भाग 2 · भारत का इतिहास

2.3 आधुनिक भारत

यूरोपीय आगमन से 1857 के विद्रोह तक — ब्रिटिश सत्ता की स्थापना, नीतियाँ, सुधार आंदोलन एवं प्रतिरोध

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विषय-सूची

  1. यूरोपीय शक्तियों का आगमन एवं कर्नाटक युद्ध
  2. बंगाल पर अधिकार — प्लासी, बक्सर, इलाहाबाद की संधि, द्वैध शासन
  3. कंपनी शासन का विस्तार — युद्ध, सहायक संधि एवं व्यपगत सिद्धांत
  4. भू-राजस्व व्यवस्थाएँ — स्थायी बंदोबस्त, रैयतवाड़ी, महालवाड़ी
  5. ब्रिटिश आर्थिक नीतियाँ — विऔद्योगीकरण, धन-निष्कासन, रेल, अकाल
  6. प्रशासनिक, न्यायिक, सैन्य एवं पुलिस ढाँचे का विकास
  7. संवैधानिक विकास — 1773 से 1947 तक के अधिनियम
  8. सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलन
  9. सामाजिक विधान एवं महिला शिक्षा
  10. शिक्षा एवं प्रेस का विकास
  11. 1857 का विद्रोह
  12. जनजातीय एवं किसान विद्रोह
  13. सम्पूर्ण कालक्रम — एक दृष्टि में
इस अध्याय का परीक्षा-भार

2025 के मूल प्रश्नपत्र में आधुनिक भारत एवं स्वतंत्रता संग्राम से लगभग 9 प्रश्न आए। इनमें से अधिकांश सुमेलन (अधिनियम↔वर्ष, संस्था↔संस्थापक, विद्रोह↔नेता), कालक्रम तथा अभिकथन–कारण प्रारूप में थे। इसलिए इस अध्याय में हर खंड के साथ एक सुमेलन-तालिका तथा एक तिथि-सूची दी गई है — प्रश्न ठीक उसी रूप में बनता है।

1. यूरोपीय शक्तियों का आगमन एवं कर्नाटक युद्ध

1.1 पृष्ठभूमि — नए समुद्री मार्ग की खोज

1453 में उस्मानी तुर्कों द्वारा कुस्तुनतुनिया (Constantinople) पर अधिकार कर लेने से यूरोप और एशिया के बीच का परंपरागत स्थल-मार्ग महँगा और असुरक्षित हो गया। मसालों, सूती वस्त्र, नील और रेशम की माँग बनी हुई थी, अतः पुर्तगाल और स्पेन ने समुद्री मार्ग खोजने में पूँजी लगाई। इसी खोज का परिणाम था कि वास्को द गामा (Vasco da Gama) मई 1498 (सामान्यतः 20 मई) में अफ्रीका की परिक्रमा करते हुए कालीकट के निकट कप्पड़ पहुँचा और वहाँ के शासक जमोरिन (Zamorin) से मिला। भारत आने का सीधा समुद्री मार्ग खुलते ही यूरोपीय व्यापारिक कंपनियों की एक के बाद एक आमद शुरू हुई।

1.2 पुर्तगाली (Portuguese) — प्रथम आने वाले, अंतिम जाने वाले

पुर्तगालियों की देन — तंबाकू, आलू, मिर्च, टमाटर, अनानास, काजू, पपीता जैसी फसलें; भारत का प्रथम मुद्रणालय (गोवा, 1556); तथा गोथिक-बरोक चर्च स्थापत्य।

1.3 डच (Dutch)

1602 में नीदरलैंड की स्टेट्स-जनरल ने विभिन्न कंपनियों को मिलाकर डच ईस्ट इंडिया कंपनी (Vereenigde Oost-Indische Compagnie — VOC) बनाई। डचों की मुख्य रुचि मसाला-द्वीपों (इंडोनेशिया) में थी, भारत उनके लिए वस्त्र और नील का पूरक बाज़ार था।

1.4 अंग्रेज (English)

1.5 फ्रांसीसी (French) तथा डेनिश (Danish)

सुमेलन-तालिका 1 : यूरोपीय कंपनी ↔ स्थापना ↔ प्रथम/प्रमुख केंद्र
शक्तिकंपनी की स्थापनाभारत में प्रथम कारखानाप्रमुख केंद्र
पुर्तगालीराज्य द्वारा संचालित (कंपनी नहीं)कोचीन (1503 में दुर्ग)गोवा, दमन, दीव, बसई, हुगली
अंग्रेज1600 (एलिज़ाबेथ प्रथम का चार्टर)सूरत (1613)मद्रास, बंबई, कलकत्ता
डच1602 (स्टेट्स-जनरल)मसुलीपट्टनम (1605)पुलिकट, नागपट्टनम, चिनसुरा, कोचीन
डेनिश1616 (क्रिश्चियन चतुर्थ)ट्रांकोबार (1620)ट्रांकोबार, सेरामपुर
फ्रांसीसी1664 (कॉलबर्ट)सूरत (1668)पांडिचेरी, चंद्रनगर, माहे, कारिकल
सावधानी — यहीं भ्रम होता है

1.6 कर्नाटक युद्ध (Carnatic Wars) — आंग्ल-फ्रांसीसी संघर्ष

दक्षिण भारत में अंग्रेजों और फ्रांसीसियों के बीच तीन युद्ध हुए। इनका तात्कालिक कारण भारतीय उत्तराधिकार-विवादों में हस्तक्षेप था, पर मूल कारण यूरोप का आंग्ल-फ्रांसीसी वैमनस्य तथा दक्षिण के व्यापार पर एकाधिकार की होड़ थी। डूप्ले (Dupleix) ने ही सबसे पहले यह समझा कि भारतीय राजाओं के झगड़ों में सैन्य सहायता देकर राजनीतिक प्रभाव अर्जित किया जा सकता है — यही तकनीक आगे चलकर अंग्रेजों ने कहीं अधिक कुशलता से प्रयोग की।

सुमेलन-तालिका 2 : कर्नाटक युद्ध ↔ काल ↔ निर्णायक घटना ↔ संधि
युद्धकालयूरोपीय पृष्ठभूमिप्रमुख घटनाअंत
प्रथम कर्नाटक युद्ध1746–48ऑस्ट्रिया का उत्तराधिकार युद्धफ्रांसीसियों द्वारा मद्रास पर अधिकार; सेंट थोमे का युद्ध (अड्यार नदी) में छोटी फ्रांसीसी सेना ने अनवरुद्दीन की विशाल सेना को हरायाएक्स-ला-शापेल की संधि (1748) — मद्रास अंग्रेजों को वापस
द्वितीय कर्नाटक युद्ध1749–54यूरोप में शांति; भारत में उत्तराधिकार-विवादअंबूर का युद्ध (1749) में अनवरुद्दीन मारा गया; क्लाइव का अर्काट पर अधिकार (1751); डूप्ले की वापसी (1754)पांडिचेरी की संधि (1754)
तृतीय कर्नाटक युद्ध1756–63सप्तवर्षीय युद्ध (Seven Years' War)वांडीवाश का युद्ध, 22 जनवरी 1760 — सर आयर कूट ने काउंट लाली को हरायापेरिस की संधि (1763) — पांडिचेरी लौटाया गया पर किलेबंदी वर्जित
फ्रांसीसी क्यों हारे

(1) फ्रांसीसी कंपनी राज्य-नियंत्रित थी, अतः पेरिस की राजनीति और युद्धों पर निर्भर; अंग्रेजी कंपनी व्यापारियों की थी और आर्थिक रूप से अधिक स्वतंत्र। (2) अंग्रेजों के पास बंगाल जैसा समृद्ध संसाधन-आधार प्लासी के बाद उपलब्ध हो गया। (3) नौसैनिक श्रेष्ठता अंग्रेजों के पास थी। (4) फ्रांसीसी अधिकारियों में आपसी मतभेद (डूप्ले–लाबूर्दोने, लाली–बुसी) रहे। (5) अंग्रेजों के तीन सुदृढ़ केंद्र थे, फ्रांसीसियों का व्यावहारिक रूप से एक — पांडिचेरी।

उत्तर प्रदेश संदर्भ

सर टॉमस रो को मिली अनुमति के बाद कंपनी ने आगरा में कारखाना खोला — नील (indigo) और सूती वस्त्र के कारण आगरा उत्तर भारत में कंपनी की आरंभिक व्यापारिक चौकी बना। यमुना-गंगा मार्ग से माल आगरा–इलाहाबाद होते हुए हुगली पहुँचता था। यही व्यापारिक मार्ग आगे चलकर कंपनी के राजनीतिक विस्तार का भी मार्ग बना — 1765 में इलाहाबाद, 1775 में बनारस और 1856 में समूचा अवध कंपनी के नियंत्रण में आया।

परीक्षा-दृष्टि

UPPSC में बहु-पूछित: वांडीवाश का विजेता (सर आयर कूट, क्लाइव नहीं); प्रथम कर्नाटक युद्ध का अंत करने वाली संधि (एक्स-ला-शापेल); डूप्ले का प्रतिद्वंद्वी (क्लाइव/लॉरेंस); डचों की निर्णायक पराजय का युद्ध (बेदरा, 1759); भारत में प्रथम यूरोपीय मुद्रणालय (गोवा, 1556)।

स्वयं जाँच — इस खंड से 3 प्रश्न

प्र.1 सूची-I (क्षेत्र/घटना) को सूची-II (वर्ष) से सुमेलित कीजिए तथा सूचियों के नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
सूची-I: A. फ्रांसीसी बस्तियों का भारत को वास्तविक (de facto) हस्तांतरण  B. गोवा की मुक्ति (ऑपरेशन विजय)  C. फ्रांसीसी बस्तियों का विधिक (de jure) हस्तांतरण  D. सिक्किम का भारत संघ में विलय
सूची-II: 1. 1961  2. 1954  3. 1975  4. 1962
कूट:

AA-1, B-2, C-4, D-3BA-2, B-1, C-4, D-3CA-2, B-1, C-3, D-4DA-1, B-2, C-3, D-4
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (B)पांडिचेरी सहित फ्रांसीसी बस्तियों का वास्तविक (de facto) हस्तांतरण 1 नवंबर 1954 को हुआ, जबकि संधि-अनुसमर्थन के बाद विधिक (de jure) हस्तांतरण 1962 में पूरा हुआ; गोवा, दमन व दीव की मुक्ति 'ऑपरेशन विजय' द्वारा दिसंबर 1961 में हुई; तथा सिक्किम 1975 में भारत संघ का राज्य बना। अतः A-2, B-1, C-4, D-3 सही है।

प्र.2 प्रथम विश्व युद्ध में भारतीय सैनिकों की भागीदारी के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
1. युद्ध के दौरान लगभग 13 लाख भारतीय ब्रिटिश भारतीय सेना की ओर से सेवारत रहे।
2. विक्टोरिया क्रॉस प्राप्त करने वाले प्रथम भारतीय सैनिक सिपाही खुदादाद खान थे, जिन्हें अक्टूबर 1914 में बेल्जियम में दिखाए गए शौर्य के लिए यह सम्मान मिला।
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:

A1 और 2 दोनोंBन तो 1 और न ही 2Cकेवल 2Dकेवल 1
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (A)प्रथम विश्व युद्ध (1914-18) में लगभग 13 लाख भारतीय सैनिक तथा सहायक कर्मी ब्रिटिश भारतीय सेना में सेवारत रहे; अतः कथन 1 सही है। 129वीं बलूच रेजिमेंट के सिपाही खुदादाद खान को 31 अक्टूबर 1914 को होलेबेके (बेल्जियम) में मशीनगन चलाते रहने के लिए विक्टोरिया क्रॉस मिला — वे यह सम्मान पाने वाले प्रथम भारतीय थे; अतः कथन 2 भी सही है। 1911 से ही भारतीय सैनिक इस पदक के पात्र बनाए गए थे।

प्र.3 जहाँगीर के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
1. जहाँगीर ने प्रसिद्ध 'जंजीर-ए-अदल' (न्याय की जंजीर) लाहौर के किले में लगवाई थी।
2. 'तुजुक-ए-जहाँगीरी' फारसी भाषा में रचित जहाँगीर की आत्मकथा है।
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:

Aकेवल 2Bन तो 1 और न ही 2C1 और 2 दोनोंDकेवल 1
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (A)जहाँगीर ने न्याय की जंजीर आगरा के किले में शाहबुर्ज तथा यमुना तट के पत्थर के खंभे के बीच लगवाई थी, लाहौर में नहीं; अतः कथन 1 गलत है। उसकी आत्मकथा 'तुजुक-ए-जहाँगीरी' फारसी में है (बाबर की 'तुजुक-ए-बाबरी' तुर्की में थी), अतः कथन 2 सही है।

2. बंगाल पर अधिकार — प्लासी, बक्सर, इलाहाबाद की संधि, द्वैध शासन

2.1 बंगाल के स्वतंत्र नवाब

औरंगज़ेब की मृत्यु (1707) के बाद बंगाल व्यवहारतः स्वतंत्र हो गया। मुर्शिद कुली खाँ (1717–27) ने राजधानी ढाका से मुर्शिदाबाद स्थानांतरित की और राजस्व-व्यवस्था कसी। उसके बाद शुजाउद्दीन और सरफ़राज़ खाँ आए। 1740 में गिरिया के युद्ध में सरफ़राज़ को हराकर अलीवर्दी खाँ (1740–56) नवाब बना, जिसका अधिकांश शासनकाल मराठा 'बरगीर' आक्रमणों से लड़ने में बीता। उसके बाद उसका नाती सिराजुद्दौला (1756) गद्दी पर बैठा।

2.2 संघर्ष के कारण

जून 1756 में सिराजुद्दौला ने कलकत्ता पर अधिकार कर लिया और उसका नाम 'अलीनगर' रखा। इसी समय की तथाकथित 'ब्लैक होल' (अंधकूप) घटना का विवरण जे. ज़ेड. हॉलवेल ने दिया — जिसकी संख्याओं को अधिकांश आधुनिक इतिहासकार अतिरंजित मानते हैं। फरवरी 1757 में अलीनगर की संधि से अस्थायी समझौता हुआ, पर दोनों पक्ष उसे टालू मानते रहे।

2.3 प्लासी का युद्ध — 23 जून 1757

यह वस्तुतः युद्ध कम और षड्यंत्र अधिक था। सेनापति मीर जाफ़र, राय दुर्लभ, यार लतीफ़ तथा धनकुबेर जगत सेठ व व्यापारी अमीचंद पहले ही क्लाइव से मिल चुके थे। नवाब की ओर से केवल मीर मदन और मोहनलाल ने वास्तविक युद्ध लड़ा; मीर मदन के मारे जाते ही सेना बिखर गई। सिराजुद्दौला भागते हुए पकड़ा गया और मीर जाफ़र के पुत्र मीरन के आदेश पर मार डाला गया।

महत्व: प्लासी ने कंपनी को बंगाल में निर्णायक राजनीतिक प्रभाव दिया — नवाब अब कंपनी का मनोनीत व्यक्ति था। बंगाल के धन से ही कंपनी ने दक्षिण में फ्रांसीसियों को परास्त किया। किंतु प्लासी ने कंपनी की सैन्य श्रेष्ठता सिद्ध नहीं की — वह काम बक्सर ने किया।

2.4 मीर कासिम और बक्सर का युद्ध — 22 अक्टूबर 1764

मीर जाफ़र की माँगें पूरी न कर पाने पर 1760 में उसका दामाद मीर कासिम नवाब बनाया गया। मीर कासिम अपेक्षाकृत योग्य शासक था — उसने राजधानी मुर्शिदाबाद से हटाकर मुंगेर बनाई, सेना का आधुनिकीकरण किया और 1763 में आंतरिक व्यापार पर सभी शुल्क ही समाप्त कर दिए, ताकि भारतीय व्यापारी भी कंपनी-कर्मियों के बराबर आ जाएँ। अंग्रेजों को यह असह्य था — इसी से युद्ध छिड़ा (कटवा, गिरिया, उधवानाला)। पराजित मीर कासिम ने अवध के नवाब शुजाउद्दौला और मुग़ल बादशाह शाह आलम द्वितीय से संधि की।

