–27 की राजधानी, ~1335 में वापसी।
3. दिल्ली सल्तनत — पाँच वंश
गुलाम 1206–1290ऐबक · इल्तुतमिश — दिल्ली, इक्ता, टंका, 1229 की मान्यता · रजिया · बलबन
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खलजी 1290–1320अलाउद्दीन — बाजार नियंत्रण, दाग-चेहरा, नकद वेतन, दक्षिण के करद राज्य
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तुगलक 1320–1414मु. बिन तुगलक के प्रयोग · फ़िरोज़ — नहरें, जौनपुर, दीवान-ए-खैरात
सल्तनत के पाँच वंश — क्रम"गुलाम खाए तुरंत सैकड़ों लड्डू"
गुलाम → खलजी → तुगलक → सैयद → लोदी; संस्थापक उसी क्रम में — ऐबक,
जलालुद्दीन फ़िरोज़, गयासुद्दीन, खिज्र खाँ, बहलोल। इब्राहीम लोदी — युद्धभूमि में मरने वाला एकमात्र दिल्ली सुल्तान।
मुहम्मद बिन तुगलक के पाँच प्रयोग — क्रम"दोआब से दौलताबाद, फिर सिक्का–खुरासान–कराचिल"
दोआब में कर-वृद्धि (1326–27, अकाल के वर्षों में) → दौलताबाद स्थानांतरण → सांकेतिक मुद्रा (1329–32) →
खुरासान → कराचिल (~1329–30); छठा — दीवान-ए-कोही (~1337–38)।
अलाई दरवाजा (1311, अलाउद्दीन खलजी) — भारत में सच्ची मेहराब एवं सच्चे गुंबद का पहला वैज्ञानिक उदाहरण; इससे पहले कोरबेल (शिलाएँ आगे बढ़ाकर बनी) मेहराब चलती थी — जैसे पास के कुतुब मीनार एवं कुव्वत-उल-इस्लाम में, जिन्हें ऐबक ने आरंभ कर इल्तुतमिश ने पूरा किया (मीनार संत बख्तियार काकी को समर्पित)। मेहराब की कमल-कलिका झालर खलजी शैली की पहचान है। · Public domain · Vssun
यहीं भ्रम होता है — सल्तनत
तीन फ़िरोज़: जलालुद्दीन फ़िरोज़ खलजी · फ़िरोज़ शाह तुगलक · फ़िरोज़ शाह बहमनी।
गोरी की प्रथम पराजय गुजरात (1178) में भीम द्वितीय से, तराइन (1191) में नहीं।
दाग एवं चेहरा — सर्वप्रथम अलाउद्दीन, पुनर्जीवित शेरशाह, फिर मुगल मनसबदारी में।
सराय-ए-अदल में अनाज नहीं — उसके लिए मंडी एवं शहना-ए-मंडी।
15वीं सदी — दिल्ली सिकुड़ी, शक्ति प्रांतों में बँटी: कश्मीर 1339 · बंगाल 1342 · खानदेश 1382 · जौनपुर–शर्की 1394 · मालवा–मांडू 1401 · गुजरात–अहमदाबाद 1407। बहमनी की राजधानी गुलबर्गा से बीदर गई; तुंगभद्रा पार विजयनगर (हम्पी) — दोनों का स्थायी झगड़ा रायचूर दोआब।अटाला मस्जिद — शर्की शैली: ऊँचा ढलवाँ तोरण-द्वार जो गुंबद को ढक लेता है और मीनारों का पूर्ण अभाव। नींव फ़िरोज़ शाह तुगलक ने रखी, 1408 में इब्राहीम शाह शर्की ने पूर्ण की — इन्हीं के काल में जौनपुर "शीराज़-ए-हिन्द" कहलाया। · CC BY-SA 4.0 · Rangan Datta Wikiहम्पी का प्रस्तर रथ — वस्तुतः गरुड़ का मंदिर, ग्रेनाइट खंडों से रथ-रूप में गढ़ा; विट्ठल एवं हजारा राम मंदिर कृष्णदेव राय की देन। विजयनगर शैली की पहचान — ऊँचा रायगोपुरम, कल्याण-मंडप एवं यालि स्तंभ। 1565 के बाद हम्पी फिर नहीं बसा; आज UNESCO धरोहर एवं ₹50 के नोट पर। · CC BY-SA 4.0 · Ram Nagesh Thota
