भाग 2 · अध्याय 2.4 · दृश्य पुनरावृत्ति

भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन — एक नज़र में

समयरेखा · मानचित्र · स्मृति-सूत्र · तुलना — 1885 से 1950 तक की पूरी कड़ी अंतिम दौर की पुनरावृत्ति के लिए

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इसे कैसे प्रयोग करें

यह अध्याय का सबसे अधिक कालक्रम पूछा जाने वाला भाग है — इसलिए इस पृष्ठ की धुरी समयरेखा (खंड 3) है। पहले युग-पट्टी देखकर चार चरणों का ढाँचा मन में बैठाइए, फिर समयरेखा को ऊपर से नीचे दो बार पढ़िए, और अंत में किसी भी चार घटनाएँ उठाकर स्वयं क्रम बनाने का अभ्यास कीजिए।

मानचित्र इसलिए हैं कि स्थान↔घटना का सुमेलन बार-बार पूछा जाता है — अधिवेशन कहाँ, नमक सत्याग्रह किस तट पर, समानांतर सरकार किस ज़िले में।

1. चार चरण — पूरा आंदोलन एक पट्टी में

उदारवादी (नरम दल)
1885–1905 · याचिका एवं प्रार्थना
उग्रवादी एवं क्रांतिकारी
1905–1916 · बहिष्कार, स्वदेशी
गांधी युग
1917–1939 · जन-आंदोलन
अंतिम चरण
1939–1950 · भारत छोड़ो से संविधान

चरण-रेखाएँ सुविधा के लिए हैं — क्रांतिकारी धारा 1897 से 1934 तक, गांधी युग के समानांतर भी चलती रही।

72प्रथम अधिवेशन के प्रतिनिधि, 1885
379जलियाँवाला बाग — सरकारी मृतक संख्या
22चौरी-चौरा में जले पुलिसकर्मी
78दांडी मार्च के आरंभिक सत्याग्रही
385दांडी मार्च की दूरी (किमी), 24 दिन
148पूना पैक्ट में आरक्षित स्थान (71 से बढ़ाकर)
5651947 में देशी रियासतें

2. कांग्रेस के अधिवेशन — मानचित्र से याद कीजिए

बम्बई 1885 कलकत्ता 1906 सूरत 1907 नागपुर 1920 लाहौर 1929 इलाहाबाद 1888 लखनऊ 1916 कानपुर 1925 मेरठ 1946 मद्रास 1887 गया 1922 बेलगाँव 1924 फ़ैज़पुर त्रिपुरी 1939 रामगढ़ 1940
निर्णायक अधिवेशनउत्तर प्रदेश में हुए अधिवेशनअन्य स्मरणीय अधिवेशन
कांग्रेस के वे अधिवेशन जो परीक्षा में बार-बार आते हैं। कई नगरों में एक से अधिक अधिवेशन हुए — यहाँ प्रत्येक के साथ वही वर्ष दिया गया है जो सर्वाधिक पूछा जाता है। लाहौर (1929) तथा कराची (1931) आज पाकिस्तान में हैं — कराची रेखा के भी बाहर पड़ने से यहाँ नहीं दिखाया गया। फ़ैज़पुर (जलगाँव, महाराष्ट्र) किसी गाँव में हुआ प्रथम अधिवेशन है; त्रिपुरी जबलपुर (मध्य प्रदेश) के पास है, पूर्वोत्तर का त्रिपुरा नहीं।
पहले चार अधिवेशन — क्रम “बम · कल · मद · इला”

बम्बई (1885, व्योमेश चंद्र बनर्जी) → कलकत्ता (1886, दादाभाई नौरोजी) → मद्रास (1887, बदरुद्दीन तैयबजी — प्रथम मुस्लिम अध्यक्ष) → इलाहाबाद (1888, जॉर्ज यूल — प्रथम अंग्रेज़ अध्यक्ष)। चारों वर्ष लगातार हैं — 85, 86, 87, 88।

उत्तर प्रदेश में हुए आठ अधिवेशन “इला तीन · लख तीन · कान एक · मेर एक”

इलाहाबाद — 1888 (जॉर्ज यूल), 1892 (व्योमेश चंद्र बनर्जी), 1910 (विलियम वेडरबर्न)। लखनऊ — 1899 (रमेश चंद्र दत्त), 1916 (अंबिका चरण मजूमदार — लखनऊ समझौता), 1936 (जवाहरलाल नेहरू)। कानपुर — 1925 (सरोजिनी नायडू)। मेरठ — 1946 (जे.बी. कृपलानी, स्वतंत्रता-पूर्व अंतिम अधिवेशन)। 3 + 3 + 1 + 1 = 8

