यह पृष्ठ पढ़ने के लिए नहीं, दोहराने के लिए है। इस अध्याय की स्मृति-शक्ति
मानचित्र, समयरेखा एवं तुलना में है — परीक्षा अधिनियम↔प्रावधान, व्यवस्था↔क्षेत्र
और केंद्र↔नेता पूछती है, चेहरा पहचानने को नहीं कहती। इसीलिए यहाँ तीन मानचित्र हैं, एक भी सजावटी चित्र नहीं।
1. सम्पूर्ण कालखंड एक पट्टी में
व्यापार का युग 1498–1757प्लासी–बक्सर 1757–65द्वैध शासन 1765–72कंपनी राज्य — विस्तार एवं नीतियाँ 1772–1857विद्रोह 1857–58ताज का शासन 1858–1947
पट्टी की चौड़ाई कालावधि के अनुपात में नहीं, पठन-सुविधा के लिए है।
1757प्लासी — राजनीतिक प्रवेश
1764बक्सर — कंपनी 'शासक' बनी
1793स्थायी बंदोबस्त · कॉर्नवालिस
14अधिनियम, 1773–1947
51%रैयतवाड़ी का क्षेत्र
10 मई1857 — मेरठ
1858कंपनी शासन का अंत
2. संवैधानिक अधिनियम 1773 → 1947 — इस अध्याय की रीढ़
हर अधिनियम का एक निर्णायक प्रावधान। ऊपर सात कंपनी-काल के, नीचे सात ताज के शासन के।
1773 रेगुलेटिंगबंगाल का गवर्नर-जनरल — प्रथम वारेन हेस्टिंग्स; सर्वोच्च न्यायालय, कलकत्ता (1774)
1781 संशोधकगवर्नर-जनरल-इन-काउंसिल सर्वोच्च न्यायालय की अधिकारिता से बाहर किया गया
1784 पिट्सराजनीतिक मामले बोर्ड ऑफ कंट्रोल को — कंपनी एवं ताज का 'द्वैध शासन'
1793 चार्टरगवर्नर-जनरल को परिषद के निर्णय रद्द (override) करने का अधिकार
1813 चार्टरव्यापारिक एकाधिकार समाप्त (चाय एवं चीन छोड़कर); शिक्षा हेतु ₹1 लाख
1833 चार्टरभारत का गवर्नर-जनरल — प्रथम बेंटिंक; कंपनी का व्यापार समाप्त; धारा 87
1853 चार्टरविधायी-कार्यकारी पृथक्करण; सिविल सेवा में खुली प्रतियोगिता
1858 शासनशासन ताज को; भारत सचिव + 15 सदस्यीय भारत परिषद; वायसराय — प्रथम कैनिंग
1861 परिषदविधि-निर्माण में भारतीयों का मनोनयन; पोर्टफोलियो प्रणाली
1892 परिषदबजट पर चर्चा एवं प्रश्न का अधिकार — मतदान नहीं; 'निर्वाचन' शब्द तक नहीं
1909 मॉर्ले–मिंटोपरिषद 16 → 60; मुसलमानों के लिए पृथक निर्वाचक मंडल
1919 मांटेग्यू–चेम्सफोर्डप्रांतों में द्वैध शासन; द्विसदनीय केंद्रीय विधानमंडल; प्रत्यक्ष निर्वाचन
1935 शासनप्रांतीय स्वायत्तता (1937 से); तीन सूचियाँ — 59 · 54 · 36; संघ का प्रस्ताव लागू नहीं
1947 स्वतंत्रतामाउंटबेटन योजना (3 जून) — दो अधिराज्य; भारत सचिव का पद समाप्त
चारों चार्टर एक्ट के वर्ष 3 पर समाप्त होते हैं — 1793, 1813, 1833, 1853।
इनसे पहले के तीन 1770 के दशक के — रेगुलेटिंग 1773 → संशोधक 1781 → पिट्स 1784।
ताज के शासन के अधिनियम — दो परिवार“परिषद 61–92–09 · शासन 58–19–35”