22 अक्टूबर 1764 को बक्सर (बिहार) में मेजर हेक्टर मुनरो ने इस त्रिगुट को निर्णायक रूप से हरा दिया। बक्सर का महत्व यह है कि इसने सिद्ध कर दिया कि उत्तर भारत की तीनों सबसे बड़ी शक्तियाँ मिलकर भी कंपनी की अनुशासित सेना का सामना नहीं कर सकतीं।

प्लासी बनाम बक्सर — यह अंतर रटें

प्लासी (1757) — विश्वासघात से मिली विजय; लाभ केवल बंगाल तक; कंपनी अभी भी 'व्यापारी'। बक्सर (1764) — वास्तविक युद्ध; तीन शक्तियों पर विजय; परिणामस्वरूप दीवानी मिली और कंपनी 'शासक' बनी। इसीलिए कहा जाता है — "प्लासी ने द्वार खोला, बक्सर ने साम्राज्य दिया।"

2.5 इलाहाबाद की संधियाँ — अगस्त 1765

रॉबर्ट क्लाइव ने दूसरी बार गवर्नर बनकर (1765–67) दो पृथक संधियाँ कीं —

सुमेलन-तालिका 3 : इलाहाबाद की संधियाँ (1765)
किससेकंपनी को क्या मिलादूसरे पक्ष को क्या मिला
शुजाउद्दौला (अवध का नवाब)50 लाख रुपये युद्ध-हर्जाना; अवध में शुल्क-मुक्त व्यापार; कंपनी की सेना रखने का व्यय नवाब परअवध वापस मिला (कड़ा तथा इलाहाबाद छोड़कर); मराठों के विरुद्ध रक्षा का आश्वासन
शाह आलम द्वितीय (मुग़ल बादशाह)बंगाल, बिहार एवं उड़ीसा की दीवानी (राजस्व वसूली का अधिकार)26 लाख रुपये वार्षिक; निर्वाह हेतु कड़ा तथा इलाहाबाद के ज़िले; कंपनी के संरक्षण में इलाहाबाद में निवास

दीवानी मिलने का अर्थ था — कंपनी अब कानूनी रूप से बंगाल की राजस्व-स्वामी थी, जबकि क़ानून-व्यवस्था एवं फौजदारी न्याय (निज़ामत) का दायित्व नवाब पर ही रहा। यही द्वैध शासन (Dual Government) है।

2.6 द्वैध शासन (1765–1772) और उसका पतन

उत्तर प्रदेश संदर्भ — अवध, इलाहाबाद और बनारस
परीक्षा-दृष्टि

कालक्रम-प्रश्न का पसंदीदा समुच्चय: अलीनगर की संधि → प्लासी → बक्सर → इलाहाबाद की संधि → द्वैध शासन की समाप्ति (1757 फरवरी → 1757 जून → 1764 → 1765 → 1772)। अभिकथन–कारण में प्रायः पूछा जाता है — "बक्सर प्लासी से अधिक निर्णायक था" (अभिकथन सत्य) "क्योंकि उसमें कंपनी ने तीन संयुक्त शक्तियों को हराया" (कारण सत्य एवं सही व्याख्या)।

स्वयं जाँच — इस खंड से 3 प्रश्न

प्र.1 निम्नलिखित घटनाओं पर विचार कीजिए तथा इन्हें सही कालक्रमानुसार क्रम में व्यवस्थित कीजिए:
1. रेगुलेटिंग एक्ट का पारित होना
2. बक्सर का युद्ध
3. प्लासी का युद्ध
4. इलाहाबाद की संधि
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:

A3, 2, 4, 1B2, 3, 1, 4C2, 3, 4, 1D3, 2, 1, 4
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (A)प्लासी का युद्ध 23 जून 1757 को हुआ, बक्सर का युद्ध 22 अक्टूबर 1764 को, इलाहाबाद की संधि 1765 में (जिससे कंपनी को बंगाल, बिहार व उड़ीसा की दीवानी मिली) तथा रेगुलेटिंग एक्ट 1773 में पारित हुआ। अतः सही क्रम 3, 2, 4, 1 है।

प्र.2 देशी रियासतों के एकीकरण के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
1. जूनागढ़ में फरवरी 1948 में जनमत-संग्रह कराया गया, जिसमें भारी बहुमत भारत में विलय के पक्ष में रहा।
2. हैदराबाद के विरुद्ध सितंबर 1948 में 'ऑपरेशन पोलो' नामक पुलिस कार्रवाई की गई।
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:

Aकेवल 2Bन तो 1 और न ही 2C1 और 2 दोनोंDकेवल 1
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (C)जूनागढ़ के नवाब के पाकिस्तान में विलय की घोषणा के बाद जन-विरोध तथा नवाब के पलायन के पश्चात फरवरी 1948 में जनमत-संग्रह हुआ, जिसमें अत्यधिक बहुमत भारत के पक्ष में रहा; अतः कथन 1 सही है। हैदराबाद में रजाकारों की हिंसा के बीच सितंबर 1948 में 'ऑपरेशन पोलो' चलाया गया और निजाम ने आत्मसमर्पण किया; अतः कथन 2 भी सही है।

प्र.3 नीचे दो कथन दिए गए हैं, जिनमें से एक को अभिकथन (A) तथा दूसरे को कारण (R) कहा गया है।
अभिकथन (A): 1858 के भारत शासन अधिनियम द्वारा ईस्ट इंडिया कंपनी का शासन समाप्त कर दिया गया।
कारण (R): 1857 के विद्रोह ने कंपनी-शासन की प्रशासनिक विफलताओं को उजागर कर दिया था।
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:

A(A) और (R) दोनों सही हैं, किन्तु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं करता हैB(A) गलत है, किन्तु (R) सही हैC(A) सही है, किन्तु (R) गलत हैD(A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या करता है
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (D)1858 का अधिनियम, जिसे 'भारत के सुशासन हेतु अधिनियम' कहा गया, कंपनी-शासन को समाप्त कर भारत का शासन सीधे ब्रिटिश ताज को सौंपता है; अतः (A) सही है। 1857 के विद्रोह ने कंपनी के दोहरे नियंत्रण तथा उसकी प्रशासनिक विफलताओं को उजागर किया, यही अधिनियम का तात्कालिक कारण बना; अतः (R) सही है और (A) की उपयुक्त व्याख्या भी करता है।

3. कंपनी शासन का विस्तार — युद्ध, सहायक संधि एवं व्यपगत सिद्धांत

1765 से 1856 के बीच कंपनी ने तीन औज़ारों से भारत जीता — प्रत्यक्ष युद्ध, सहायक संधि (अप्रत्यक्ष अधीनता) और व्यपगत सिद्धांत (कानूनी बहाने से विलय)। तीनों के साथ एक चौथा औज़ार भी चलता रहा — 'कुशासन' के आरोप पर विलय।

3.1 आंग्ल-मैसूर युद्ध (1767–1799)

मैसूर में 1761 तक हैदर अली वास्तविक शासक बन चुका था। उसने फ्रांसीसी सहायता से आधुनिक सेना तथा डिंडीगुल में शस्त्रागार बनाया। उसका पुत्र टीपू सुल्तान ('मैसूर का शेर') अपने समय का सर्वाधिक दूरदर्शी भारतीय शासक था — उसने विदेश-नीति, नौसेना, व्यापारिक कंपनी और राजस्व-सुधार सबमें प्रयोग किए, श्रीरंगपट्टनम में 'स्वतंत्रता का वृक्ष' लगाया और जैकोबिन क्लब का सदस्य बना।

सुमेलन-तालिका 4 : आंग्ल-मैसूर युद्ध
युद्धकालभारतीय पक्षअंग्रेज गवर्नर-जनरलपरिणाम / संधि
प्रथम1767–69हैदर अलीमद्रास की संधि (1769) — यथास्थिति एवं पारस्परिक सहायता; हैदर की स्थिति सुदृढ़
द्वितीय1780–84हैदर अली → (1782 में मृत्यु) टीपूवारेन हेस्टिंग्समंगलौर की संधि (11 मार्च 1784) — यथास्थिति; प्रायः इसे वह अंतिम अवसर कहा जाता है जब किसी भारतीय शासक ने अंग्रेजों को शर्तें मानने पर विवश किया
तृतीय1790–92टीपू बनाम अंग्रेज + निज़ाम + मराठाकॉर्नवालिसश्रीरंगपट्टनम की संधि (18 मार्च 1792) — लगभग आधा राज्य छिना, 3 करोड़ हर्जाना, दो पुत्र बंधक
चतुर्थ1799टीपू सुल्तानवेलेज़ली4 मई 1799 को टीपू लड़ते हुए मारा गया; मैसूर की गद्दी वोडेयार वंश को सहायक संधि के अधीन लौटाई गई

3.2 आंग्ल-मराठा युद्ध (1775–1818)

सुमेलन-तालिका 5 : आंग्ल-मराठा युद्ध ↔ संधियाँ
युद्धकालप्रमुख संधियाँपरिणाम
प्रथम1775–82सूरत की संधि (1775, रघुनाथराव से) → पुरंदर की संधि (1776) → वडगाँव की संधि (1779) → सालबाई की संधि (1782)कोई पक्ष निर्णायक रूप से नहीं जीता; लगभग 20 वर्ष की शांति; अंग्रेजों को साल्सेट मिला
द्वितीय1803–05बसीन की संधि (31 दिसंबर 1802) — पेशवा बाजीराव द्वितीय ने सहायक संधि स्वीकार की; देवगाँव की संधि (भोंसले, 1803), सुर्जी-अर्जनगाँव की संधि (सिंधिया, 1803), राजघाट की संधि (होल्कर, 1805)असई, लासवाड़ी तथा अड़गाँव के युद्धों में मराठे पराजित; उड़ीसा, दिल्ली-आगरा तथा गुजरात के क्षेत्र कंपनी को
तृतीय1817–19पूना की संधि (जून 1817, पेशवा), ग्वालियर की संधि (नवंबर 1817, सिंधिया), मंदसौर की संधि (जनवरी 1818, होल्कर)खड़की, सीताबल्दी, कोरेगाँव एवं अष्टी के युद्ध; पेशवा पद समाप्त; शिवाजी के वंशज प्रताप सिंह को सतारा का राजा बनाया गया
उत्तर प्रदेश संदर्भ — बिठूर और 1857 की जड़

तृतीय आंग्ल-मराठा युद्ध के बाद अपदस्थ अंतिम पेशवा बाजीराव द्वितीय को 8 लाख रुपये वार्षिक पेंशन देकर बिठूर (कानपुर, उ.प्र.) भेज दिया गया। 1851 में उसकी मृत्यु पर कंपनी ने उसके दत्तक पुत्र नाना साहब की पेंशन बंद कर दी — यही अपमान 1857 में कानपुर के विद्रोह का तात्कालिक व्यक्तिगत कारण बना। इस प्रकार महाराष्ट्र में लड़े गए युद्ध का अंतिम विस्फोट उत्तर प्रदेश में हुआ।

3.3 आंग्ल-सिख युद्ध (1845–1849)

महाराजा रणजीत सिंह (मृत्यु 1839) के बाद लाहौर दरबार में अराजकता फैल गई। 1809 की अमृतसर की संधि से रणजीत सिंह ने सतलुज को सीमा मान लिया था; उनकी मृत्यु के बाद वह संतुलन टूट गया।

सुमेलन-तालिका 6 : आंग्ल-सिख युद्ध
युद्धकालप्रमुख युद्धक्षेत्रसंधि / परिणाम
प्रथम1845–46मुदकी, फ़िरोज़शाह, अलीवाल, सोबराँवलाहौर की संधि (9 मार्च 1846) — जालंधर दोआब कंपनी को, 1.5 करोड़ हर्जाना; अमृतसर की संधि (16 मार्च 1846) — कश्मीर 75 लाख में गुलाब सिंह को; भैरोवाल की संधि (16 दिसंबर 1846) — बालक दलीप सिंह के लिए ब्रिटिश रेज़िडेंट (हेनरी लॉरेंस) के अधीन अभिभावक परिषद
द्वितीय1848–49रामनगर, चिलियाँवाला (जनवरी 1849), गुजरात (21 फरवरी 1849)मुलतान के मूलराज के विद्रोह से आरंभ; गुजरात के युद्ध ('तोपों का युद्ध') के बाद 29 मार्च 1849 को डलहौज़ी ने पंजाब का विलय किया; दलीप सिंह को इंग्लैंड भेजा गया; प्रशासन तीन आयुक्तों के बोर्ड को सौंपा गया

3.4 आंग्ल-बर्मा युद्ध (1824–1885)

सुमेलन-तालिका 7 : आंग्ल-बर्मा युद्ध
युद्धकालगवर्नर-जनरल / वायसरायपरिणाम
प्रथम1824–26लॉर्ड एमहर्स्टयंडबू की संधि (24 फरवरी 1826) — अराकान एवं तेनासरिम कंपनी को; असम, मणिपुर, कछार तथा जयंतिया पर बर्मी दावा समाप्त; हर्जाना एवं रंगून में ब्रिटिश रेज़िडेंट
द्वितीय1852लॉर्ड डलहौज़ीनिचला बर्मा — पेगू तथा रंगून का विलय; कोई औपचारिक संधि नहीं, केवल विलय की घोषणा
तृतीय1885लॉर्ड डफ़रिनराजा थीबॉ की फ्रांसीसियों से निकटता बहाना बनी; ऊपरी बर्मा का विलय (1 जनवरी 1886); थीबॉ रत्नागिरि निर्वासित; 1937 में बर्मा भारत से अलग कर दिया गया

इसी विस्तार-क्रम में सिंध का विलय 1843 में चार्ल्स नेपियर ने किया (मीरानी एवं दब्बो के युद्ध) — एलनबरो के काल में। यह वह विलय है जिसे स्वयं ब्रिटिश अधिकारियों ने अनैतिक माना।

3.5 सहायक संधि (Subsidiary Alliance) — वेलेज़ली की प्रणाली

यद्यपि इसका बीज डूप्ले ने बोया और 1765 से कंपनी इसका प्रयोग करती रही, पर इसे व्यवस्थित नीति लॉर्ड वेलेज़ली (1798–1805) ने बनाया। शर्तें —

स्वीकार करने का क्रम: हैदराबाद (1798) → मैसूर (1799) → तंजौर (1799) → अवध (1801) → पेशवा/बसीन (1802) → भोंसले एवं सिंधिया (1803)।

उत्तर प्रदेश संदर्भ — अवध की 'आधी लूट'

1801 में नवाब सआदत अली खाँ द्वितीय पर सहायक संधि थोपकर वेलेज़ली ने रुहेलखंड, गोरखपुर तथा दोआब का बड़ा भाग कंपनी को दिलवा दिया — यही क्षेत्र आगे 'सीडेड एंड कॉन्क्वर्ड प्रॉविंसेज़' कहलाया और आधुनिक उत्तर प्रदेश का ढाँचा यहीं से बनना शुरू हुआ। शेष अवध 1856 में कुशासन के आरोप पर डलहौज़ी ने (7 फरवरी 1856 की घोषणा द्वारा) विलय कर लिया और नवाब वाजिद अली शाह को कलकत्ता के मटियाबुर्ज भेज दिया। ध्यान रहे — अवध का विलय व्यपगत सिद्धांत से नहीं हुआ; यह UPPSC का प्रिय ट्रैप है।

3.6 व्यपगत सिद्धांत (Doctrine of Lapse) — डलहौज़ी

सिद्धांत यह था कि यदि किसी आश्रित देशी राज्य के शासक की मृत्यु प्राकृतिक पुरुष उत्तराधिकारी के बिना हो जाए तो गोद लिए पुत्र को मान्यता न देकर राज्य कंपनी में मिला लिया जाएगा। डलहौज़ी ने इसे व्यवस्थित रूप से लागू किया, यद्यपि ऐसे विलय उससे पहले भी हुए थे।