अधिवेशन — यहीं भ्रम होता है

3. समयरेखा — इस अध्याय की धुरी

चरण 1 · उदारवादी, 1885–1905

28 दिसंबर 1885बम्बई की गोकुलदास तेजपाल पाठशाला में कांग्रेस की स्थापना — 72 प्रतिनिधि; अध्यक्ष व्योमेश चंद्र बनर्जी, महासचिव ए.ओ. ह्यूम
1887 · 1888बदरुद्दीन तैयबजी प्रथम मुस्लिम अध्यक्ष (मद्रास); जॉर्ज यूल प्रथम अंग्रेज़ अध्यक्ष — इलाहाबाद, UP का प्रथम अधिवेशन
1896 · 1899कलकत्ता में पहली बार ‘वंदे मातरम्’; लखनऊ अधिवेशन (रमेश चंद्र दत्त) — स्थायी बंदोबस्त की माँग

चरण 2 · उग्रवादी एवं स्वदेशी, 1905–1916

1905–0619 जुलाई — कर्ज़न की बंग-भंग घोषणा, 16 अक्टूबर को लागू (शोक दिवस, राखी-बंधन); 7 अगस्त कलकत्ता टाउन हॉल — स्वदेशी-बहिष्कार का आरंभ; दिसंबर 1906 कलकत्ता — ‘स्वराज’ कांग्रेस का लक्ष्य; 30 दिसंबर 1906 ढाका — मुस्लिम लीग
दिसंबर 1907सूरत विभाजन — अध्यक्ष रासबिहारी घोष; कांग्रेस नरम एवं गरम दल में बँटी; 1908 मद्रास के नए संविधान से उग्रवादी बाहर
1915–169 जनवरी 1915 गांधीजी की भारत-वापसी; अप्रैल 1916 तिलक की इंडियन होम रूल लीग (बेलगाँव) एवं सितंबर 1916 बेसेंट की ऑल इंडिया होम रूल लीग (मद्रास); दिसंबर 1916 — लखनऊ समझौता तथा दोनों दलों का पुनर्मिलन

चरण 3 · गांधी युग, 1917–1939

1917–18चंपारण (प्रथम सत्याग्रह, तिनकठिया) → अहमदाबाद (प्रथम अनशन, 15 मार्च 1918) → खेड़ा (प्रथम कर-बंदी, पटेल); 20 अगस्त 1917 — मॉन्टेग्यू घोषणा
6 व 13 अप्रैल 1919रौलट सत्याग्रह की देशव्यापी हड़ताल; जलियाँवाला बाग हत्याकांड (डायर; उपराज्यपाल ओ’ड्वायर); 30 मई — टैगोर की नाइटहुड-वापसी
1920–2131 अगस्त खिलाफत समिति द्वारा असहयोग का आरंभ; सितंबर कलकत्ता विशेष अधिवेशन (लाजपत राय); दिसंबर नागपुर — चार आने सदस्यता, CWC का गठन; 7 जनवरी 1921 — मुंशीगंज (रायबरेली) गोलीकांड
4 व 12 फरवरी 1922चौरी-चौरा कांड (गोरखपुर ज़िला, 22 पुलिसकर्मी) → बारदोली प्रस्ताव से असहयोग स्थगित; 18 मार्च को गांधीजी को छह वर्ष की सज़ा
1924–25अक्टूबर 1924 — HRA की स्थापना, कानपुर (सान्याल, बिस्मिल); 9 अगस्त 1925 — काकोरी कांड; 17/19 दिसंबर 1927 — फाँसियाँ
1928–293 फरवरी 1928 साइमन आयोग का बम्बई आगमन (सभी सदस्य अंग्रेज़); अगस्त 1928 नेहरू रिपोर्ट (औपनिवेशिक स्वराज, 19 मौलिक अधिकार); 19 दिसंबर 1929 लाहौर — पूर्ण स्वराज; 26 जनवरी 1930 प्रथम ‘स्वतंत्रता दिवस’
12 मार्च – 6 अप्रैल 1930दांडी मार्च एवं नमक कानून का उल्लंघन; 18 अप्रैल चटगाँव शस्त्रागार लूट; 23 अप्रैल पेशावर (किस्सा ख्वानी); 21 मई धरासणा
5 व 23 मार्च 1931गांधी-इरविन (दिल्ली) समझौता; उसके 18 दिन बाद भगत सिंह, सुखदेव एवं राजगुरु को फाँसी (27 फरवरी को आज़ाद, इलाहाबाद)
16 अगस्त व 24 सितंबर 1932मैकडोनाल्ड का साम्प्रदायिक निर्णय (दलितों को पृथक निर्वाचक मंडल) → यरवदा में अनशन → पूना पैक्ट (संयुक्त निर्वाचक मंडल + 148 आरक्षित स्थान)
1936–37लखनऊ अधिवेशन (नेहरू) तथा 11 अप्रैल 1936 को वहीं अखिल भारतीय किसान सभा; 1937 के प्रांतीय चुनाव — 17 जुलाई को संयुक्त प्रांत में गोविंद बल्लभ पंत का मंत्रिमंडल