भारतीय परिषद अधिनियम तीन — 1861, 1892, 1909। भारत शासन अधिनियम तीन — 1858, 1919, 1935।
अंत में 1947 का स्वतंत्रता अधिनियम। '1909 का भारत शासन अधिनियम' जैसा विकल्प तत्काल गलत है।
यहीं भ्रम होता है — 'द्वैध शासन' तीन बार
1765–72 बंगाल — कंपनी को दीवानी, नवाब को निज़ामत; समाप्त हेस्टिंग्स ने (1772)।
1784 पिट्स एक्ट — डाइरेक्टर्स बनाम बोर्ड ऑफ कंट्रोल; समाप्त 1858 में।
1919 प्रांतों में — हस्तांतरित बनाम आरक्षित विषय; समाप्त 1935 से, जिसने इसे केंद्र में प्रस्तावित किया — पर वह लागू ही नहीं हुआ।
3. व्यापारी से शासक तक
व्यापारी · 1600–1757सूरत 1613, मद्रास 1639, बंबई 1661/68, कलकत्ता 1690/98; 1717 का फ़रमान
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दीवान · 1765–72बंगाल-बिहार-उड़ीसा की दीवानी; अधिकार बिना उत्तरदायित्व — 1770 का अकाल
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शासक · 1772–1857हेस्टिंग्स से डलहौज़ी — युद्ध, सहायक संधि, व्यपगत; 1856 में अवध
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ताज · 1858–1947वायसराय एवं भारत सचिव; परिषद अधिनियमों की शृंखला
विस्तार के चार औज़ार1765–1856
प्रत्यक्ष युद्धमैसूर 4 (1767–99) · मराठा 3 (1775–1818) · सिख 2 (1845–49) · बर्मा 3 (1824–85) → सिंध 1843, पंजाब 1849, निचला बर्मा 1852
सहायक संधि — वेलेज़लीहैदराबाद 1798 → मैसूर एवं तंजौर 1799 → अवध 1801 → पेशवा/बसीन 1802 → भोंसले एवं सिंधिया 1803
'कुशासन' का आरोपअवध 1856 — वाजिद अली शाह मटियाबुर्ज भेजे गए
यहीं भ्रम होता है — विलय का आधार
अवध (1856) का विलय व्यपगत सिद्धांत से नहीं, 'कुशासन' के आरोप पर हुआ।
पंजाब 1849 एवं सिंध 1843 युद्ध-विजय से मिले। "सही सुमेलित नहीं है" प्रारूप का प्रिय विकल्प।
4. तीन भू-राजस्व व्यवस्थाएँ — मानचित्र से
स्थायी बंदोबस्त ≈19%रैयतवाड़ी ≈51%महालवाड़ी ≈30%
एक ही प्रश्न के तीन उत्तर — लगान किससे? नीला = ज़मींदार, लाल = सीधे रैयत, हरा = गाँव/महाल।
ध्यान दें — बनारस एवं मद्रास के उत्तरी सरकार भी स्थायी बंदोबस्त में थे।
स्थायी बंदोबस्त · 1793
कॉर्नवालिस (आँकड़े जॉन शोर के)
बंदोबस्त ज़मींदार से — वही स्वामी
बंगाल, बिहार, उड़ीसा, बनारस, उत्तरी सरकार — ≈19%
लगान सदा के लिए स्थिर; राज्य 10/11
सूर्यास्त कानून, पटनी
रैयतवाड़ी · 1820
टॉमस मुनरो (आरंभ रीड, बारामहल 1792)
बंदोबस्त सीधे रैयत से — बीच में कोई नहीं
मद्रास, बंबई, असम, कुर्ग — ≈51% (सबसे बड़ा)
शुद्ध उपज का ≈आधा; 20–30 वर्ष पर पुनर्निर्धारण
रैयत, पट्टा; नकद भुगतान → साहूकार