सुमेलन-तालिका 8 : व्यपगत सिद्धांत से विलय (कालक्रम)
राज्यवर्षटिप्पणी
सतारा1848इस सिद्धांत से विलय होने वाला प्रथम राज्य
जैतपुर एवं संबलपुर1849
बघाट1850बाद में लौटाया गया
उदयपुर (छोटा उदयपुर/छत्तीसगढ़ का उदयपुर)1852कैनिंग ने बाद में लौटाया
झाँसी1853राजा गंगाधर राव के दत्तक पुत्र दामोदर राव को मान्यता नहीं; रानी लक्ष्मीबाई का दावा अस्वीकृत
नागपुर1854इस सिद्धांत से विलय हुआ सबसे बड़ा राज्य
सावधानी — विलय के आधार अलग-अलग हैं
सुमेलन-तालिका 9 : गवर्नर-जनरल / वायसराय ↔ प्रमुख उपाय
अधिकारीकालप्रमुख कार्य
वारेन हेस्टिंग्स1772–85द्वैध शासन की समाप्ति (1772); कलकत्ता में सर्वोच्च न्यायालय (1774); कलकत्ता मदरसा (1781); एशियाटिक सोसाइटी को संरक्षण (1784); रुहेला युद्ध; महाभियोग
लॉर्ड कॉर्नवालिस1786–93स्थायी बंदोबस्त (1793); कॉर्नवालिस कोड; सिविल सेवा का भारतीयकरण-विरोधी पुनर्गठन; तृतीय आंग्ल-मैसूर युद्ध; 'भारत में सिविल सेवा का जनक'
सर जॉन शोर1793–98अहस्तक्षेप की नीति
लॉर्ड वेलेज़ली1798–1805सहायक संधि; चतुर्थ आंग्ल-मैसूर युद्ध; फोर्ट विलियम कॉलेज (1800)
लॉर्ड विलियम बेंटिंक1828–35सती प्रथा पर रोक (1829); ठगी का दमन (कर्नल स्लीमन); मैकाले मिनट एवं अंग्रेजी को शिक्षा का माध्यम (1835); प्रथम गवर्नर-जनरल ऑफ इंडिया
लॉर्ड डलहौज़ी1848–56व्यपगत सिद्धांत; पंजाब एवं अवध का विलय; प्रथम रेल (1853); तार, डाक सुधार, लोक निर्माण विभाग; वुड डिस्पैच (1854); विधवा पुनर्विवाह की सिफ़ारिश
लॉर्ड कैनिंग1856–621857 का विद्रोह; कंपनी शासन का अंत; 1858 की महारानी की घोषणा (इलाहाबाद); 1857 में तीन विश्वविद्यालय; भारतीय दंड संहिता का क्रियान्वयन; अंतिम गवर्नर-जनरल एवं प्रथम वायसराय
लॉर्ड लिटन1876–80वर्नाक्युलर प्रेस एक्ट (1878); भारतीय शस्त्र अधिनियम (1878); दिल्ली दरबार (1877); अकाल आयोग (1878–80)
लॉर्ड रिपन1880–84वर्नाक्युलर प्रेस एक्ट का निरसन (1882); स्थानीय स्वशासन प्रस्ताव (1882); हंटर शिक्षा आयोग (1882); इल्बर्ट बिल विवाद; प्रथम फैक्ट्री अधिनियम (1881)
लॉर्ड कर्ज़न1899–1905भारतीय विश्वविद्यालय अधिनियम (1904); प्राचीन स्मारक संरक्षण अधिनियम (1904); पुलिस आयोग (1902); बंगाल विभाजन (1905)
स्वयं जाँच — इस खंड से 3 प्रश्न

प्र.1 सूची-I (संधि) को सूची-II (वर्ष) से सुमेलित कीजिए तथा सूचियों के नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
सूची-I: A. मंगलौर की संधि  B. श्रीरंगपट्टनम की संधि  C. सालबाई की संधि  D. बेसीन की संधि
सूची-II: 1. 1782  2. 1784  3. 1792  4. 1802
कूट:

AA-3, B-2, C-4, D-1BA-3, B-2, C-1, D-4CA-2, B-3, C-4, D-1DA-2, B-3, C-1, D-4
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (D)सालबाई की संधि 1782 में हुई, जिसने प्रथम आंग्ल-मराठा युद्ध समाप्त किया (C-1)। मंगलौर की संधि 1784 में द्वितीय आंग्ल-मैसूर युद्ध की समाप्ति पर टीपू सुल्तान तथा कंपनी के बीच हुई (A-2)। श्रीरंगपट्टनम की संधि 1792 में तृतीय आंग्ल-मैसूर युद्ध के बाद हुई (B-3)। बेसीन की संधि 1802 में पेशवा बाजीराव द्वितीय ने की, जिसने द्वितीय आंग्ल-मराठा युद्ध का मार्ग खोला (D-4)।

प्र.2 बाबर द्वारा भारत में लड़े गए निम्नलिखित युद्धों पर विचार कीजिए तथा इन्हें सही कालक्रमानुसार क्रम में व्यवस्थित कीजिए:
1. खानवा का युद्ध
2. घाघरा का युद्ध
3. पानीपत का प्रथम युद्ध
4. चंदेरी का युद्ध
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:

A1, 3, 4, 2B3, 1, 4, 2C3, 1, 2, 4D1, 3, 2, 4
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (B)बाबर ने 1526 ई. में पानीपत के प्रथम युद्ध में इब्राहीम लोदी को, 1527 ई. में खानवा में राणा सांगा को, 1528 ई. में चंदेरी में मेदिनी राय को तथा 1529 ई. में घाघरा के युद्ध में अफगानों को पराजित किया। अतः सही क्रम 3, 1, 4, 2 है।

प्र.3 निम्नलिखित में से कौन-सी रियासत लॉर्ड डलहौजी द्वारा 'व्यपगत के सिद्धांत' (Doctrine of Lapse) के अंतर्गत ब्रिटिश साम्राज्य में नहीं मिलाई गई थी?

AसताराBझाँसीCनागपुरDअवध
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (D)व्यपगत के सिद्धांत के अंतर्गत डलहौजी ने सतारा (1848), जैतपुर व संबलपुर (1849), उदयपुर (1852), झाँसी (1853) तथा नागपुर (1854) का विलय किया। अवध का विलय 1856 में हुआ, किन्तु उसका आधार व्यपगत नहीं, बल्कि 'कुशासन' (misgovernment) का आरोप था — यही 1857 के विद्रोह के प्रमुख कारणों में गिना जाता है।

4. भू-राजस्व व्यवस्थाएँ

कंपनी के लिए भू-राजस्व आय का सबसे बड़ा स्रोत था, अतः उसका सबसे बड़ा प्रशासनिक प्रश्न यही था — लगान किससे, कितना और कितने समय के लिए वसूला जाए? इन तीन प्रश्नों के तीन उत्तर ही तीन व्यवस्थाएँ बनीं।

बंगाल बिहार उड़ीसा बनारस उत्तरी सरकार मद्रास बंबई बारामहल असम कुर्ग आगरा अवध पंजाब मध्य भारत
स्थायी बंदोबस्त ≈19%रैयतवाड़ी ≈51%महालवाड़ी ≈30%
एक ही प्रश्न के तीन उत्तर — लगान किससे? नीला = ज़मींदार, लाल = सीधे रैयत, हरा = गाँव/महाल। ध्यान दें — बनारस एवं मद्रास के उत्तरी सरकार भी स्थायी बंदोबस्त में थे।

4.1 आरंभिक प्रयोग

4.2 स्थायी बंदोबस्त (Permanent Settlement), 1793

22 मार्च 1793 को लॉर्ड कॉर्नवालिस ने इसे लागू किया (राजस्व-आँकड़े सर जॉन शोर के थे, यद्यपि शोर स्वयं इतनी जल्दी स्थायित्व देने के पक्ष में नहीं था)।

प्रभाव: कंपनी को निश्चित एवं बिना जोखिम की आय मिली तथा एक राजभक्त भू-स्वामी वर्ग तैयार हुआ, जो 1857 में और उसके बाद भी अंग्रेजों के साथ खड़ा रहा। किंतु कीमत किसान ने चुकाई — उसे कोई कानूनी अधिकार नहीं मिला, अनुपस्थित ज़मींदारी (absentee landlordism) और उप-ज़मींदारी की लंबी शृंखला (पटनी प्रथा) विकसित हुई, जिसमें हर कड़ी किसान से कुछ न कुछ अधिक वसूलती थी। काश्तकार को कुछ संरक्षण बहुत बाद में बंगाल काश्तकारी अधिनियम, 1885 से मिला।

4.3 रैयतवाड़ी व्यवस्था (Ryotwari)

4.4 महालवाड़ी व्यवस्था (Mahalwari)

तुलनात्मक तालिका 10 : तीनों भू-राजस्व व्यवस्थाएँ
आधारस्थायी बंदोबस्तरैयतवाड़ीमहालवाड़ी
वर्ष एवं प्रवर्तक1793 · कॉर्नवालिस (जॉन शोर की रिपोर्ट)1820 · टॉमस मुनरो (एवं अलेक्ज़ेंडर रीड)1822 / 1833 · होल्ट मैकेंज़ी, फिर आर. एम. बर्ड
किससे बंदोबस्तज़मींदारव्यक्तिगत किसान (रैयत)ग्राम/महाल का सामूहिक निकाय
क्षेत्रबंगाल, बिहार, उड़ीसा, बनारस, उत्तरी सरकारमद्रास, बंबई, असम, कुर्गउत्तर-पश्चिम प्रांत, अवध, पंजाब, मध्य भारत
अनुमानित विस्तार≈ 19%≈ 51%≈ 30%
लगान की प्रकृतिसदा के लिए स्थिर20–30 वर्ष पर पुनर्निर्धारितनिश्चित अवधि (30 वर्ष) के लिए
राज्य का हिस्सा10/11शुद्ध उपज का लगभग आधाकिराया-मूल्य का 80% → 66% → 50%
विशिष्ट शब्दसूर्यास्त कानून, पटनीरैयत, पट्टामहाल, पट्टीदारी, भाईचारा
उत्तर प्रदेश संदर्भ — एक ही प्रदेश, दो व्यवस्थाएँ

उत्तर प्रदेश भू-राजस्व के दृष्टिकोण से बँटा हुआ प्रदेश था। बनारस प्रांत में जोनाथन डंकन के 1789 के दशसाला बंदोबस्त को 1795 में स्थायी कर दिया गया — अर्थात् पूर्वी उ.प्र. में बंगाल जैसा ज़मींदारी ढाँचा बना। इसके विपरीत उत्तर-पश्चिम प्रांत तथा अवध में महालवाड़ी लागू हुई, और अवध में तालुकेदारी का विशिष्ट रूप विकसित हुआ। 1856 के विलय के बाद अंग्रेजों ने अवध के तालुकेदारों की भूमि छीनने का प्रयास किया — यही तालुकेदार 1857 में विद्रोह की रीढ़ बने, और इसीलिए 1859 के बाद कैनिंग ने उन्हें भूमि लौटाकर 'सनद' दी और उन्हें अपना स्थायी सहयोगी वर्ग बना लिया।

सावधानी
स्वयं जाँच — इस खंड से 3 प्रश्न

प्र.1 'रैयतवाड़ी बंदोबस्त (Ryotwari Settlement)' के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
1. इसका प्रारंभिक प्रयोग 1792 में कैप्टन अलेक्जेंडर रीड ने मद्रास प्रेसीडेंसी के बारामहल क्षेत्र में किया था।
2. इस व्यवस्था में भू-राजस्व सीधे कृषक (रैयत) से वसूला जाता था तथा उसे भूमि का स्वामी माना जाता था।
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:

A1 और 2 दोनोंBन तो 1 और न ही 2Cकेवल 2Dकेवल 1
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (A)रैयतवाड़ी व्यवस्था का प्रारंभिक प्रयोग 1792 में कैप्टन अलेक्जेंडर रीड ने बारामहल में किया, जिसे बाद में थॉमस मुनरो ने मद्रास प्रेसीडेंसी में व्यापक रूप से लागू किया; अतः कथन 1 सही है। इस व्यवस्था में राज्य का सीधा संबंध रैयत से था, बीच में कोई जमींदार नहीं था और रैयत को भूमि का स्वामी (proprietor) माना गया; अतः कथन 2 भी सही है। यही इसे स्थायी बंदोबस्त से पृथक करता है। (UPPSC में बहु-पूछित अवधारणा)

प्र.2 सूची-I (भू-राजस्व/प्रशासनिक व्यवस्था) को सूची-II (संबद्ध व्यक्ति) से सुमेलित कीजिए तथा सूचियों के नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
सूची-I: A. स्थायी बंदोबस्त  B. रैयतवाड़ी व्यवस्था  C. महालवाड़ी व्यवस्था  D. सहायक संधि
सूची-II: 1. होल्ट मैकेंजी  2. लॉर्ड वेलेजली  3. लॉर्ड कॉर्नवालिस  4. थॉमस मुनरो
कूट:

AA-4, B-3, C-2, D-1BA-3, B-4, C-1, D-2CA-4, B-3, C-1, D-2DA-3, B-4, C-2, D-1
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (B)स्थायी बंदोबस्त 1793 में लॉर्ड कॉर्नवालिस ने लागू किया (A-3)। रैयतवाड़ी व्यवस्था कैप्टन अलेक्जेंडर रीड के प्रयोगों पर आधारित थी और मद्रास के गवर्नर के रूप में थॉमस मुनरो ने इसे व्यापक रूप से लागू किया (B-4)। महालवाड़ी व्यवस्था होल्ट मैकेंजी ने तैयार की, जिसे 1822 के विनियम VII द्वारा औपचारिक रूप मिला (C-1)। सहायक संधि (Subsidiary Alliance) की प्रणाली लॉर्ड वेलेजली से जुड़ी है (D-2)।

प्र.3 नीचे दो कथन दिए गए हैं, जिनमें से एक को अभिकथन (A) तथा दूसरे को कारण (R) कहा गया है।
अभिकथन (A): स्थायी बंदोबस्त, जिसे 'इस्तमरारी बंदोबस्त' भी कहा जाता है, लॉर्ड वेलेजली ने लागू किया था।
कारण (R): इस व्यवस्था में जमींदार को भूमि का स्वामी मान लिया गया था।
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:

A(A) और (R) दोनों सही हैं, किन्तु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं करता हैB(A) गलत है, किन्तु (R) सही हैC(A) सही है, किन्तु (R) गलत हैD(A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या करता है
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (B)स्थायी बंदोबस्त 1793 में लॉर्ड कॉर्नवालिस ने जॉन शोर की सहायता से लागू किया था, लॉर्ड वेलेजली ने नहीं — वेलेजली सहायक संधि प्रणाली से जुड़े हैं; अतः (A) गलत है। इस व्यवस्था में जमींदार को केवल राजस्व-संग्राहक न मानकर भूमि का स्वामी माना गया, बशर्ते वह नियत तिथि तक राजस्व जमा करे; अतः (R) सही है।

5. ब्रिटिश आर्थिक नीतियाँ

5.1 शोषण के तीन चरण

सुमेलन-तालिका 11 : औपनिवेशिक शोषण के चरण
चरणकालस्वरूपमुख्य साधन
वाणिज्यवादी (Mercantile)1757–1813एकाधिकार व्यापार एवं प्रत्यक्ष लूटबंगाल के राजस्व से माल खरीदकर इंग्लैंड भेजना ('बंगाल का निवेश'); दस्तक; कंपनी का एकाधिकार
औद्योगिक पूँजी / मुक्त व्यापार1813–1858भारत = कच्चे माल का स्रोत + तैयार माल का बाज़ार1813 का चार्टर एक्ट; ब्रिटिश माल पर नाममात्र शुल्क, भारतीय माल पर इंग्लैंड में भारी शुल्क
वित्तीय पूँजी (Finance capital)1858 के बादब्रिटिश पूँजी का भारत में निवेशरेलवे में गारंटी प्रणाली, बागान (चाय, नील), खनन, बैंकिंग, प्रबंध एजेंसी (managing agency) प्रणाली

5.2 विऔद्योगीकरण (De-industrialisation)

18वीं शताब्दी तक भारत विश्व का सबसे बड़ा वस्त्र-निर्यातक था। 19वीं शताब्दी के मध्य तक वही भारत ब्रिटिश वस्त्रों का सबसे बड़ा आयातक बन गया। कारण —