चरण 4 · अंतिम दौर, 1939–1950

1939–40त्रिपुरी संकट (पंत प्रस्ताव) → 29 अप्रैल बोस का त्यागपत्र → 3 मई फॉरवर्ड ब्लॉक; अक्टूबर–नवंबर मंत्रिमंडलों का त्यागपत्र; 23 मार्च 1940 लाहौर (पाकिस्तान) प्रस्ताव; 8 अगस्त अगस्त प्रस्ताव
मार्च व अगस्त 1942क्रिप्स मिशन — “डूबते बैंक पर आगे की तारीख़ का चेक”; 8 अगस्त ग्वालिया टैंक — भारत छोड़ो प्रस्ताव, “करो या मरो”; 9 अगस्त नेतृत्व की गिरफ़्तारी, अरुणा आसफ़ अली का ध्वजारोहण; बलिया में प्रथम समानांतर सरकार
1943–444 जुलाई बोस ने INA का नेतृत्व लिया (प्रथम INA — मोहन सिंह, 1942); 21 अक्टूबर 1943 सिंगापुर में आज़ाद हिंद की अस्थायी सरकार; 14 अप्रैल 1944 मोइरांग में ध्वजारोहण
194616 मई कैबिनेट मिशन योजना (संघ + तीन समूह, पाकिस्तान अस्वीकृत); 16 अगस्त प्रत्यक्ष कार्रवाई दिवस; 2 सितंबर अंतरिम सरकार (नेहरू); 9 दिसंबर संविधान सभा की प्रथम बैठक
3 जून – 17 अगस्त 1947माउंटबेटन योजना → 18 जुलाई भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम को शाही स्वीकृति → 14/15 अगस्त की मध्यरात्रि स्वतंत्रता → 17 अगस्त रैडक्लिफ़ रेखा की घोषणा
195024 जनवरी — संयुक्त प्रांत का नाम ‘उत्तर प्रदेश’; 26 जनवरी — संविधान लागू (अंगीकृत 26 नवंबर 1949)

4. 1919–22 की कड़ी — एक साँस में

रौलट एक्टमार्च 1919 · “ना दलील, ना वकील, ना अपील”
जलियाँवाला बाग13 अप्रैल 1919 · बैसाखी · डायर
खिलाफत17 अक्टूबर 1919 खिलाफत दिवस · अली बंधु
असहयोग1920–22 · नागपुर अधिवेशन · चरखा-खादी
चौरी-चौरा4 फरवरी 1922 · आंदोलन स्थगित
1919 से 1922 तक का क्रम “रोया जलियाँ, खिला असहयोग, चौरी पर रुका”

रोलट (मार्च 1919, हड़ताल 6 अप्रैल) → जलियाँवाला बाग (13 अप्रैल 1919) → खिलाफत (अक्टूबर–नवंबर 1919) → असहयोग (अगस्त–दिसंबर 1920 से आरंभ) → चौरी-चौरा (4 फरवरी 1922) पर स्थगन। यही पाँच कड़ियाँ कालक्रम-प्रश्न में उलट-पुलट कर दी जाती हैं।