महालवाड़ी · 1822 / 1833
मैकेंज़ी (रेगु. VII, 1822), फिर बर्ड (रेगु. IX, 1833)
बंदोबस्त गाँव/महाल से — संयुक्त उत्तरदायित्व
उ.-प. प्रांत, अवध, पंजाब, मध्य भारत — ≈30%
किराया-मूल्य का 80% → 66% (बर्ड) → 50% (सहारनपुर नियम 1855)
महाल, पट्टीदारी, भाईचारा
व्यवस्था ↔ क्षेत्र ↔ जनक“कॉर्न बंगाल में, मुनरो मद्रास में, बर्ड उत्तर में”
कॉर्नवालिस → बंगाल (ज़मींदार) · मुनरो → मद्रास-बंबई (रैयत) ·
बर्ड → उत्तर-पश्चिम प्रांत एवं पंजाब (महाल)। विस्तार भी जोड़ें — 19 · 51 · 30।
महालवाड़ी के दो वर्ष हैं — 1822 मैकेंज़ी, 1833 बर्ड।
उत्तर प्रदेश संदर्भ — एक प्रदेश, दो व्यवस्थाएँ
बनारस प्रांत में जोनाथन डंकन के 1789 के दशसाला बंदोबस्त को 1795 में स्थायी कर दिया गया —
पूर्वी उ.प्र. में बंगाल जैसा ज़मींदारी ढाँचा बना। इसके विपरीत उत्तर-पश्चिम प्रांत एवं अवध में महालवाड़ी लागू हुई,
और अवध में तालुकेदारी का रूप विकसित हुआ — 1856 में इन्हीं की भूमि छिनने से वे 1857 के विद्रोह की रीढ़ बने;
1859 के बाद कैनिंग ने भूमि लौटाकर उन्हें स्थायी सहयोगी बना लिया।
5. 1857 का विद्रोह — केंद्र एवं नेता
विद्रोह का आरंभ-बिंदुप्रमुख केंद्रमध्य भारत / बिहार
विद्रोह की भौगोलिक सीमा ही उसकी असफलता बताती है — गंगा का मैदान एवं मध्य भारत;
पंजाब, बंगाल एवं दक्षिण लगभग अछूते रहे। बैरकपुर में 29 मार्च को मंगल पांडे की घटना हुई,
पर सामूहिक विद्रोह 10 मई को मेरठ से आरंभ हुआ।
केंद्र ↔ नेता — क्रम में“ज़फ़र · नाना · बेगम · रानी · खान · मौलवी · कुँवर”
दिल्ली बहादुर शाह ज़फ़र (प्रतीक) एवं बख़्त खाँ (वास्तविक) · कानपुर नाना साहब, तात्या टोपे, अज़ीमुल्ला खाँ ·
लखनऊ बेगम हज़रत महल (पुत्र बिरजिस क़द्र) · झाँसी रानी लक्ष्मीबाई · बरेली खान बहादुर खाँ ·
फ़ैज़ाबाद मौलवी अहमदुल्ला शाह · जगदीशपुर/आरा (बिहार) कुँवर सिंह।
साथ — इलाहाबाद लियाक़त अली · मथुरा देवी सिंह · बिजनौर महमूद खाँ · फ़र्रुख़ाबाद तुफ़ज़्ज़ुल हसन खाँ।
1857 — कारण
राजनीतिक: व्यपगत से विलय; अवध 1856; नाना साहब की पेंशन बंद; मुग़ल उपाधि का अंत
आर्थिक: कठोर भू-राजस्व; अवध के 'संक्षिप्त बंदोबस्त' से तालुकेदारों की भूमि छिनना
सामाजिक-धार्मिक: मिशनरी गतिविधि; जाति-निर्योग्यता निवारण अधिनियम 1850; 'धर्म में हस्तक्षेप' का भय
सैनिक: पदोन्नति सूबेदार से ऊपर नहीं; सामान्य सेवा भर्ती अधिनियम 1856; अनुपात ≈1:5
तात्कालिक: एनफ़ील्ड P-53 के चर्बीयुक्त कारतूस
1857 — परिणाम
1858 का भारत शासन अधिनियम — कंपनी शासन का अंत; भारत सचिव एवं वायसराय