विजयनगर के चार वंश एक साँस में — "संसार, तू आ!" :
संगम 1336–1485 (हरिहर–बुक्का; देवराय द्वितीय ने मुस्लिम तीरंदाज भर्ती किए) → सालुव 1485–1505 →
तुलुव 1505–1570 (कृष्णदेव राय — आमुक्तमाल्यद, अष्टदिग्गज, रायचूर 1520) → अराविडु 1570–1646।
दक्कन की पाँच सल्तनतें — राज्य ↔ वंश"अहमद का निज़ाम, बीजा का आदिल, बरार का इमाद, बीदर का बरीद, गोल का कुतुब"
पाँचों 1490–1512 के बीच बहमनी के टूटने से बने।
तालिकोटा (23 जनवरी 1565) में इनमें से चार लड़ीं — बरार सम्मिलित नहीं था।
यात्री-युग्म: कोंटी → देवराय प्रथम · रज़्ज़ाक → देवराय द्वितीय · पायस → कृष्णदेव ·
नुनिज़ → अच्युतदेव · निकितिन → बहमनी · इब्न बतूता → मु. बिन तुगलक।
5. दो प्रशासन आमने-सामने
दिल्ली सल्तनत
वैधता: सुल्तान + शरीअत; 1229 में खलीफा से मंसूर
इक्ता: राजस्व-वसूली का अधिकार, स्वामित्व नहीं; हस्तांतरणीय; अधिशेष "फवाजिल" केंद्र को
ग्राम: खुत, मुकद्दम, चौधरी — वंशानुगत मध्यस्थ
राजस्व: खराज — उपज का 1/5 से 1/2; अलाउद्दीन ने 50%
सेना: नकद वेतन, दाग एवं चेहरा (अलाउद्दीन)
विजयनगर
वैधता: राजा सर्वोच्च, पर राजाज्ञाएँ देवता विरूपाक्ष के नाम से; महाप्रधान प्रमुख मंत्री
अमरम्/नायंकार: नायक को भू-क्षेत्र, बदले में सैनिक; आगे वंशानुगत होकर पालेगार
ग्राम:आयंगार — 12 वंशानुगत अधिकारी, बदले में कर-मुक्त भूमि
राजस्व: सिद्धांततः उपज का 1/6; व्यवसाय, विवाह एवं बंदरगाह-कर
इकाई: मंडलम् → नाडु → स्थल → ग्राम
6. मध्यकालीन उत्तर प्रदेश
सल्तनत एवं युद्ध-स्थलसूर–मुगल केंद्रभक्ति एवं सूफी
बदायूँ — इल्तुतमिश का इक्ता · कन्नौज — 1018 की लूट, 1540 की पराजय · चंदावर 1194 · कड़ा — 1296 में जलालुद्दीन का वध · जौनपुर — 1359/1394/1479 · कालिंजर (बाँदा) — 1545 में शेरशाह की मृत्यु · चुनार — उसका पहला दुर्ग · आगरा 1504 · फतेहपुर सीकरी 1571 · मगहर — कबीर 1518 · जायस — पद्मावत 1540 · वाराणसी — रामानंद, कबीर, रविदास।
उत्तर प्रदेश संदर्भ — जो सीधे प्रश्न बनता है
जौनपुर की शृंखला: 1359 (फ़िरोज़ शाह ने बसाया) → 1394 (मलिक सरवर की शर्की सल्तनत) →
1408 (अटाला मस्जिद) → 1479 (बहलोल लोदी द्वारा विलय)।
मुगल उत्तराधिकार — क्रम"बाबा हुए अकबर, जहाँ शाह औरंग"
बाबर → हुमायूँ → अकबर → जहाँगीर → शाहजहाँ → औरंगजेब।
बीच का 15 वर्ष का अंतराल सूर वंश (1540–55) का है — कालक्रम-प्रश्न में यही छिपाया जाता है।
अकबर की धार्मिक नीति — कालक्रम"तीरथ-जज़िया छोड़े, इबादत-महज़र जोड़े, फिर दीन गढ़े"