निकट तिथियों का जाल — इसी पर प्रश्न बनता है

5. सविनय अवज्ञा — देश का नक्शा ही उत्तर है

साबरमती दांडी धरासणा वेदारण्यम पय्यन्नूर बालासोर मिदनापुर पेशावर शोलापुर रायबरेली आगरा
नमक सत्याग्रहकर-बंदी / अन्य रूपसंयुक्त प्रांत — लगान-बंदी
सविनय अवज्ञा आंदोलन (1930–34) के क्षेत्रीय रूप। पेशावर आज पाकिस्तान में है, इसलिए वह रेखा के बाहर दिखता है — 23 अप्रैल 1930 का किस्सा ख्वानी बाज़ार कांड यहीं हुआ। तमिलनाडु की नमक-यात्रा तिरुचिरापल्ली से वेदारण्यम तक थी; गुजरात में बारदोली–सूरत में कर-बंदी चली।
दांडी मार्च — नमक सत्याग्रह
दांडी मार्च — 12 मार्च 1930 को साबरमती आश्रम (अहमदाबाद) से आरंभ, 78 चुने हुए सत्याग्रहियों के साथ, लगभग 385 किमी पैदल, 24 दिन में दांडी (नवसारी ज़िला) पहुँचकर 6 अप्रैल 1930 को नमक कानून का उल्लंघन; गांधीजी की गिरफ़्तारी 5 मई 1930। · चित्र: Public domain · Yann
सुमेलन — क्षेत्र ↔ रूप ↔ नेता (रट लीजिए)
तीनों गोलमेज सम्मेलन — कांग्रेस कहाँ थी “ना — गांधी — ना”

प्रथम (12 नवंबर 1930): कांग्रेस अनुपस्थित — नेता जेल में; अंबेडकर एवं रियासतें उपस्थित। द्वितीय (7 सितंबर 1931): केवल गांधीजी, कांग्रेस के एकमात्र प्रतिनिधि; वायसराय विलिंगडन। तृतीय (17 नवंबर 1932): कांग्रेस फिर अनुपस्थित; परिणति — श्वेत पत्र (1933) एवं भारत शासन अधिनियम 1935। तीनों लंदन में।

6. क्रांतिकारी धारा — दो चरणों का वंश-वृक्ष

प्रथम चरण, 1897–1917

  • अभिनव भारत 1904, नासिक · सावरकर बंधु (मित्र मेला, 1899 से)
    • नासिक षड्यंत्र 1909 · अनंत कान्हेरे — कलेक्टर जैक्सन
  • अनुशीलन समिति मार्च 1902, कलकत्ता · प्रमथनाथ मित्र
    • युगांतर 1906 · बारींद्र घोष, भूपेंद्रनाथ दत्त
      • अलीपुर षड्यंत्र 1908 · अरविंद घोष बरी
    • ढाका अनुशीलन 1906 · पुलिन बिहारी दास
  • इंडिया हाउस 1905, लंदन · श्यामजी कृष्ण वर्मा
    • मदनलाल ढींगरा 1 जुलाई 1909 · कर्ज़न वायली
  • ग़दर पार्टी 1913, सैन फ्रांसिस्को · सोहन सिंह भकना, लाला हरदयाल
    • ग़दर विद्रोह फरवरी 1915 विफल · करतार सिंह सराभा
  • बनारस · मैनपुरी 1915 सान्याल · 1918 गेंदालाल दीक्षित एवं बिस्मिल

द्वितीय चरण, 1922–1934

  • हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन (HRA) अक्टूबर 1924, कानपुर · सान्याल, बिस्मिल, जोगेश चटर्जी
    • काकोरी कांड 9 अगस्त 1925 · 8-डाउन ट्रेन, लखनऊ के पास
      • फाँसियाँ 17/19 दिसंबर 1927 · गोंडा, गोरखपुर, फ़ैज़ाबाद, नैनी
    • नौजवान भारत सभा मार्च 1926, लाहौर · भगत सिंह
      • HSRA सितंबर 1928, फ़िरोज़शाह कोटला (दिल्ली) · आज़ाद कमांडर-इन-चीफ़
        • सॉन्डर्स-वध 17 दिसंबर 1928, लाहौर
          • असेंबली बम 8 अप्रैल 1929 · भगत सिंह, बटुकेश्वर दत्त
            • फाँसी 23 मार्च 1931 · लाहौर षड्यंत्र (द्वितीय)
  • इंडियन रिपब्लिकन आर्मी चटगाँव, 18 अप्रैल 1930 · सूर्य सेन “मास्टरदा”
उत्तर प्रदेश संदर्भ — पाँच षड्यंत्र मुकदमे, कालक्रम में