1 नवंबर 1858 — महारानी की घोषणा, कैनिंग ने इलाहाबाद में पढ़ी
व्यपगत त्याग; 1862 से दत्तक की 'सनद' — रियासतें "तूफ़ान के विरुद्ध बाँध"
'फूट डालो और राज करो' संस्थागत; मुग़ल वंश का अंत — ज़फ़र रंगून निर्वासित (मृत्यु 1862)
यहीं भ्रम होता है — 1857 के चार जाल
मंगल पांडे — बैरकपुर, 29 मार्च 1857 (फाँसी 8 अप्रैल); मेरठ में नहीं।
झाँसी का पतन अप्रैल 1858, पर रानी की मृत्यु जून 1858 में ग्वालियर के निकट — दो अलग घटनाएँ।
लखनऊ हज़रत महल · फ़ैज़ाबाद अहमदुल्ला शाह · इलाहाबाद लियाक़त अली · बरेली खान बहादुर खाँ — आपस में बदलकर पूछे जाते हैं।
दमन का क्रम — दिल्ली सित. 57 → कानपुर दिस. 57 → लखनऊ मार्च 58 → झाँसी अप्रैल 58 → बरेली मई 58 → ग्वालियर जून 58; शांति-घोषणा 8 जुलाई 1859।
6. 1857 का मुख्य रंगमंच — उत्तर प्रदेश
प्रमुख विद्रोह-केंद्रअन्य केंद्रअंग्रेजों के पक्ष मेंदिल्ली — उ.प्र. के बाहर
आरंभ मेरठ से, प्रतीक दिल्ली, पर सबसे लंबा संघर्ष अवध एवं रुहेलखंड में। दिल्ली उ.प्र. के बाहर है,
इसीलिए रेखा के बाहर दिखती है; कानपुर के पास ही बिठूर — नाना साहब का केंद्र।
बनारस के राजा एवं बड़े ज़मींदार अंग्रेजों के साथ रहे — विद्रोह उ.प्र. में भी सर्वसम्मत नहीं था।
उत्तर प्रदेश संदर्भ — नाम एवं 'प्रथम'
नामों का क्रम: आगरा प्रेसीडेंसी (1834) → उत्तर-पश्चिम प्रांत (1836) → उ.-प. प्रांत एवं अवध (1877) →
संयुक्त प्रांत आगरा एवं अवध (1902) → संयुक्त प्रांत (1937) → उत्तर प्रदेश (1950)।
इलाहाबाद उच्च न्यायालय — 17 मार्च 1866 को आगरा में, 1869 में इलाहाबाद स्थानांतरित।
इलाहाबाद विश्वविद्यालय 1887 — भारत का चौथा। उत्तर भारत की प्रथम रेल इलाहाबाद–कानपुर, 3 मार्च 1859।
7. सुधार आंदोलन — संस्था, संस्थापक, वर्ष
बंगाल
राजा राममोहन रायआत्मीय सभा 1815 · ब्रह्म समाज 1828 · सती-निषेध 1829 के प्रेरक
देवेंद्रनाथ → केशवचंद्र सेनतत्वबोधिनी 1839 · विभाजन 1866 · सिविल मैरिज एक्ट 1872 · साधारण ब्रह्म समाज 1878
विद्यासागर · डेरोज़ियोविधवा पुनर्विवाह अधिनियम 1856 · यंग बंगाल
महाराष्ट्र
आत्माराम पांडुरंगप्रार्थना समाज 1867, बंबई · रानाडे एवं भंडारकर
ज्योतिबा फुलेसत्यशोधक समाज 1873, पुणे · 'गुलामगिरी'
उत्तर भारतUPPSC का केंद्र
स्वामी दयानंदआर्य समाज — 10 अप्रैल 1875, बंबई · 'सत्यार्थ प्रकाश' · शुद्धि · गुरु विरजानंद से मथुरा में शिक्षा · डी.ए.वी. 1886, गुरुकुल कांगड़ी 1902
सर सैयद अहमद खाँसाइंटिफ़िक सोसाइटी 1864 · मदरसतुल उलूम 1875 → MAO कॉलेज 1877 → AMU 1920