1563 तीर्थयात्रा कर समाप्त → 1564 जज़िया समाप्त → 1575 इबादतखाना (1578 से सभी धर्मों के लिए) →
1579 महज़र → 1582 दीन-ए-इलाही। आजीवन नीति सुलह-ए-कुल; जज़िया औरंगजेब ने 1679 में पुनः लगाया।
शेरशाह का मकबरा, सासाराम — झील के बीच चबूतरे पर अष्टकोणीय मकबरा, कोनों पर छतरियाँ: लोदी-अफगान परंपरा का शिखर तथा मुगल उद्यान-मकबरे से ठीक पहले की कड़ी। मृत्यु 1545 में कालिंजर (बाँदा) में विस्फोट से; उसका चाँदी का रुपया (~178 ग्रेन) आधुनिक रुपये का पूर्वज। · CC BY-SA 3.0 · Nandanupadhyayबुलंद दरवाजा — लगभग 54 मीटर, भारत का सर्वोच्च प्रवेश-द्वार: विशाल अर्ध-गुंबदीय पेशताक, ऊपर छतरियों की पंक्ति, लाल बलुआ पत्थर पर संगमरमर की जड़ाई — अकबरी शैली। गुजरात विजय (1572–73) की स्मृति में बना; फतेहपुर सीकरी 1571–1585 राजधानी — यहीं इबादतखाना (1575) एवं सलीम चिश्ती की दरगाह। · CC BY-SA 3.0 · Marcin Białekताजमहल (~1632–1653) — मकबरा चारबाग के केंद्र में नहीं, उत्तरी छोर पर (हुमायूँ के मकबरे से यही भिन्नता), दोहरा प्याजाकार गुंबद, चार पृथक मीनारें, संगमरमर पर पित्रादुरा — यह परंपरा आगरा के इतमाद-उद-दौला (नूरजहाँ द्वारा निर्मित प्रथम पूर्णतः संगमरमर भवन) से आई। वास्तुकार उस्ताद अहमद लाहौरी — पादशाहनामा के लेखक अब्दुल हमीद लाहौरी नहीं। · CC BY-SA 4.0 · Yann; edited by King of Hearts
इक्ता — सल्तनत
व्यवस्थित रूप इल्तुतमिश ने दिया
क्षेत्र से राजस्व वसूलने का अधिकार, भूमि का स्वामित्व नहीं
धारक मुक्ती/वली; अधिशेष फवाजिल केंद्र को
हस्तांतरणीय — यही इसे यूरोपीय सामंतवाद से अलग करता है
फ़िरोज़ शाह ने वंशानुगत किया → केंद्रीय नियंत्रण ढीला
मनसब एवं जागीर — मुगल
व्यवस्थित रूप अकबर ने दिया (~1573–75)
ज़ात = श्रेणी एवं वेतन; सवार = कितने घुड़सवार
वेतन नक़दी या जागीर — हर मनसबदार जागीरदार नहीं
जागीर 3–4 वर्ष में स्थानांतरित; केवल वतन जागीर वंशानुगत
संकट — बेजागीरी तथा जमा-हासिल का अंतर
9. मराठा — शक्ति का विकास
शिवाजी 1630–1680गनिमी कावा · अफजल खाँ 1659 · सूरत 1664 एवं 1670 · पुरंदर 1665 · राज्याभिषेक 1674
अष्टप्रधान — क्रम एवं कार्य"पेशवा-अमात्य-सचिव-मंत्री · सुमंत-सेनापति-पंडित-न्याय"
पेशवा (प्रशासन) · अमात्य/मजुमदार (वित्त) · सचिव/सुरनवीस (पत्राचार) ·
मंत्री/वाकिया-नवीस (दैनंदिनी एवं गुप्तचर) · सुमंत/दबीर (विदेश) · सेनापति/सरनौबत ·
पंडितराव (धर्म-दान) · न्यायाधीश। कुंजी — केवल पंडितराव एवं न्यायाधीश के पास सैन्य दायित्व नहीं था।
अंतिम जाँच — यही छह अंक खींच ले जाते हैं
चौथ = 25%, सरदेशमुखी = 10% — प्रतिशत उलट दिए जाते हैं।