बनारस (1915, सचींद्रनाथ सान्याल) → मैनपुरी (1918, गेंदालाल दीक्षित एवं बिस्मिल) → कानपुर बोल्शेविक (1924, एम.एन. रॉय, डांगे, मुज़फ़्फ़र अहमद) → काकोरी (1925–27) → मेरठ (1929–33, डांगे, स्प्रैट, ब्रैडली) — पाँचों का केंद्र आज का उत्तर प्रदेश है, और यही क्रम कालक्रम-प्रश्न में पूछा जाता है। बिस्मिल एवं अशफ़ाक़उल्ला खाँ दोनों शाहजहाँपुर के थे; आज़ाद इलाहाबाद के अल्फ्रेड पार्क में शहीद हुए (27 फरवरी 1931)।

7. 1942 — समानांतर सरकारें एवं आज़ाद हिंद

बलिया तामलुक सतारा तालचेर बम्बई पूना मोइरांग
समानांतर सरकारभारत छोड़ो के मील-पत्थरआज़ाद हिंद फ़ौज
अगस्त क्रांति (1942) की चार समानांतर सरकारें तथा दो मील-पत्थर — बम्बई का ग्वालिया टैंक मैदान (8 अगस्त 1942 का प्रस्ताव) एवं पूना का आगा खाँ पैलेस (गांधीजी का बंदी-गृह)। मोइरांग (मणिपुर) में 14 अप्रैल 1944 को आज़ाद हिंद का ध्वज फहराया गया — इम्फाल या कोहिमा में नहीं।
समानांतर सरकारें — क्रम एवं पहचान “बलिया पहले · तामलुक की वाहिनी · सतारा की प्रति सरकार”

बलिया (अगस्त 1942, चित्तू पांडे “शेर-ए-बलिया”) — देश की प्रथम समानांतर सरकार, कुछ ही दिन चली। तामलुक (17 दिसंबर 1942, मिदनापुर; सतीश चंद्र सामंत) — ताम्रलिप्त जातीय सरकार, जिसका अपना सशस्त्र दस्ता विद्युत वाहिनी तथा महिला दस्ता भगिनी सेना था। सतारा (1943 से, नाना पाटिल एवं वाई.बी. चव्हाण) — प्रति सरकार, सबसे व्यापक क्षेत्र। चौथी — तालचेर (उड़ीसा)। कालक्रम यही है: बलिया → तामलुक → सतारा।

उत्तर प्रदेश संदर्भ — “बाग़ी बलिया”

भारत छोड़ो में UP का पूर्वी भाग सर्वाधिक उग्र रहा — बलिया, आज़मगढ़, ग़ाज़ीपुर, गोरखपुर, बनारस, इलाहाबादचित्तू पांडे ने 19 अगस्त 1942 के आसपास बलिया में जेल तोड़कर बंदी छुड़ाए और ज़िला प्रशासन अपने हाथ में ले लिया — देश की प्रथम समानांतर सरकार। आज़मगढ़ के मधुबन एवं मुहम्मदाबाद में भी थानों पर कब्ज़े हुए; इसीलिए “बाग़ी बलिया”।

8. उत्तर प्रदेश — आंदोलन का रणक्षेत्र

काकोरी मैनपुरी शाहजहाँपुर चौरी-चौरा लखनऊ कानपुर इलाहाबाद मेरठ बनारस प्रतापगढ़ रायबरेली हरदोई बलिया आज़मगढ़
क्रांतिकारी एवं उग्र केंद्रकांग्रेस अधिवेशन एवं राजनीतिअवध के किसान केंद्रभारत छोड़ो, 1942
उत्तर प्रदेश — राष्ट्रीय आंदोलन का रणक्षेत्र। चौरी-चौरा गोरखपुर ज़िले में है; काकोरी लखनऊ से लगभग 15 किमी दूर — इसीलिए दोनों बिंदु यहाँ लगभग मिले हुए दिखते हैं। गढ़वाल (चंद्र सिंह गढ़वाली) उस समय संयुक्त प्रांत का ही भाग था, किंतु वह क्षेत्र आज उत्तराखंड में है, अतः इस रेखा में नहीं आता।
एक ही पंक्ति में UP का पूरा योगदान