नानौतवी एवं गंगोहीदारुल उलूम देवबंद 1866 (सहारनपुर) · नदवा का दारुल उलूम 1898 लखनऊ
अखिल भारतीय एवं दक्षिण
विवेकानंदशिकागो धर्म संसद 1893 · रामकृष्ण मिशन 1897, बेलूर मठ
ब्लावात्स्की एवं ऑल्कॉटथियोसोफिकल सोसाइटी 1875 न्यूयॉर्क → 1882 अड्यार · बेसेंट 1907 में अध्यक्ष
नारायण गुरु · पेरियारएस.एन.डी.पी. योगम 1903 · आत्म-सम्मान आंदोलन 1925
संस्थापक ↔ संस्था“राम–ब्रह्म · आत्मा–प्रार्थना · दया–आर्य · विवेक–मिशन”
राममोहन → ब्रह्म समाज 1828 · आत्माराम पांडुरंग → प्रार्थना समाज 1867 ·
दयानंद → आर्य समाज 1875 · विवेकानंद → रामकृष्ण मिशन 1897।
1875 में दो संस्थाएँ — आर्य समाज (बंबई) एवं थियोसोफिकल सोसाइटी (न्यूयॉर्क)। रामकृष्ण की मृत्यु 1886 में हो चुकी थी —
मिशन के संस्थापक विवेकानंद हैं।
तीन 'मैग्ना कार्टा'“सत्रह कंपनी · पैंतीस प्रेस · चौवन शिक्षा”
1717 फर्रुखसियर का फ़रमान = कंपनी का · 1835 मेटकाफ़ एक्ट = भारतीय प्रेस का ·
1854 वुड डिस्पैच = अंग्रेजी शिक्षा का। तीन विश्वविद्यालय 1857 में बने।
8. मुख्य कालक्रम — 1498 से 1858
1498 · 1600वास्को द गामा कालीकट · एलिज़ाबेथ प्रथम का चार्टर (सूरत में कारखाना 1613)
1717फर्रुखसियर का फ़रमान — 'कंपनी का मैग्ना कार्टा'
23 जून 1757प्लासी — क्लाइव बनाम सिराजुद्दौला; युद्ध कम, षड्यंत्र अधिक
22 अक्टू. 1764बक्सर — हेक्टर मुनरो बनाम मीर कासिम + शुजाउद्दौला + शाह आलम द्वितीय
1765 · 1770 · 1772दीवानी एवं द्वैध शासन का आरंभ · बंगाल का महा-अकाल · हेस्टिंग्स द्वारा द्वैध शासन की समाप्ति
1793 · 1799स्थायी बंदोबस्त, चार्टर एक्ट, कॉर्नवालिस कोड · चतुर्थ आंग्ल-मैसूर — 4 मई को टीपू की मृत्यु
1818 · 1829 · 1835पेशवा पद समाप्त, बाजीराव द्वितीय बिठूर (कानपुर) · सती-निषेध (बेंटिंक) · मैकाले मिनट एवं मेटकाफ़ प्रेस एक्ट
16 अप्रैल 1853भारत की प्रथम रेल — बंबई (बोरीबंदर)–ठाणे, ≈34 किमी; डलहौज़ी
1856अवध का विलय; विधवा पुनर्विवाह अधिनियम; सामान्य सेवा भर्ती अधिनियम
1857–5829 मार्च बैरकपुर → 10 मई मेरठ → 11–12 मई दिल्ली; 1 नवंबर 1858 इलाहाबाद में महारानी की घोषणा
अंतिम दोहराव — 'प्रथम' की सूची
प्रथम गवर्नर-जनरल — बंगाल का हेस्टिंग्स (1773), भारत का बेंटिंक (1833); प्रथम वायसराय कैनिंग (1858)
व्यपगत से विलय प्रथम सतारा 1848 · सहायक संधि प्रथम हैदराबाद 1798 · प्रथम भारतीय ICS सत्येंद्रनाथ टैगोर 1863
प्रथम समाचार-पत्र बंगाल गजट (1780) · चौथा विश्वविद्यालय इलाहाबाद (1887) · प्रथम आने एवं अंतिम जाने वाले पुर्तगाली (1498–1961)
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