9. दो तुलनाएँ जो परीक्षा में सबसे अधिक भ्रमित करती हैं

असहयोग, 1920–22

  • प्रकृति: सरकार से सहयोग न करना — संस्थाओं का बहिष्कार
  • लक्ष्य: स्वराज (अपरिभाषित) + खिलाफत
  • मुस्लिम भागीदारी: व्यापक (खिलाफत के कारण)
  • महिला भागीदारी: सीमित
  • रचनात्मक पक्ष: चरखा-खादी, राष्ट्रीय विद्यालय, तिलक स्वराज कोष (₹1 करोड़)
  • दमन: अपेक्षाकृत कम
  • अंत: चौरी-चौरा के बाद अचानक (12 फरवरी 1922)

सविनय अवज्ञा, 1930–34

  • प्रकृति: क़ानून तोड़ना — नमक कानून, वन कानून, कर-बंदी
  • लक्ष्य: पूर्ण स्वराज (लाहौर, 1929)
  • मुस्लिम भागीदारी: बहुत सीमित
  • महिला भागीदारी: व्यापक — धरना, नमक-निर्माण, वस्त्र-बहिष्कार
  • रचनात्मक पक्ष: कराची प्रस्ताव (मौलिक अधिकार एवं आर्थिक नीति), हरिजन कार्य
  • दमन: अत्यधिक — लगभग 90,000 गिरफ़्तारियाँ
  • अंत: क्रमिक — गांधी-इरविन (1931), मई 1933 स्थगन, अप्रैल 1934 वापसी

नरम दल (उदारवादी), 1885–1905

  • आधार: शहरी उच्च मध्यवर्ग — वकील, पत्रकार
  • लक्ष्य: साम्राज्य के भीतर स्वशासन
  • पद्धति: याचिका, प्रस्ताव, संवैधानिक आंदोलन (“राजनीतिक भिक्षावृत्ति”)
  • ब्रिटिश शासन: सुधार-योग्य, ईश्वर की देन
  • प्रेरणा: पाश्चात्य उदारवाद
  • चेहरे: गोखले, फ़िरोज़शाह मेहता, दादाभाई नौरोजी, सुरेंद्रनाथ बनर्जी

गरम दल (उग्रवादी), 1905–1916

  • आधार: निम्न मध्यवर्ग, छात्र, शहरी युवा
  • लक्ष्य: स्वराज — आगे चलकर पूर्ण स्वतंत्रता
  • पद्धति: निष्क्रिय प्रतिरोध, बहिष्कार, स्वदेशी, आत्मबलिदान
  • ब्रिटिश शासन: शोषणकारी, जिसे हटाना ही है
  • प्रेरणा: भारतीय परंपरा, धार्मिक-सांस्कृतिक प्रतीक
  • चेहरे: लाल-बाल-पाल (लाजपत राय, तिलक, बिपिन चंद्र पाल) एवं अरविंद घोष

10. अंतिम दौर — 1947 की चार तिथियाँ

20 फरवरी 1947एटली की घोषणा — जून 1948 तक सत्ता-हस्तांतरण
3 जून 1947माउंटबेटन योजना — दो अधिराज्य, तिथि खिसककर 15 अगस्त
18 जुलाई 1947भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम को शाही स्वीकृति
14/15 अगस्त 1947स्वतंत्रता — नेहरू का “Tryst with Destiny”
17 अगस्त 1947रैडक्लिफ़ रेखा की घोषणा — स्वतंत्रता के बाद
1947 — चार तिथियाँ, एक लय में “तीन जून योजना · अठारह जुलाई क़ानून · पंद्रह अगस्त आज़ादी · सत्रह अगस्त सीमा”

योजना → क़ानून → आज़ादी → सीमा-रेखा। रैडक्लिफ़ रेखा की घोषणा स्वतंत्रता के दो दिन बाद हुई, पहले नहीं। भारत के प्रथम गवर्नर-जनरल माउंटबेटन, पाकिस्तान के जिन्ना; गांधीजी 15 अगस्त को दिल्ली में नहीं, कलकत्ता में उपवास पर थे।

1946–56 — अंतिम खंड के जाल
अंतराल-पुनरावृत्ति — कब दोहराएँ

एक बार पढ़कर भूल जाना स्वाभाविक है। बढ़ते अंतराल पर दोहराने से वही तथ्य दीर्घकालिक स्मृति में बैठता है। हर बार पूरा अध्याय नहीं — केवल यह पृष्ठ।

  1. दिन 0 पूरा अध्याय पढ़ें, स्वयं-जाँच के प्रश्न स्वयं हल करें
  2. दिन 1 केवल यह पृष्ठ — मानचित्र, समयरेखा, सूत्र
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