परिणाम था अर्थव्यवस्था का ग्रामीणीकरण — दस्तकारी छोड़कर लोग खेती पर लौटे, जिससे भूमि पर जनसंख्या का दबाव और बढ़ा। गवर्नर-जनरल विलियम बेंटिंक की 1834–35 की प्रसिद्ध टिप्पणी उद्धृत होती है कि "सूती बुनकरों की हड्डियाँ भारत के मैदानों को सफेद कर रही हैं।"

5.3 धन-निष्कासन सिद्धांत (Drain of Wealth)

दादाभाई नौरोजी ने 1867 में 'इंग्लैंड्स डेट टु इंडिया' शीर्षक पत्र में यह विचार रखा और 1901 में प्रकाशित अपनी पुस्तक 'पॉवर्टी एंड अन-ब्रिटिश रूल इन इंडिया' में उसे पूर्ण रूप दिया। उन्हें 'भारत का वयोवृद्ध पुरुष' (Grand Old Man of India) कहा जाता है। रमेश चंद्र दत्त ने 'द इकॉनॉमिक हिस्ट्री ऑफ इंडिया' (दो खंड, 1901 एवं 1903) में इसे ऐतिहासिक आँकड़ों से पुष्ट किया। महादेव गोविंद रानाडे, जी. वी. जोशी, जी. सुब्रह्मण्यम अय्यर तथा पृथ्वीशचंद्र रे भी इस 'आर्थिक राष्ट्रवाद' की धारा के प्रमुख नाम हैं।

निष्कासन के घटक: गृह-व्यय (Home Charges) — अर्थात् लंदन में भारत कार्यालय का खर्च, ब्रिटिश अधिकारियों के वेतन-पेंशन, भारत के सार्वजनिक ऋण पर ब्याज, रेलवे को दी गई गारंटीशुदा 5% आय, ब्रिटिश कंपनियों के लाभ की वापसी, तथा भारत के बाहर लड़े गए ब्रिटिश युद्धों का सैन्य व्यय। इस प्रकार भारत का एक बड़ा अधिशेष हर वर्ष बिना किसी प्रत्यावर्तन के इंग्लैंड चला जाता था — यही पूँजी-निर्माण के अभाव और स्थायी दरिद्रता का कारण बना।

5.4 रेल तथा आधुनिक उद्योग

उत्तर प्रदेश संदर्भ — रेल और कानपुर

5.5 अकाल एवं अकाल आयोग

19वीं शताब्दी में अकाल की आवृत्ति और तीव्रता दोनों बढ़ीं। कारण केवल वर्षा की कमी नहीं थी — नकद लगान की बाध्यता, खाद्यान्न का निर्यात, रेल द्वारा अनाज का अकाल-क्षेत्र से बाहर चला जाना, तथा सरकार की 'अहस्तक्षेप' (laissez faire) विचारधारा भी उतनी ही ज़िम्मेदार थी।

सुमेलन-तालिका 12 : अकाल ↔ आयोग ↔ अध्यक्ष
अकालआयोग / वर्षअध्यक्षप्रमुख परिणाम
बंगाल का महा-अकाल, 1770कोई आयोग नहींलगभग एक-तिहाई जनसंख्या का नाश; द्वैध शासन की विफलता उजागर
उड़ीसा का अकाल, 1866कैंपबेल आयोग (1866)सर जॉर्ज कैंपबेलप्रशासनिक विफलता की पहली स्वीकृति
महान अकाल, 1876–78 (दक्षिण एवं पश्चिम भारत)स्ट्रेची आयोग (1880)सर रिचर्ड स्ट्रेचीप्रथम अकाल संहिता (Famine Code), 1883; 'अभाव' एवं 'अकाल' की परिभाषा तथा राहत-कार्य का ढाँचा
अकाल, 1896–97लायल आयोग (1897)सर जेम्स लायलअकाल संहिता में लचीलापन
अकाल, 1899–1900मैकडॉनेल आयोग (1901)सर एंटनी मैकडॉनेलकर्ज़न के काल में; सिंचाई एवं कृषि-ऋण पर बल; प्रत्येक प्रांत में अकाल-आयुक्त

5.6 मुद्रा एवं शुल्क (Tariff) नीति

सुमेलन-तालिका 13 : मुद्रा एवं शुल्क नीति का कालक्रम
वर्षउपायआशय
1835भारतीय सिक्का अधिनियमसम्पूर्ण ब्रिटिश भारत के लिए एकसमान चाँदी का रुपया
1859कैनिंग का शुल्कविद्रोह के बाद राजस्व-संकट में आयात पर लगभग 10% शुल्क — राजस्व के लिए, संरक्षण के लिए नहीं
1882आयात शुल्क समाप्तमैनचेस्टर के दबाव में लगभग सभी आयात शुल्क हटाए गए — पूर्ण मुक्त व्यापार
1893टकसालें बंदचाँदी की मुक्त ढलाई पर रोक — चाँदी के गिरते मूल्य से बचाव
1898–99फाउलर समिति → स्वर्ण-विनिमय मानकरुपये को 1 शिलिंग 4 पेंस पर स्थिर किया गया
1894–96कपास पर आयात शुल्क तथा प्रतिकारी उत्पाद शुल्क (countervailing excise)भारतीय मिलों के कपड़े पर वही शुल्क लगाकर ब्रिटिश माल को लाभ में रखा गया — भारतीय उद्योग की सबसे बड़ी शिकायत
1917राजस्व-शुल्क 7.5%प्रथम विश्वयुद्ध के व्यय के लिए
1921–23राजकोषीय आयोग (1921) → विभेदकारी संरक्षण (Discriminating Protection), 1923चुने हुए उद्योगों को ही संरक्षण; टैरिफ बोर्ड की स्थापना
1926कपास का उत्पाद शुल्क समाप्ततीन दशक के भारतीय विरोध का परिणाम
1926 → 1935हिल्टन-यंग आयोग (1926) → भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934RBI ने 1 अप्रैल 1935 से कार्य आरंभ किया
परीक्षा-दृष्टि

इस खंड से प्रश्न प्रायः दो रूपों में आते हैं — (क) अकाल ↔ आयोग का सुमेलन (कैंपबेल–1866, स्ट्रेची–1880, लायल–1897, मैकडॉनेल–1901); (ख) अभिकथन–कारण: "भारत में रेल का विस्तार भारतीय उद्योग के विकास का कारण नहीं बना" (अभिकथन सत्य) "क्योंकि रेल-मार्ग कच्चा माल बंदरगाहों तक ले जाने के लिए बनाए गए थे" (कारण सत्य एवं सही व्याख्या)। 'गारंटी प्रणाली' तथा 'गृह-व्यय' पारिभाषिक शब्दों के रूप में भी पूछे जाते हैं।

स्वयं जाँच — इस खंड से 3 प्रश्न

प्र.1 ब्रिटिशकालीन भारत के निम्नलिखित अकाल आयोगों पर विचार कीजिए तथा इन्हें सही कालक्रमानुसार क्रम में व्यवस्थित कीजिए:
1. स्ट्रेची आयोग
2. कैंपबेल आयोग
3. मैकडॉनेल आयोग
4. लॉयल आयोग
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:

A1, 2, 4, 3B2, 1, 3, 4C2, 1, 4, 3D1, 2, 3, 4
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (C)1866 के उड़ीसा अकाल के पश्चात कैंपबेल आयोग (1866) गठित हुआ। 1876-78 के महाअकाल के बाद स्ट्रेची आयोग (1880) बना, जिसकी संस्तुतियों पर 1883 की अकाल संहिता (Famine Code) आधारित थी। 1896-97 के अकाल के बाद लॉर्ड एल्गिन द्वितीय ने सर जेम्स लॉयल की अध्यक्षता में आयोग (1897) बनाया तथा 1899-1900 के अकाल के बाद लॉर्ड कर्जन ने मैकडॉनेल आयोग (1901) नियुक्त किया। अतः सही क्रम 2, 1, 4, 3 है।

प्र.2 भारतीय मुद्रा एवं वित्त से संबंधित निम्नलिखित समितियों/आयोगों पर विचार कीजिए तथा इन्हें उनकी नियुक्ति के सही कालक्रमानुसार क्रम में व्यवस्थित कीजिए:
1. फाउलर समिति
2. हिल्टन यंग आयोग
3. हर्शेल समिति
4. चैंबरलेन आयोग
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:

A1, 3, 4, 2B3, 1, 4, 2C1, 3, 2, 4D3, 1, 2, 4
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (B)हर्शेल समिति (1892) भारतीय मुद्रा-प्रश्न पर विचार करने वाली पहली समिति थी, जिसकी संस्तुति पर 1893 में टकसालें मुक्त चाँदी-ढलाई के लिए बंद की गईं। फाउलर समिति (1898) ने स्वर्णमान (Gold Standard) अपनाने तथा 15 रुपये = 1 पाउंड स्टर्लिंग की दर की संस्तुति दी। चैंबरलेन आयोग (1913-14), जिसके सदस्य जे.एम. कीन्स भी थे, इसके बाद आया और हिल्टन यंग आयोग (1926) ने भारत के लिए एक केंद्रीय बैंक की सिफारिश की, जिसकी परिणति 1935 में भारतीय रिजर्व बैंक की स्थापना में हुई।

प्र.3 निम्नलिखित में से कौन-सा/से युग्म सही सुमेलित नहीं है/हैं?
   (आयोग/समिति)    (संबद्ध विषय)
1. पील आयोग (1859) — सेना का पुनर्गठन
2. फ्रेजर आयोग (1902-03) — पुलिस व्यवस्था
3. स्कीन समिति (1925) — भारतीय मुद्रा एवं वित्त
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:

A1 और 2Bकेवल 3C2 और 3Dकेवल 1
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (B)1857 के विद्रोह के बाद पील आयोग (1859) ने सेना के पुनर्गठन की संस्तुति दी, जिसमें तोपखाना पूर्णतः यूरोपीय हाथों में रखने का सुझाव भी था; युग्म 1 सही है। सर एंड्रयू फ्रेजर की अध्यक्षता वाले भारतीय पुलिस आयोग (1902-03) की संस्तुति पर प्रांतों में सी.आई.डी. गठित हुई; युग्म 2 सही है। स्कीन समिति अर्थात् भारतीय सैंडहर्स्ट समिति (1925) का विषय सेना के अधिकारी-वर्ग का भारतीयकरण था, मुद्रा नहीं; अतः युग्म 3 सुमेलित नहीं है।

6. प्रशासनिक, न्यायिक, सैन्य एवं पुलिस ढाँचे का विकास

6.1 सिविल सेवा (Civil Service)

कॉर्नवालिस को 'भारत में सिविल सेवा का जनक' कहा जाता है। उसने कर्मचारियों का वेतन बढ़ाया, निजी व्यापार पर रोक लगाई, पदोन्नति वरिष्ठता के आधार पर तय की — पर साथ ही यह नियम भी बनाया कि 500 पौंड वार्षिक से ऊपर के सभी पद केवल यूरोपीयों के लिए होंगे। सेवा दो भागों में बँटी — अनुबंधित (Covenanted) तथा अननुबंधित (Uncovenanted)। प्रशिक्षण के लिए वेलेज़ली ने फोर्ट विलियम कॉलेज (1800) खोला; डाइरेक्टरों ने उसे अस्वीकार कर 1806 में इंग्लैंड में हेलीबरी कॉलेज स्थापित किया।

सुमेलन-तालिका 14 : सिविल सेवा — आयोग एवं मील-पत्थर
वर्षघटना / आयोगमुख्य बात
1833चार्टर एक्टखुली प्रतियोगिता का प्रथम प्रस्ताव — डाइरेक्टरों के विरोध से रद्द
1853चार्टर एक्टखुली प्रतियोगिता स्वीकृत; मैकाले समिति (1854) ने पाठ्यक्रम तय किया; प्रथम परीक्षा 1855 में लंदन में
1863सत्येंद्रनाथ टैगोरICS में चयनित होने वाले प्रथम भारतीय
1886एचिसन आयोग (डफ़रिन के काल में)सेवाओं का त्रिस्तरीय वर्गीकरण — इंपीरियल, प्रांतीय, अधीनस्थ; आयु-सीमा बढ़ाकर 23
1893ब्रिटिश हाउस ऑफ कॉमन्स का प्रस्तावभारत एवं इंग्लैंड में एक साथ परीक्षा की माँग स्वीकृत, पर लागू नहीं हुई
1912इस्लिंगटन आयोगउच्च पदों के 25% भारतीयों को देने की सिफ़ारिश
1923–24ली आयोग15 वर्षों में ICS में 50:50 भारतीय-यूरोपीय अनुपात; लोक सेवा आयोग की स्थापना की सिफ़ारिश
1926केंद्रीय लोक सेवा आयोग1 अक्टूबर 1926 को स्थापित (1935 के अधिनियम से 'संघ लोक सेवा आयोग')

6.2 न्यायपालिका

उत्तर प्रदेश संदर्भ — इलाहाबाद उच्च न्यायालय

1861 के अधिनियम के अंतर्गत 17 मार्च 1866 को 'उत्तर-पश्चिम प्रांत का उच्च न्यायालय' आगरा में स्थापित हुआ, जिसने पुरानी सदर दीवानी अदालत का स्थान लिया। 1869 में इसका मुख्यालय इलाहाबाद स्थानांतरित हुआ और नाम पड़ा 'इलाहाबाद उच्च न्यायालय'। यह तीन प्रेसीडेंसी नगरों के बाहर स्थापित आरंभिक उच्च न्यायालयों में है — UPPSC में यह तथ्य (स्थापना 1866, आगरा में; स्थानांतरण 1869) बार-बार पूछा जाता है। 1948 में अवध मुख्य न्यायालय (लखनऊ) का इसमें विलय होकर लखनऊ पीठ बनी।

6.3 सेना

6.4 पुलिस

6.5 प्रशासनिक विकेंद्रीकरण एवं स्थानीय स्वशासन

सावधानी
स्वयं जाँच — इस खंड से 3 प्रश्न

प्र.1 ब्रिटिशकालीन सेना तथा पुलिस के पुनर्गठन से जुड़ी निम्नलिखित घटनाओं पर विचार कीजिए तथा इन्हें सही कालक्रमानुसार क्रम में व्यवस्थित कीजिए:
1. भारतीय पुलिस अधिनियम का पारित होना
2. पील आयोग की नियुक्ति
3. फ्रेजर पुलिस आयोग का गठन
4. भारतीय सैंडहर्स्ट (स्कीन) समिति की नियुक्ति
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:

A1, 2, 3, 4B2, 1, 4, 3C1, 2, 4, 3D2, 1, 3, 4
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (D)1857 के विद्रोह के बाद सेना के पुनर्गठन हेतु पील आयोग 1859 में नियुक्त हुआ। 1860 के पुलिस आयोग की संस्तुतियों पर भारतीय पुलिस अधिनियम 1861 में पारित हुआ, जिसने प्रांत में महानिरीक्षक तथा जिले में पुलिस अधीक्षक की व्यवस्था दी। सर एंड्रयू फ्रेजर की अध्यक्षता में भारतीय पुलिस आयोग 1902-03 में बना, जिसकी संस्तुति पर सी.आई.डी. गठित हुई, तथा सेना के भारतीयकरण हेतु स्कीन समिति 1925 में नियुक्त हुई। अतः सही क्रम 2, 1, 3, 4 है।

प्र.2 नीचे दो कथन दिए गए हैं, जिनमें से एक को अभिकथन (A) तथा दूसरे को कारण (R) कहा गया है।
अभिकथन (A): भारत में प्रथम लोक सेवा आयोग (Public Service Commission) की स्थापना 1926 में हुई।
कारण (R): ली आयोग (Lee Commission) ने अपनी रिपोर्ट में एक लोक सेवा आयोग शीघ्र गठित करने की संस्तुति की थी।
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:

A(A) और (R) दोनों सही हैं, किन्तु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं करता हैB(A) गलत है, किन्तु (R) सही हैC(A) सही है, किन्तु (R) गलत हैD(A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या करता है
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (D)भारत शासन अधिनियम, 1919 में लोक सेवा आयोग का प्रावधान था, किंतु उस पर कार्रवाई ली आयोग की रिपोर्ट (1924) के बाद हुई और 1 अक्टूबर 1926 को सर रॉस बार्कर की अध्यक्षता में प्रथम लोक सेवा आयोग गठित हुआ। ली आयोग ने अधीक्षी सेवाओं में भर्ती के लिए 40 प्रतिशत यूरोपीय, 40 प्रतिशत सीधे भर्ती भारतीय तथा 20 प्रतिशत प्रांतीय सेवा से पदोन्नत भारतीयों का अनुपात भी सुझाया था। अतः (A) और (R) दोनों सही हैं तथा (R), (A) की सही व्याख्या करता है।

प्र.3 निम्नलिखित में से कौन-सा/से युग्म सही सुमेलित है/हैं?
   (आयोग)    (प्रमुख संस्तुति)
1. हिल्टन यंग आयोग — भारत में एक केंद्रीय बैंक की स्थापना
2. स्ट्रेची आयोग — अकाल संहिता (Famine Code) का आधार
3. ली आयोग — सेना का भारतीयकरण
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:

A1 और 2Bकेवल 3C2 और 3Dकेवल 1
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (A)हिल्टन यंग आयोग (1926) ने भारत के लिए एक केंद्रीय बैंक की संस्तुति दी, जिसकी परिणति 1935 में भारतीय रिजर्व बैंक की स्थापना में हुई; युग्म 1 सही है। स्ट्रेची आयोग (1880) की संस्तुतियों पर 1883 की अकाल संहिता तैयार हुई; युग्म 2 सही है। ली आयोग अधीक्षी लोक सेवाओं (Superior Civil Services) पर था, जिसने आई.सी.एस. में भर्ती के लिए 40:40:20 के अनुपात तथा लोक सेवा आयोग के गठन की संस्तुति दी — सेना के भारतीयकरण की नहीं; अतः युग्म 3 सही सुमेलित नहीं है।

7. संवैधानिक विकास — 1773 से 1947 तक

इस खंड को दो भागों में देखें — कंपनी शासन के अधिनियम (1773–1853) तथा ताज के शासन के अधिनियम (1858–1947)। पहले भाग का उद्देश्य कंपनी पर ब्रिटिश संसद का नियंत्रण बढ़ाना था; दूसरे का उद्देश्य भारतीयों को सीमित प्रतिनिधित्व देकर असंतोष को संभालना।

7.1 कंपनी शासन के अधिनियम

सुमेलन-तालिका 15 : अधिनियम ↔ वर्ष ↔ प्रमुख प्रावधान (कंपनी काल)
अधिनियमवर्षप्रमुख प्रावधान
रेगुलेटिंग एक्ट1773 कंपनी के कार्यों को नियंत्रित करने का ब्रिटिश संसद का प्रथम प्रयास। बंगाल के गवर्नर को 'बंगाल का गवर्नर-जनरल' बनाया गया (प्रथम — वारेन हेस्टिंग्स) और उसकी 4 सदस्यीय कार्यकारी परिषद बनी। बंबई एवं मद्रास प्रेसीडेंसी बंगाल के अधीन। कलकत्ता में सर्वोच्च न्यायालय (1774) की व्यवस्था। कर्मचारियों के निजी व्यापार एवं उपहार लेने पर रोक। कोर्ट ऑफ डाइरेक्टर्स को ब्रिटिश सरकार को राजस्व, नागरिक एवं सैन्य विवरण भेजना अनिवार्य।
संशोधक अधिनियम / एक्ट ऑफ सेटलमेंट1781 1773 के दोषों का निवारण। गवर्नर-जनरल एवं परिषद को उनके सरकारी कार्यों के लिए सर्वोच्च न्यायालय की अधिकारिता से मुक्त किया गया; राजस्व-संबंधी मामले भी बाहर किए गए। न्यायालय को निर्देश कि हिंदुओं पर हिंदू विधि तथा मुसलमानों पर मुस्लिम विधि लागू हो। प्रांतीय न्यायालयों से अपील गवर्नर-जनरल-इन-काउंसिल में।
पिट्स इंडिया एक्ट1784 कंपनी के वाणिज्यिक एवं राजनीतिक कार्यों को अलग किया। व्यापार कोर्ट ऑफ डाइरेक्टर्स के पास, राजनीतिक मामले नए बोर्ड ऑफ कंट्रोल के पास — यही "द्वैध शासन" (dual government of the Company and the Crown) कहलाया। गवर्नर-जनरल की परिषद 3 सदस्यों की। पहली बार कंपनी के क्षेत्रों को 'भारत में ब्रिटिश अधिकृत क्षेत्र' कहा गया।
चार्टर एक्ट1793 कंपनी का व्यापारिक एकाधिकार 20 वर्ष और बढ़ाया गया। गवर्नर-जनरल को परिषद के निर्णय रद्द करने (override) का अधिकार। बोर्ड ऑफ कंट्रोल के सदस्यों का वेतन भारतीय राजस्व से। नियम/विनियम (Regulations) प्रकाशित करने की व्यवस्था — 'विनियम-विधि' की नींव।
चार्टर एक्ट1813 कंपनी का व्यापारिक एकाधिकार समाप्त — केवल चाय तथा चीन के साथ व्यापार में बना रहा। ईसाई मिशनरियों को भारत आने की अनुमति। शिक्षा हेतु ₹1 लाख वार्षिक का प्रावधान (जो 20 वर्ष तक विवाद में फँसा रहा)। कंपनी के क्षेत्रों पर ब्रिटिश ताज की प्रभुसत्ता स्पष्ट रूप से घोषित।
चार्टर एक्ट1833 बंगाल के गवर्नर-जनरल को 'भारत का गवर्नर-जनरल' बनाया गया (प्रथम — लॉर्ड विलियम बेंटिंक)। बंबई एवं मद्रास की विधायी शक्तियाँ छीनकर विधायी केंद्रीकरण। कंपनी विशुद्ध रूप से प्रशासनिक निकाय बनी, व्यापार समाप्त। परिषद में विधि सदस्य जोड़ा गया (मैकाले, 1834) तथा विधि आयोग बना। धारा 87 — धर्म, जन्म, वंश या रंग के आधार पर किसी भारतीय को पद से वंचित न करने का प्रावधान (व्यवहार में निष्प्रभावी)। दास प्रथा के उन्मूलन का मार्ग भी इसी से खुला।
चार्टर एक्ट1853 पहली बार गवर्नर-जनरल की परिषद के विधायी एवं कार्यकारी कार्यों का पृथक्करण — 6 नए विधायी सदस्यों के साथ एक लघु-संसद जैसी भारतीय (केंद्रीय) विधान परिषद बनी। सिविल सेवा के लिए खुली प्रतियोगिता। कंपनी का शासन बिना अवधि निर्धारित किए बढ़ाया गया — अर्थात् संसद जब चाहे समाप्त कर सकती थी। स्थानीय प्रतिनिधित्व की शुरुआत — 6 में से 4 विधायी सदस्य मद्रास, बंबई, बंगाल तथा आगरा की स्थानीय सरकारों द्वारा।

7.2 ताज के शासन के अधिनियम

सुमेलन-तालिका 16 : अधिनियम ↔ वर्ष ↔ प्रमुख प्रावधान (ताज का शासन)
अधिनियमवर्षप्रमुख प्रावधान
भारत शासन अधिनियम
(Act for the Good Government of India)
1858 1857 के विद्रोह की सीधी प्रतिक्रिया। शासन कंपनी से ब्रिटिश ताज को हस्तांतरित। भारत सचिव (Secretary of State for India) का पद — ब्रिटिश मंत्रिमंडल का सदस्य, जिसकी सहायता के लिए 15 सदस्यीय भारत परिषद। गवर्नर-जनरल को वायसराय कहा गया (प्रथम — लॉर्ड कैनिंग)। बोर्ड ऑफ कंट्रोल तथा कोर्ट ऑफ डाइरेक्टर्स समाप्त — द्वैध शासन का अंत। भारतीयों को प्रतिनिधित्व नहीं मिला; यह मुख्यतः प्रशासनिक पुनर्गठन था।
भारतीय परिषद अधिनियम1861 विधि-निर्माण में भारतीयों के मनोनयन की शुरुआत — कैनिंग ने 1862 में बनारस के राजा, पटियाला के महाराजा तथा सर दिनकर राव को मनोनीत किया। विकेंद्रीकरण — बंबई एवं मद्रास को विधायी शक्ति वापस; बंगाल (1862), उत्तर-पश्चिम सीमा प्रांत (1866) तथा पंजाब (1897) के लिए नई परिषदें। वायसराय को अध्यादेश (6 माह) जारी करने का अधिकार। 1859 में कैनिंग द्वारा आरंभ की गई विभाग/पोर्टफोलियो प्रणाली को मान्यता।
भारतीय परिषद अधिनियम1892 अतिरिक्त (गैर-सरकारी) सदस्यों की संख्या में वृद्धि, पर सरकारी बहुमत बना रहा। सदस्यों को बजट पर चर्चा तथा कार्यपालिका से प्रश्न पूछने का अधिकार मिला — किंतु न मतदान का अधिकार, न पूरक प्रश्न का। निर्वाचन का सिद्धांत सीमित एवं अप्रत्यक्ष रूप में आया — विश्वविद्यालय, नगरपालिका, ज़िला बोर्ड, ज़मींदार एवं वाणिज्य मंडल नाम संस्तुत करते थे, नियुक्ति मनोनयन से होती थी; अधिनियम में 'निर्वाचन' शब्द का प्रयोग नहीं था।
भारतीय परिषद अधिनियम
(मॉर्ले–मिंटो सुधार)
1909 केंद्रीय विधान परिषद की सदस्य-संख्या 16 से बढ़ाकर 60। केंद्र में सरकारी बहुमत बना रहा, पर प्रांतीय परिषदों में गैर-सरकारी बहुमत की अनुमति। सदस्यों को बजट पर संकल्प रखने तथा पूरक प्रश्न पूछने का अधिकार। सबसे विवादास्पद प्रावधान — मुसलमानों के लिए पृथक निर्वाचक मंडल (इसीलिए लॉर्ड मिंटो को 'सांप्रदायिक निर्वाचन पद्धति का जनक' कहा जाता है)। पहली बार भारतीयों को कार्यकारी परिषदों से जोड़ा गया — सत्येंद्र प्रसन्न सिन्हा वायसराय की कार्यकारी परिषद के विधि सदस्य बने।
भारत शासन अधिनियम
(मांटेग्यू–चेम्सफोर्ड सुधार)
1919 20 अगस्त 1917 की घोषणा (उत्तरदायी शासन की क्रमिक स्थापना) की परिणति। प्रांतीय विषयों को हस्तांतरित एवं आरक्षित में बाँटकर प्रांतों में द्वैध शासन (dyarchy)। केंद्रीय एवं प्रांतीय विषयों की सूचियाँ अलग। केंद्र में द्विसदनीय विधानमंडल — राज्य परिषद एवं विधान सभा; प्रत्यक्ष निर्वाचन की शुरुआत। पृथक निर्वाचक मंडल सिख, भारतीय ईसाई, आंग्ल-भारतीय एवं यूरोपीय तक विस्तारित। लोक सेवा आयोग के गठन तथा लंदन में भारत के उच्चायुक्त के पद का प्रावधान। दस वर्ष बाद समीक्षा हेतु आयोग का प्रावधान — जिससे 1927 में साइमन आयोग बना।
भारत शासन अधिनियम1935 प्रांतों एवं देशी रियासतों को मिलाकर अखिल भारतीय संघ (All-India Federation) का प्रस्ताव — रियासतों के सम्मिलित न होने से कभी लागू नहीं हुआ। शक्तियों का तीन सूचियों में विभाजन — संघीय (59), प्रांतीय (54), समवर्ती (36); अवशिष्ट शक्ति वायसराय के पास। प्रांतों में द्वैध शासन समाप्त कर प्रांतीय स्वायत्तता (1937 से लागू); केंद्र में द्वैध शासन का प्रावधान, जो लागू नहीं हुआ। 11 में से 6 प्रांतों में द्विसदनीय विधानमंडल। पृथक निर्वाचन दलित वर्गों, महिलाओं एवं श्रमिकों तक विस्तारित। भारत परिषद समाप्त। संघीय न्यायालय (1937) तथा भारतीय रिज़र्व बैंक (1935) की स्थापना। बर्मा भारत से अलग (1937); सिंध एवं उड़ीसा नए प्रांत (1936)।
भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम1947 माउंटबेटन योजना (3 जून 1947) पर आधारित। 15 अगस्त 1947 से ब्रिटिश शासन समाप्त; भारत एवं पाकिस्तान — दो स्वतंत्र अधिराज्य (Dominions), जिन्हें राष्ट्रमंडल से अलग होने का अधिकार भी था। भारत सचिव का पद समाप्त। गवर्नर-जनरल तथा प्रांतीय गवर्नर संवैधानिक प्रमुख बने। संविधान सभाएँ अपने-अपने अधिराज्य की विधानमंडल भी बनीं और उन्हें ब्रिटिश संसद के किसी भी कानून (सहित इसी अधिनियम) को निरस्त करने का अधिकार मिला। देशी रियासतें भारत या पाकिस्तान में सम्मिलित होने या स्वतंत्र रहने को मुक्त। नया संविधान बनने तक 1935 का अधिनियम अंतरिम संविधान के रूप में लागू रहा।
उत्तर प्रदेश संदर्भ
सावधानी — अंकों का जाल
स्वयं जाँच — इस खंड से 3 प्रश्न

प्र.1 'भारतीय परिषद अधिनियम, 1909' के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
1. इस अधिनियम ने केंद्रीय विधान परिषद में निर्वाचित सदस्यों का बहुमत स्थापित कर दिया।
2. इस अधिनियम ने प्रांतों में उत्तरदायी शासन (responsible government) की स्थापना की।
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:

Aकेवल 2Bन तो 1 और न ही 2C1 और 2 दोनोंDकेवल 1
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (B)1909 के अधिनियम (मॉर्ले-मिंटो सुधार) ने केंद्रीय विधान परिषद में सरकारी (official) बहुमत बनाए रखा; केवल प्रांतीय परिषदों में गैर-सरकारी बहुमत की अनुमति दी गई। अतः कथन 1 गलत है। उत्तरदायी शासन की दिशा में पहला औपचारिक कदम 1919 का अधिनियम था, 1909 का नहीं; अतः कथन 2 भी गलत है। इस अधिनियम की वास्तविक देन मुसलमानों के लिए पृथक निर्वाचक मंडल थी।

प्र.2 भारत शासन अधिनियम, 1935 के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इसने केंद्र में द्वैध शासन (dyarchy) की व्यवस्था की।
2. इसने भारतीय रिजर्व बैंक की स्थापना का प्रावधान किया।
3. इसने प्रांतीय विषयों को 'हस्तांतरित' तथा 'आरक्षित' श्रेणियों में विभाजित किया।
4. इसने प्रांतों में द्वैध शासन समाप्त कर प्रांतीय स्वायत्तता प्रदान की।
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:

Aकेवल 1 और 2Bकेवल 2, 3 और 4Cकेवल 1, 2 और 4Dकेवल 1
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (C)1935 के अधिनियम ने प्रांतों से द्वैध शासन हटाकर प्रांतीय स्वायत्तता दी और द्वैध शासन को केंद्र में लागू किया; अतः कथन 1 तथा 4 सही हैं। इसमें मुद्रा एवं साख के नियंत्रण हेतु भारतीय रिजर्व बैंक की स्थापना का प्रावधान भी था; कथन 2 सही है। प्रांतीय विषयों का 'हस्तांतरित' और 'आरक्षित' में विभाजन 1919 के अधिनियम की विशेषता थी, 1935 की नहीं; अतः कथन 3 गलत है।

प्र.3 भारत शासन अधिनियम, 1919 के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इसने भारत में प्रथम बार मुसलमानों के लिए पृथक निर्वाचक मंडल की व्यवस्था की।
2. इसने केंद्र में द्विसदनीय विधानमंडल की स्थापना की।
3. इसने सिखों, आंग्ल-भारतीयों, भारतीय ईसाइयों तथा यूरोपीयों तक पृथक प्रतिनिधित्व का विस्तार किया।
उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:

A1 और 2Bकेवल 3C2 और 3Dकेवल 1
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (C)मुसलमानों के लिए पृथक निर्वाचक मंडल की व्यवस्था भारतीय परिषद अधिनियम, 1909 (मॉर्ले-मिंटो सुधार) ने की थी, 1919 के अधिनियम ने नहीं; अतः कथन 1 गलत है। 1919 के अधिनियम ने केंद्र में राज्य परिषद (Council of State) तथा विधान सभा (Legislative Assembly) वाला द्विसदनीय विधानमंडल स्थापित किया; अतः कथन 2 सही है। इसी अधिनियम ने पृथक प्रतिनिधित्व का विस्तार सिखों, आंग्ल-भारतीयों, भारतीय ईसाइयों तथा यूरोपीयों तक किया; अतः कथन 3 भी सही है।

8. सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलन

19वीं शताब्दी के इन आंदोलनों को 'भारतीय पुनर्जागरण' कहा जाता है। इनके पीछे तीन शक्तियाँ थीं — पाश्चात्य शिक्षा एवं तर्कवाद, ईसाई मिशनरियों की आलोचना जिसने भारतीयों को आत्मनिरीक्षण पर विवश किया, और प्राच्यवादी (Orientalist) विद्वानों द्वारा प्राचीन भारतीय ग्रंथों की पुनर्खोज, जिसने आत्मगौरव लौटाया। मोटे तौर पर इन्हें दो प्रवृत्तियों में बाँटा जाता है — सुधारवादी (ब्रह्म समाज, प्रार्थना समाज, अलीगढ़ आंदोलन), जो आधुनिक तर्क को स्वीकार करते थे, और पुनरुत्थानवादी (आर्य समाज, देवबंद), जो समाधान अतीत की शुद्ध परंपरा में खोजते थे।

8.1 ब्रह्म समाज एवं बंगाल

8.2 प्रार्थना समाज एवं महाराष्ट्र

8.3 आर्य समाज

8.4 रामकृष्ण मिशन

रामकृष्ण परमहंस (1836–1886) दक्षिणेश्वर (कलकत्ता) के काली-भक्त संत थे, जिनका मूल संदेश था — सभी धर्म एक ही लक्ष्य के भिन्न मार्ग हैं तथा जीव-सेवा ही शिव-सेवा है। उनके शिष्य स्वामी विवेकानंद (नरेंद्रनाथ दत्त, 1863–1902) ने सितंबर 1893 में शिकागो की विश्व धर्म संसद में भारतीय वेदांत का परिचय विश्व से कराया और लौटकर 1897 में रामकृष्ण मिशन की स्थापना की; बेलूर मठ इसका मुख्यालय बना। मिशन ने धार्मिक प्रचार से अधिक शिक्षा, चिकित्सा एवं आपदा-राहत को अपना कार्यक्षेत्र बनाया — यह भारतीय संन्यास-परंपरा में एक नया मोड़ था। पत्रिकाएँ — प्रबुद्ध भारत एवं उद्बोधन

8.5 थियोसोफिकल सोसाइटी

स्थापना 1875, न्यूयॉर्क में मैडम एच. पी. ब्लावात्स्की तथा कर्नल एच. एस. ऑल्कॉट द्वारा। 1882 में इसका अंतर्राष्ट्रीय मुख्यालय अड्यार (मद्रास) स्थानांतरित हुआ। एनी बेसेंट 1893 में भारत आईं और 1907 में सोसाइटी की अध्यक्ष बनीं। सोसाइटी ने हिंदू दर्शन, पुनर्जन्म एवं कर्म के सिद्धांतों को पाश्चात्य श्रोताओं के समक्ष रखा और भारतीयों में आत्मविश्वास जगाया — यद्यपि उसकी रहस्यवादी प्रवृत्ति की आलोचना भी हुई।

उत्तर प्रदेश संदर्भ — बनारस, अलीगढ़, लखनऊ, आगरा, मथुरा

8.6 अलीगढ़ आंदोलन

8.7 देवबंद आंदोलन

दारुल उलूम, देवबंद (सहारनपुर, उ.प्र.) — 30 मई 1866; संस्थापक मुहम्मद क़ासिम नानौतवी तथा रशीद अहमद गंगोही। यह अलीगढ़ के ठीक विपरीत धारा थी — परंपरागत इस्लामी शिक्षा पर बल, सरकारी सहायता से दूरी और ब्रिटिश-विरोधी रुख। 20वीं शताब्दी में महमूद-उल-हसन तथा जमीअत-उल-उलेमा-ए-हिंद की धारा ने राष्ट्रीय आंदोलन और संयुक्त राष्ट्रवाद का समर्थन किया, जबकि अलीगढ़ की धारा पृथकतावाद की ओर गई।

8.8 सिख एवं पारसी सुधार

8.9 दक्षिण भारत के आत्म-सम्मान एवं जाति-विरोधी आंदोलन

सुमेलन-तालिका 17 : संस्था ↔ संस्थापक ↔ वर्ष ↔ स्थान
संस्थासंस्थापकवर्षस्थान
आत्मीय सभाराजा राममोहन राय1815कलकत्ता
ब्रह्म समाज (ब्रह्म सभा)राजा राममोहन राय1828कलकत्ता
तत्वबोधिनी सभादेवेंद्रनाथ टैगोर1839कलकत्ता
परमहंस मंडलीदादोबा पांडुरंग आदि1849बंबई
रहनुमाई मज़दयासनन सभानौरोजी फ़ुरदुनजी, दादाभाई नौरोजी1851बंबई
राधास्वामी मतशिव दयाल सिंह1861आगरा
साइंटिफ़िक सोसाइटीसर सैयद अहमद खाँ1864गाज़ीपुर → अलीगढ़
दारुल उलूममुहम्मद क़ासिम नानौतवी1866देवबंद (सहारनपुर)
प्रार्थना समाजआत्माराम पांडुरंग1867बंबई
सत्यशोधक समाजज्योतिबा फुले1873पुणे
सिंह सभा (प्रथम)सिख विद्वानों का समूह1873अमृतसर
आर्य समाजस्वामी दयानंद सरस्वती1875बंबई
थियोसोफिकल सोसाइटीब्लावात्स्की एवं ऑल्कॉट1875न्यूयॉर्क (1882 से अड्यार)
देव समाजशिव नारायण अग्निहोत्री1887लाहौर
अहमदिया आंदोलनमिर्ज़ा ग़ुलाम अहमद1889कादियान
रामकृष्ण मिशनस्वामी विवेकानंद1897बेलूर (कलकत्ता)
सेंट्रल हिंदू कॉलेजएनी बेसेंट1898बनारस
चीफ़ खालसा दीवानसिंह सभाओं का संघ1902अमृतसर
गुरुकुल कांगड़ीस्वामी श्रद्धानंद1902हरिद्वार
एस.एन.डी.पी. योगमश्री नारायण गुरु1903केरल
जस्टिस पार्टीत्यागराज चेट्टी, टी. एम. नायर1916मद्रास
आत्म-सम्मान आंदोलनई. वी. रामासामी 'पेरियार'1925तमिलनाडु
सावधानी
स्वयं जाँच — इस खंड से 3 प्रश्न

प्र.1 सूची-I (संस्था) को सूची-II (स्थापना वर्ष) से सुमेलित कीजिए तथा सूचियों के नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
सूची-I: A. प्रार्थना समाज  B. सत्यशोधक समाज  C. आर्य समाज  D. रामकृष्ण मिशन
सूची-II: 1. 1873  2. 1867  3. 1897  4. 1875
कूट:

AA-2, B-1, C-4, D-3BA-1, B-2, C-3, D-4CA-1, B-2, C-4, D-3DA-2, B-1, C-3, D-4
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (A)प्रार्थना समाज की स्थापना 1867 में आत्माराम पांडुरंग ने बंबई में की (A-2)। सत्यशोधक समाज ज्योतिबा फुले ने 1873 में पुणे में स्थापित किया (B-1)। स्वामी दयानंद सरस्वती ने आर्य समाज की पहली इकाई 1875 में बंबई में स्थापित की (C-4)। रामकृष्ण मिशन की स्थापना स्वामी विवेकानंद ने 1897 में की (D-3)।

प्र.2 निम्नलिखित में से कौन-सा/से युग्म सही सुमेलित नहीं है/हैं?
   (आंदोलन/संस्था)    (संबद्ध व्यक्ति)
1. यंग बंगाल आंदोलन — केशव चंद्र सेन
2. सत्यशोधक समाज — गोपाल हरि देशमुख
3. रामकृष्ण मिशन — स्वामी विवेकानंद
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:

A1 और 2Bकेवल 3C2 और 3Dकेवल 1
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (A)यंग बंगाल आंदोलन के प्रेरणास्रोत हिंदू कॉलेज के शिक्षक हेनरी विवियन डेरोजियो थे, केशव चंद्र सेन ब्रह्म समाज से जुड़े थे; अतः युग्म 1 गलत है। सत्यशोधक समाज (1873) ज्योतिबा फुले ने स्थापित किया था; गोपाल हरि देशमुख 'लोकहितवादी' के नाम से जाने जाते थे; अतः युग्म 2 भी गलत है। रामकृष्ण मिशन स्वामी विवेकानंद ने 1897 में स्थापित किया — यह युग्म सही है।

प्र.3 सूची-I (संगठन/आंदोलन) को सूची-II (संबद्ध व्यक्ति) से सुमेलित कीजिए तथा सूचियों के नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
सूची-I: A. एस.एन.डी.पी. योगम  B. आत्म-सम्मान आंदोलन  C. हरिजन सेवक संघ (प्रथम अध्यक्ष)  D. जस्टिस पार्टी
सूची-II: 1. ई.वी. रामास्वामी नायकर  2. पी. त्यागराय चेट्टी  3. श्री नारायण गुरु  4. घनश्याम दास बिड़ला
कूट:

AA-1, B-3, C-4, D-2BA-3, B-1, C-2, D-4CA-1, B-3, C-2, D-4DA-3, B-1, C-4, D-2
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (D)एस.एन.डी.पी. योगम (1903) श्री नारायण गुरु से जुड़ा है; आत्म-सम्मान आंदोलन ई.वी. रामास्वामी नायकर ('पेरियार') ने चलाया; हरिजन सेवक संघ (1932) के प्रथम अध्यक्ष घनश्याम दास बिड़ला तथा प्रथम सचिव अमृतलाल ठक्कर ('ठक्कर बापा') थे; तथा जस्टिस पार्टी (1916) के प्रमुख संस्थापकों में पी. त्यागराय चेट्टी थे। अतः A-3, B-1, C-4, D-2 सही है।

9. सामाजिक विधान एवं महिला शिक्षा

यह ध्यान रखना आवश्यक है कि अंग्रेजों ने ये कानून किसी सुधारवादी उत्साह से नहीं, बल्कि भारतीय सुधारकों के दबाव तथा जनमत बनने पर ही बनाए — और 1857 के बाद तो उन्होंने सामाजिक हस्तक्षेप से सचेत दूरी ही बना ली, क्योंकि 'धर्म में हस्तक्षेप' विद्रोह का एक बड़ा कारण माना गया।

सुमेलन-तालिका 18 : सामाजिक विधान ↔ वर्ष ↔ संबंधित व्यक्ति/अधिकारी
विधानवर्षप्रावधान एवं संदर्भ
कन्या-वध विरोधी विनियम1795 एवं 1804कन्या-वध को हत्या घोषित किया गया (वेलेज़ली के काल में विस्तार)
बंगाल सती विनियम (Regulation XVII)1829सती प्रथा अवैध एवं दंडनीय; लॉर्ड विलियम बेंटिंक; प्रेरक राजा राममोहन राय। 1830 में बंबई एवं मद्रास में विस्तार। राधाकांत देव की धर्म सभा ने प्रिवी काउंसिल में अपील की, जो 1832 में खारिज हुई।
ठगी का दमन1830 के दशककर्नल विलियम स्लीमन; बेंटिंक के काल में
दास प्रथा उन्मूलन (Act V)1843दासता की कानूनी मान्यता समाप्त; 1833 के चार्टर एक्ट के निर्देश की परिणति; 1860 की भारतीय दंड संहिता ने दास-व्यापार को अपराध बनाया
जाति-निर्योग्यता निवारण अधिनियम1850धर्म-परिवर्तन या जाति-बहिष्कार पर संपत्ति के उत्तराधिकार का अधिकार सुरक्षित
हिंदू विधवा पुनर्विवाह अधिनियम (Act XV)1856विधवा विवाह को वैध मान्यता; ईश्वरचंद्र विद्यासागर के अभियान का परिणाम; लॉर्ड कैनिंग के काल में (विधेयक डलहौज़ी के काल में तैयार)
देशी विवाह / सिविल मैरिज एक्ट1872केशवचंद्र सेन के प्रयास से; अंतर्जातीय एवं विधवा विवाह को वैधता; न्यूनतम आयु का प्रावधान
कन्या-वध निवारण अधिनियम1870जन्म-पंजीकरण अनिवार्य तथा कन्याओं का सत्यापन
सहमति की आयु अधिनियम (Age of Consent Act)1891सहमति की आयु 10 से बढ़ाकर 12 वर्ष; बहरामजी मालाबारी का अभियान; फुलमनी दासी प्रकरण। तिलक जैसे नेताओं ने इसे 'धर्म में हस्तक्षेप' कहकर विरोध किया। 1925 में यह आयु और बढ़ाई गई।
बाल विवाह निरोधक अधिनियम (शारदा अधिनियम)1929हरबिलास शारदा (आर्य समाजी) द्वारा प्रस्तुत; विवाह की न्यूनतम आयु — लड़की 14, लड़का 18 वर्ष; 1930 से प्रभावी; सभी समुदायों पर लागू

9.1 महिला शिक्षा एवं महिला संगठन

उत्तर प्रदेश संदर्भ

भारत का प्रथम अखिल भारतीय स्तर का महिला संगठन 'भारत स्त्री महामंडल' सरला देवी चौधुरानी द्वारा 1910 में इलाहाबाद में स्थापित किया गया — इसका मुख्य उद्देश्य स्त्री-शिक्षा का प्रसार था। इसी प्रकार शारदा अधिनियम (1929) के क्रियान्वयन तथा आर्य समाज की शुद्धि एवं स्त्री-शिक्षा गतिविधियों का सबसे सघन क्षेत्र पश्चिमी उत्तर प्रदेश रहा।

स्वयं जाँच — इस खंड से 3 प्रश्न

प्र.1 भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की महिला अध्यक्षों के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
1. कांग्रेस की प्रथम महिला अध्यक्ष एनी बेसेंट थीं, जो 1917 के कलकत्ता अधिवेशन की अध्यक्ष बनीं।
2. सरोजिनी नायडू कांग्रेस की अध्यक्ष बनने वाली प्रथम महिला थीं।
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:

Aकेवल 2Bन तो 1 और न ही 2C1 और 2 दोनोंDकेवल 1
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (D)एनी बेसेंट 1917 के कलकत्ता अधिवेशन की अध्यक्ष बनकर कांग्रेस की प्रथम महिला अध्यक्ष बनीं; अतः कथन 1 सही है। सरोजिनी नायडू 1925 में अध्यक्ष बनीं, किंतु वे कांग्रेस की प्रथम *भारतीय* महिला अध्यक्ष थीं, प्रथम महिला अध्यक्ष नहीं; अतः कथन 2 गलत है। 1933 में नेली सेनगुप्ता भी अध्यक्ष बनीं।

प्र.2 निम्नलिखित अधिनियमों को सही कालक्रमानुसार क्रम में व्यवस्थित कीजिए:
1. हिंदू विधवा पुनर्विवाह अधिनियम
2. सहमति आयु अधिनियम
3. बाल विवाह निरोधक (शारदा) अधिनियम
4. विशेष विवाह अधिनियम
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:

A4, 1, 2, 3B1, 4, 3, 2C1, 4, 2, 3D4, 1, 3, 2
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (C)हिंदू विधवा पुनर्विवाह अधिनियम 1856 में (ईश्वरचंद्र विद्यासागर के प्रयासों से) पारित हुआ; विशेष विवाह अधिनियम 1872 में; सहमति आयु अधिनियम 1891 में (बी.एम. मालाबारी के अभियान के फलस्वरूप) तथा बाल विवाह निरोधक अधिनियम (शारदा अधिनियम) 1929 में। अतः सही क्रम 1, 4, 2, 3 है।

प्र.3 राष्ट्रीय आंदोलन-कालीन महिला संगठनों के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
1. 'वीमेंस इंडियन एसोसिएशन' (1917) की स्थापना मद्रास के अड्यार में हुई तथा एनी बेसेंट इसकी प्रथम अध्यक्ष बनीं।
2. 'अखिल भारतीय महिला सम्मेलन' (AIWC) का प्रथम अधिवेशन 1927 में पूना में हुआ था।
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:

A1 और 2 दोनोंBन तो 1 और न ही 2Cकेवल 2Dकेवल 1
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (A)वीमेंस इंडियन एसोसिएशन की स्थापना 1917 में मद्रास के अड्यार में मार्गरेट कजिन्स, डोरोथी जिनराजदास आदि ने की और एनी बेसेंट इसकी प्रथम अध्यक्ष बनीं; अतः कथन 1 सही है। अखिल भारतीय महिला सम्मेलन का प्रथम अधिवेशन 1927 में पूना में हुआ, जिसका आरंभिक ध्यान स्त्री-शिक्षा पर था; अतः कथन 2 भी सही है।

10. शिक्षा एवं प्रेस का विकास

10.1 आरंभिक प्रयास एवं प्राच्य-आंग्ल विवाद

10.2 मैकाले मिनट (1835) एवं अधोमुखी निस्यंदन

2 फरवरी 1835 को विधि सदस्य टी. बी. मैकाले ने अपना प्रसिद्ध 'मिनट' प्रस्तुत किया, जिसमें भारतीय एवं अरबी-फ़ारसी ज्ञान-परंपरा को हेय बताते हुए अंग्रेजी शिक्षा का पक्ष लिया गया। उसका घोषित लक्ष्य था — ऐसा वर्ग तैयार करना जो "रक्त एवं रंग में भारतीय, किंतु रुचि, विचार, नैतिकता एवं बुद्धि में अंग्रेज" हो। 7 मार्च 1835 को बेंटिंक ने इसे स्वीकार कर अंग्रेजी को उच्च शिक्षा का माध्यम बना दिया। इसके साथ चली 'अधोमुखी निस्यंदन' (downward filtration) नीति — शिक्षा केवल उच्च वर्ग को दी जाए, वहाँ से वह स्वयं जनसामान्य तक रिस जाएगी। व्यवहार में यह रिसाव कभी हुआ ही नहीं — यही औपनिवेशिक शिक्षा-नीति की सबसे बड़ी विफलता है।

10.3 शिक्षा आयोग एवं प्रतिवेदन

सुमेलन-तालिका 19 : शिक्षा आयोग ↔ वर्ष ↔ गवर्नर-जनरल/वायसराय ↔ सिफ़ारिश
आयोग / प्रतिवेदनवर्षकालमुख्य सिफ़ारिश
वुड डिस्पैच (चार्ल्स वुड)1854डलहौज़ी'भारत में अंग्रेजी शिक्षा का मैग्ना कार्टा' — प्रत्येक प्रांत में लोक शिक्षा विभाग; कलकत्ता, बंबई एवं मद्रास में लंदन विश्वविद्यालय के ढर्रे पर विश्वविद्यालय (तीनों 1857 में स्थापित); प्राथमिक स्तर पर देशी भाषा, उच्च स्तर पर अंग्रेजी; अनुदान-सहायता प्रणाली; शिक्षक-प्रशिक्षण एवं स्त्री-शिक्षा को प्रोत्साहन
हंटर आयोग (डब्ल्यू. डब्ल्यू. हंटर)1882रिपनप्राथमिक शिक्षा पर विशेष बल तथा उसका प्रबंध ज़िला/नगर बोर्डों को; माध्यमिक स्तर पर दो धाराएँ — साहित्यिक एवं व्यावसायिक; निजी प्रयास को प्रोत्साहन
रैले आयोग (टॉमस रैले) → भारतीय विश्वविद्यालय अधिनियम1902 → 1904कर्ज़नविश्वविद्यालयों को केवल परीक्षा लेने वाली संस्था से बदलकर अध्यापन एवं शोध से जोड़ना; सीनेट का आकार घटाना; संबद्धता के कठोर नियम। राष्ट्रवादियों ने इसे विश्वविद्यालयों पर सरकारी नियंत्रण बढ़ाने का प्रयास माना
सरकारी शिक्षा नीति प्रस्ताव1913हार्डिंग द्वितीयअनिवार्य शिक्षा का दायित्व लेने से इनकार, पर निरक्षरता उन्मूलन का संकल्प; प्रांतों से पहल की अपेक्षा
सैडलर आयोग (कलकत्ता विश्वविद्यालय आयोग, माइकल सैडलर)1917–19चेम्सफोर्डविद्यालय-शिक्षा 12 वर्ष; विश्वविद्यालय से पहले इंटरमीडिएट कॉलेज; 3 वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम; एकल एवं आवासीय अध्यापन-विश्वविद्यालय; स्त्री-शिक्षा, व्यावसायिक एवं तकनीकी शिक्षा पर बल
हर्टाग समिति (फिलिप हर्टाग)1929इर्विनसंख्या नहीं, गुणवत्ता — प्राथमिक शिक्षा का सुदृढ़ीकरण; औसत छात्रों को मध्य स्तर पर ही व्यावसायिक शिक्षा की ओर मोड़ना
वर्धा योजना (बुनियादी शिक्षा) / सार्जेंट योजना1937 / 1944गांधीजी की 'नई तालीम' — हस्तशिल्प-केंद्रित, स्वावलंबी शिक्षा (डॉ. ज़ाकिर हुसैन समिति); सार्जेंट योजना ने 40 वर्षों में सार्वभौमिक शिक्षा का लक्ष्य रखा
उत्तर प्रदेश संदर्भ — शिक्षा-संस्थाएँ

10.4 प्रेस — नियंत्रण का इतिहास

भारत का प्रथम समाचार-पत्र 'बंगाल गजट' (1780) था, जिसे जेम्स ऑगस्टस हिक्की ने निकाला — इसीलिए इसे 'हिक्कीज़ गजट' भी कहते हैं। इसके बाद प्रेस और सरकार के बीच का संबंध प्रायः टकराव का ही रहा।

सुमेलन-तालिका 20 : प्रेस अधिनियम ↔ वर्ष ↔ अधिकारी
अधिनियमवर्षअधिकारीप्रावधान
सेंसरशिप ऑफ प्रेस एक्ट1799वेलेज़लीप्रकाशन से पूर्व सामग्री की जाँच (pre-censorship); फ्रांसीसी खतरे के नाम पर
लाइसेंसिंग रेगुलेशन1823कार्यवाहक गवर्नर-जनरल जॉन एडमबिना लाइसेंस प्रकाशन दंडनीय; मुख्य निशाना भारतीय भाषाओं के पत्र — राममोहन राय का मिरात-उल-अख़बार इसी से बंद हुआ
मेटकाफ़ एक्ट1835चार्ल्स मेटकाफ़1823 के नियम निरस्त; इसीलिए मेटकाफ़ को 'भारतीय प्रेस का मुक्तिदाता' तथा इस अधिनियम को 'भारतीय प्रेस का मैग्ना कार्टा' कहा जाता है
लाइसेंसिंग एक्ट1857कैनिंगविद्रोह के दौरान आपातकालीन लाइसेंस-व्यवस्था
प्रेस एवं पुस्तक पंजीकरण अधिनियम1867लॉरेंसनियामक, दमनकारी नहीं — मुद्रक, प्रकाशक एवं प्रकाशन-स्थल छापना तथा एक प्रति सरकार को देना अनिवार्य
वर्नाक्युलर प्रेस एक्ट1878लिटनकेवल भारतीय भाषाओं के पत्रों पर लागू, अंग्रेजी पत्रों पर नहीं — इसीलिए इसे 'मुँह बंद करने वाला कानून' (gagging act) कहा गया; ज़िला मजिस्ट्रेट बांड भरवा सकता था, प्रेस ज़ब्त कर सकता था; अपील का अधिकार नहीं। अमृत बाज़ार पत्रिका रातोंरात अंग्रेजी में छपने लगी। 1882 में रिपन ने इसे निरस्त किया।
समाचार-पत्र (अपराध उद्दीपन) अधिनियम1908मिंटो'उद्दीपक' सामग्री पर प्रेस की ज़ब्ती
भारतीय प्रेस अधिनियम1910मिंटोनए प्रेस से जमानत की माँग; ज़ब्ती का व्यापक अधिकार
भारतीय प्रेस (आपात शक्तियाँ) अधिनियम1931विलिंग्डनसविनय अवज्ञा आंदोलन के दमन हेतु प्रांतीय सरकारों को व्यापक शक्तियाँ
सुमेलन-तालिका 21 : समाचार-पत्र/पत्रिका ↔ संस्थापक/संपादक ↔ भाषा
पत्रसंस्थापक / संपादकभाषा एवं स्थान
बंगाल गजट (1780)जेम्स ऑगस्टस हिक्कीअंग्रेजी · कलकत्ता — भारत का प्रथम समाचार-पत्र
संवाद कौमुदी (1821)राजा राममोहन रायबांग्ला
मिरात-उल-अख़बार (1822)राजा राममोहन रायफ़ारसी
रास्त गोफ़्तार (1851)दादाभाई नौरोजीगुजराती · बंबई
हिंदू पैट्रियटहरिश्चंद्र मुखर्जीअंग्रेजी · कलकत्ता — नील विद्रोह में किसानों का पक्ष
सोम प्रकाश (1858)ईश्वरचंद्र विद्यासागरबांग्ला
इंडियन मिररदेवेंद्रनाथ टैगोर / केशवचंद्र सेनअंग्रेजी · कलकत्ता
अलीगढ़ इंस्टीट्यूट गजट (1866)सर सैयद अहमद खाँउर्दू-अंग्रेजी · अलीगढ़
कविवचन सुधा (1867)भारतेंदु हरिश्चंद्रहिंदी · काशी
अमृत बाज़ार पत्रिका (1868)शिशिर कुमार घोष एवं मोतीलाल घोषबांग्ला → अंग्रेजी
तहज़ीब-उल-अख़लाक़सर सैयद अहमद खाँउर्दू · अलीगढ़
हरिश्चंद्र मैगज़ीन (1873)भारतेंदु हरिश्चंद्रहिंदी · काशी
द हिंदू (1878)जी. सुब्रह्मण्यम अय्यरअंग्रेजी · मद्रास
केसरी एवं मराठा (1881)बाल गंगाधर तिलक (एवं आगरकर)मराठी एवं अंग्रेजी · पुणे
बंगालीसुरेंद्रनाथ बनर्जीअंग्रेजी · कलकत्ता
सुधारकगोपाल कृष्ण गोखलेमराठी-अंग्रेजी · पुणे
हिंदुस्तानराजा रामपाल सिंह द्वारा स्थापित; मदन मोहन मालवीय संपादक (1887 से)हिंदी · कालाकांकर (प्रतापगढ़)
सरस्वती (1900)इंडियन प्रेस; संपादक महावीर प्रसाद द्विवेदी (1903 से)हिंदी · इलाहाबाद
अभ्युदय (1907) एवं द लीडर (1909)मदन मोहन मालवीयहिंदी / अंग्रेजी · इलाहाबाद
अल-हिलाल (1912)अबुल कलाम आज़ादउर्दू · कलकत्ता
प्रताप (1913)गणेश शंकर विद्यार्थीहिंदी · कानपुर
उत्तर प्रदेश संदर्भ — हिंदी पत्रकारिता का उद्गम

आधुनिक हिंदी गद्य एवं पत्रकारिता की धुरी उत्तर प्रदेश ही रही। भारतेंदु हरिश्चंद्र (1850–85) को 'आधुनिक हिंदी साहित्य का जनक' कहा जाता है; उनका कविवचन सुधा काशी से निकला। महावीर प्रसाद द्विवेदी ने इलाहाबाद से सरस्वती का संपादन कर खड़ी बोली को साहित्यिक प्रतिष्ठा दी — इसीलिए 1900–20 का काल 'द्विवेदी युग' कहलाता है। गणेश शंकर विद्यार्थी ने कानपुर से प्रताप निकालकर किसान-मज़दूर के प्रश्नों को राष्ट्रीय स्वर दिया और 1931 के कानपुर दंगों में शांति-प्रयास करते हुए प्राण गँवाए।

सावधानी
स्वयं जाँच — इस खंड से 3 प्रश्न

प्र.1 नीचे दो कथन दिए गए हैं, जिनमें से एक को अभिकथन (A) तथा दूसरे को कारण (R) कहा गया है।
अभिकथन (A): वर्नाक्युलर प्रेस एक्ट लागू होने के कुछ ही दिनों के भीतर 'अमृत बाजार पत्रिका' स्वयं को अंग्रेजी साप्ताहिक में बदल चुकी थी।
कारण (R): वर्नाक्युलर प्रेस एक्ट के प्रावधान केवल देशी भाषाओं के समाचारपत्रों पर लागू होते थे, अंग्रेजी पत्रों पर नहीं।
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:

A(A) और (R) दोनों सही हैं, किन्तु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं करता हैB(A) गलत है, किन्तु (R) सही हैC(A) सही है, किन्तु (R) गलत हैD(A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या करता है
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (D)1878 के वर्नाक्युलर प्रेस एक्ट ने केवल देशी भाषाओं (vernacular) के पत्रों पर कठोर नियंत्रण लगाया, अंग्रेजी पत्र इसके दायरे से बाहर थे। इसी विभेद का लाभ उठाते हुए बंगाली साप्ताहिक 'अमृत बाजार पत्रिका' ने अधिनियम लागू होते ही रातोंरात स्वयं को अंग्रेजी पत्र में परिवर्तित कर लिया। अतः (A) तथा (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या करता है।

प्र.2 सूची-I (शिक्षा संबंधी आयोग/योजना) को सूची-II (वर्ष) से सुमेलित कीजिए तथा सूचियों के नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
सूची-I: A. हंटर आयोग  B. रैले आयोग  C. सैडलर आयोग  D. सार्जेंट योजना
सूची-II: 1. 1902  2. 1917  3. 1944  4. 1882
कूट:

AA-1, B-4, C-2, D-3BA-4, B-1, C-3, D-2CA-4, B-1, C-2, D-3DA-1, B-4, C-3, D-2
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (C)हंटर आयोग (भारतीय शिक्षा आयोग) 1882 में लॉर्ड रिपन के काल में प्राथमिक शिक्षा पर केंद्रित था; रैले आयोग 1902 में विश्वविद्यालयों की दशा पर बना, जिसकी संस्तुतियों से भारतीय विश्वविद्यालय अधिनियम, 1904 निकला; सैडलर (कलकत्ता विश्वविद्यालय) आयोग 1917 में गठित हुआ; तथा सार्जेंट योजना 1944 की है। अतः A-4, B-1, C-2, D-3 सही है।

प्र.3 नीचे दो कथन दिए गए हैं, जिनमें से एक को अभिकथन (A) तथा दूसरे को कारण (R) कहा गया है।
अभिकथन (A): चार्ल्स मेटकाफ को 'भारतीय प्रेस का मुक्तिदाता' कहा जाता है।
कारण (R): 1835 के प्रेस अधिनियम द्वारा उन्होंने 1823 के दमनकारी लाइसेंसिंग विनियमों को निरस्त कर दिया था।
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:

A(A) और (R) दोनों सही हैं, किन्तु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं करता हैB(A) गलत है, किन्तु (R) सही हैC(A) सही है, किन्तु (R) गलत हैD(A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या करता है
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (D)कार्यवाहक गवर्नर-जनरल चार्ल्स मेटकाफ ने 1835 के प्रेस अधिनियम से 1823 के लाइसेंसिंग विनियमों को समाप्त कर दिया, जिससे समाचार-पत्रों का तीव्र विस्तार हुआ। इसी कारण उन्हें 'भारतीय प्रेस का मुक्तिदाता' (Liberator of the Indian Press) कहा गया। अतः (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या करता है।

11. 1857 का विद्रोह

बैरकपुर मेरठ दिल्ली बरेली लखनऊ फ़ैज़ाबाद कानपुर झाँसी ग्वालियर जगदीशपुर मंदसौर
विद्रोह का आरंभ-बिंदुप्रमुख केंद्रमध्य भारत / बिहार
विद्रोह की भौगोलिक सीमा ही उसकी असफलता बताती है — गंगा का मैदान एवं मध्य भारत; पंजाब, बंगाल एवं दक्षिण लगभग अछूते रहे। बैरकपुर में 29 मार्च को मंगल पांडे की घटना हुई, पर सामूहिक विद्रोह 10 मई को मेरठ से आरंभ हुआ।
मेरठ बरेली लखनऊ कानपुर फ़ैज़ाबाद झाँसी इलाहाबाद बिजनौर मथुरा शाहजहाँपुर फ़र्रुख़ाबाद कालपी बनारस दिल्ली
प्रमुख विद्रोह-केंद्रअन्य केंद्रअंग्रेजों के पक्ष मेंदिल्ली — उ.प्र. के बाहर
आरंभ मेरठ से, प्रतीक दिल्ली, पर सबसे लंबा संघर्ष अवध एवं रुहेलखंड में। दिल्ली उ.प्र. के बाहर है, इसीलिए रेखा के बाहर दिखती है; कानपुर के पास ही बिठूर — नाना साहब का केंद्र। बनारस के राजा एवं बड़े ज़मींदार अंग्रेजों के साथ रहे — विद्रोह उ.प्र. में भी सर्वसम्मत नहीं था।

11.1 कारण

सुमेलन-तालिका 22 : 1857 के कारण
वर्गप्रमुख कारण
राजनीतिकव्यपगत सिद्धांत से रियासतों का विलय; अवध का विलय (1856) — जिसे देशभर के सिपाहियों ने अपमान माना क्योंकि बंगाल सेना का बड़ा भाग अवध का था; नाना साहब की पेंशन बंद; बहादुर शाह के उत्तराधिकारियों से मुग़ल उपाधि तथा लाल किला छीनने की घोषणा; कर्नाटक एवं तंजौर की उपाधियों का अंत
आर्थिकभारी भू-राजस्व एवं कठोर वसूली; अवध में 1856 के 'संक्षिप्त बंदोबस्त' से तालुकेदारों की भूमि छिनना; इनाम कमीशन (बंबई) द्वारा कर-मुक्त भूमि की जाँच; हस्तशिल्प का विनाश एवं कारीगरों की बेरोज़गारी; धन-निष्कासन
सामाजिक-धार्मिकईसाई मिशनरियों की खुली गतिविधि; जाति-निर्योग्यता निवारण अधिनियम, 1850 — जिसे धर्मांतरण को प्रोत्साहन माना गया; सती-निषेध एवं विधवा पुनर्विवाह को 'धर्म में हस्तक्षेप' समझा जाना; रेल-तार जैसी नवीनताओं पर संदेह; अंग्रेजों का नस्लीय दंभ
सैनिकवेतन एवं भत्तों में भेदभाव, सूबेदार से ऊपर पदोन्नति असंभव; सामान्य सेवा भर्ती अधिनियम, 1856 — जिसके अनुसार सिपाही को समुद्र पार भी सेवा देनी पड़ती (समुद्र-यात्रा को जाति-भ्रष्टता माना जाता था); डाकघर अधिनियम, 1854 से निःशुल्क डाक-सुविधा की समाप्ति; अंग्रेज एवं भारतीय सैनिकों का अनुपात लगभग 1:5
तात्कालिकएनफ़ील्ड P-53 राइफ़ल के चर्बीयुक्त कारतूस — जिन्हें दाँत से काटना पड़ता था और जिनमें गाय एवं सूअर की चर्बी होने की चर्चा फैली

11.2 आरंभ एवं विस्तार

सुमेलन-तालिका 23 : 1857 — केंद्र ↔ भारतीय नेता ↔ दमन करने वाला अंग्रेज अधिकारी
केंद्रभारतीय नेताब्रिटिश दमनकर्ता / परिणाम
दिल्लीबहादुर शाह ज़फ़र (प्रतीकात्मक), जनरल बख़्त खाँ (वास्तविक)जॉन निकोल्सन (मारा गया) एवं हडसन; सितंबर 1857 में दिल्ली पुनः अधिकार में; बहादुर शाह रंगून निर्वासित (मृत्यु 1862), उनके पुत्र लेफ्टिनेंट हडसन द्वारा गोली से मारे गए
कानपुरनाना साहब (पेशवा बाजीराव द्वितीय के दत्तक पुत्र), तात्या टोपे, अज़ीमुल्ला खाँह्यू व्हीलर, हैवलॉक, कॉलिन कैंपबेल — 6 दिसंबर 1857 को कानपुर पूर्णतः पुनः अधिकार में
लखनऊबेगम हज़रत महल, जिन्होंने अपने अल्पवयस्क पुत्र बिरजिस क़द्र को नवाब घोषित कियाहेनरी लॉरेंस (रेज़िडेंसी की घेराबंदी में मारे गए), हैवलॉक एवं आउट्रम; मार्च 1858 में कॉलिन कैंपबेल द्वारा अंतिम पुनर्विजय; बेगम नेपाल चली गईं
झाँसी एवं ग्वालियररानी लक्ष्मीबाई, बाद में तात्या टोपे के साथसर ह्यू रोज़; अप्रैल 1858 में झाँसी का पतन; जून 1858 में ग्वालियर के निकट रानी वीरगति को प्राप्त हुईं — ह्यू रोज़ ने उन्हें 'विद्रोहियों में सर्वश्रेष्ठ एवं सर्वाधिक साहसी' कहा
बरेलीखान बहादुर खाँ — रुहेला नवाब के वंशज, जिन्होंने स्वयं को शासक घोषित कियाकैंपबेल; मई 1858 में बरेली पुनः अधिकार में
फ़ैज़ाबादमौलवी अहमदुल्ला शाह — 'अवध के विद्रोह का प्रकाश-स्तंभ'1858 में शाहजहाँपुर के निकट पवायाँ में विश्वासघात द्वारा मारे गए
इलाहाबादमौलवी लियाक़त अली — मुख्यालय खुसरो बागकर्नल नील का कुख्यात दमन
फ़र्रुख़ाबादनवाब तुफ़ज़्ज़ुल हसन खाँ
मथुरादेवी सिंह — समानांतर सरकार चलाईपकड़कर फाँसी
बिजनौरमहमूद खाँ
जगदीशपुर (बिहार)कुँवर सिंह एवं अमर सिंह — 80 वर्ष की आयु में नेतृत्वविलियम टेलर एवं विंसेंट आयर; 1858 में कुँवर सिंह की मृत्यु
ग्वालियर/कालपीतात्या टोपे — छापामार युद्ध का सर्वश्रेष्ठ उदाहरणमानसिंह के विश्वासघात से पकड़े गए; 18 अप्रैल 1859 को फाँसी
कोटा (राजस्थान)जयदयाल एवं हरदयाल सिंह
मंदसौरफ़िरोज़ शाह
उत्तर प्रदेश संदर्भ — 1857 का मुख्य रंगमंच

1857 का विद्रोह मूलतः उत्तर प्रदेश का विद्रोह था — आरंभ मेरठ से, प्रतीक दिल्ली, पर सबसे लंबा एवं सबसे व्यापक संघर्ष अवध तथा रुहेलखंड में हुआ। याद रखने योग्य युग्म —

दूसरी ओर बनारस के राजा तथा अनेक बड़े ज़मींदार अंग्रेजों के साथ रहे — विद्रोह उत्तर प्रदेश में भी सर्वसम्मत नहीं था। विद्रोह के बाद अवध के तालुकेदारों को भूमि लौटाकर कैनिंग ने उन्हें स्थायी रूप से अपने पक्ष में कर लिया।

11.3 दमन एवं असफलता के कारण

असफलता के कारण:

11.4 परिणाम

11.5 स्वरूप पर मतभेद

सुमेलन-तालिका 24 : 1857 — विद्वान ↔ व्याख्या
विद्वान / लेखक1857 को क्या कहा
वी. डी. सावरकर (The Indian War of Independence, 1857, 1909)'प्रथम भारतीय स्वातंत्र्य समर' — सुनियोजित राष्ट्रीय एवं धार्मिक युद्ध
सर जॉन सीले, सर जॉन लॉरेंस'पूर्णतः अराष्ट्रीय एवं स्वार्थी सैनिक विद्रोह', जिसे न देशी नेतृत्व मिला, न जन-समर्थन
आर. सी. मजूमदार'यह न प्रथम था, न राष्ट्रीय, और न ही स्वतंत्रता का युद्ध'
एस. एन. सेन (Eighteen Fifty-Seven, 1957)'जो धर्म के लिए युद्ध के रूप में आरंभ हुआ, वह स्वतंत्रता के युद्ध के रूप में समाप्त हुआ'
जवाहरलाल नेहरूसामंती नेतृत्व वाला विद्रोह, जिसमें राष्ट्रीय भावना के तत्व अवश्य थे
कार्ल मार्क्स'राष्ट्रीय विद्रोह' — औपनिवेशिक शोषण की प्रतिक्रिया
टी. आर. होम्स'सभ्यता एवं बर्बरता के बीच संघर्ष'
अशोक मेहता'महान विद्रोह' — इसमें राष्ट्रीय चरित्र के तत्व विद्यमान थे
एरिक स्टोक्सएकल विद्रोह नहीं, बल्कि स्थानीय शिकायतों से उपजे अनेक विद्रोहों का समुच्चय
सावधानी
स्वयं जाँच — इस खंड से 3 प्रश्न

प्र.1 1857 के विद्रोह के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. दिल्ली में विद्रोहियों ने बहादुर शाह द्वितीय को भारत का सम्राट घोषित किया।
2. कानपुर में विद्रोह का नेतृत्व नाना साहेब ने किया।
3. लखनऊ में विद्रोह का नेतृत्व कुँवर सिंह ने किया।
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:

A1 और 2Bकेवल 3C2 और 3Dकेवल 1
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (A)10 मई 1857 को मेरठ से चले सिपाहियों ने दिल्ली पहुँचकर बहादुर शाह द्वितीय को भारत का सम्राट घोषित किया; कथन 1 सही है। कानपुर में नेतृत्व नाना साहेब (तथा तात्या टोपे) के हाथ रहा; कथन 2 सही है। लखनऊ में विद्रोह का नेतृत्व बेगम हजरत महल ने किया, जबकि कुँवर सिंह जगदीशपुर (बिहार) से जुड़े थे; अतः कथन 3 गलत है।

प्र.2 '1857 के विद्रोह के नेतृत्व' के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
1. विद्रोहियों ने बहादुर शाह द्वितीय को कानपुर में भारत का सम्राट घोषित किया।
2. बरेली में विद्रोह का नेतृत्व खान बहादुर खान ने किया।
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:

Aकेवल 2Bन तो 1 और न ही 2C1 और 2 दोनोंDकेवल 1
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (A)बहादुर शाह द्वितीय को विद्रोही सिपाहियों ने दिल्ली में भारत का सम्राट घोषित किया था, कानपुर में नहीं — कानपुर का नेतृत्व नाना साहेब के पास था; अतः कथन 1 गलत है। रुहेलखंड क्षेत्र के बरेली में विद्रोह की कमान खान बहादुर खान ने सँभाली थी; अतः कथन 2 सही है।

प्र.3 सूची-I (महिला स्वतंत्रता सेनानी) को सूची-II (संबद्ध भूमिका) से सुमेलित कीजिए तथा सूचियों के नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
सूची-I: A. अरुणा आसफ अली  B. उषा मेहता  C. कैप्टन लक्ष्मी सहगल  D. रानी गाइदिन्ल्यू
सूची-II: 1. भूमिगत 'कांग्रेस रेडियो' का संचालन  2. रानी झाँसी रेजिमेंट का नेतृत्व  3. ज़ेलियांग्रोंग (नागा) आंदोलन  4. गोवालिया टैंक मैदान पर तिरंगा फहराना
कूट:

AA-1, B-4, C-2, D-3BA-4, B-1, C-2, D-3CA-1, B-4, C-3, D-2DA-4, B-1, C-3, D-2
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (B)9 अगस्त 1942 को बंबई के गोवालिया टैंक मैदान पर तिरंगा फहराने का श्रेय अरुणा आसफ अली को है; उषा मेहता ने भूमिगत 'कांग्रेस रेडियो' चलाया; कैप्टन लक्ष्मी सहगल ने आजाद हिंद फौज की रानी झाँसी रेजिमेंट का नेतृत्व किया; तथा रानी गाइदिन्ल्यू ज़ेलियांग्रोंग (नागा) आंदोलन की नेत्री थीं। अतः A-4, B-1, C-2, D-3 सही है।

12. जनजातीय एवं किसान विद्रोह

1857 अकेली घटना नहीं थी। 1763 से 1900 तक भारत के किसी न किसी भाग में औसतन हर कुछ वर्ष में एक सशस्त्र विद्रोह हुआ। इनका मूल कारण एक ही था — औपनिवेशिक भू-राजस्व, वन-कानून तथा साहूकार-व्यापारी की तिहरी मार, जिसने जनजातियों को उनकी परंपरागत भूमि-व्यवस्था (खूँटकट्टी) तथा वन-अधिकारों से वंचित कर दिया और किसानों को ऋणग्रस्तता में धकेल दिया। बाहरी लोगों को जनजातियाँ 'दिकू' कहती थीं।

12.1 1857 से पूर्व के प्रमुख विद्रोह

सुमेलन-तालिका 25 : विद्रोह ↔ क्षेत्र ↔ नेता (1857 से पूर्व)
विद्रोहकालक्षेत्रनेता / विशेष
संन्यासी विद्रोह1763–1800बंगाल1770 के अकाल एवं तीर्थयात्रा पर प्रतिबंध की प्रतिक्रिया; बंकिमचंद्र के आनंदमठ का आधार
चुआड़ विद्रोह1766–72, 1798–99मिदनापुर (बंगाल)दुर्जन सिंह
भील विद्रोह1817–19 एवं आगेखानदेश (पश्चिमी भारत)सेवाराम; कंपनी के अधिकार-विस्तार के विरुद्ध
रमोसी विद्रोह1822–29पश्चिमी घाट (महाराष्ट्र)चित्तूर सिंह, उमाजी नाइक
पागलपंथी1825–35मयमनसिंह (बंगाल)करम शाह एवं टीपू
अहोम विद्रोह1828असमगोमधर कुँवर
खासी विद्रोह1829–33खासी पहाड़ियाँ (मेघालय)यू. तीरत सिंह; सड़क-निर्माण एवं बाहरी लोगों के प्रवेश के विरुद्ध
कोल विद्रोह1831–32छोटानागपुरबुद्धू भगत; बाहरी ठेकेदारों को भूमि हस्तांतरण के विरुद्ध
फ़राज़ी आंदोलन1838–57पूर्वी बंगालहाजी शरीअतुल्लाह एवं दूदू मियाँ; धार्मिक सुधार से आरंभ होकर ज़मींदार-विरोधी किसान आंदोलन बना
खोंड विद्रोह1846–55उड़ीसाचक्र बिसोई; नरबलि (मेरिया) पर रोक तथा नए करों के विरुद्ध
संथाल विद्रोह (हूल)1855–56राजमहल पहाड़ियाँ (झारखंड)सिद्धू एवं कान्हू मुर्मू (साथ में चाँद एवं भैरव); साहूकारों तथा ज़मींदारी व्यवस्था के विरुद्ध; परिणामस्वरूप संथाल परगना का अलग प्रशासनिक क्षेत्र बना
उत्तर प्रदेश संदर्भ — वहाबी आंदोलन

वहाबी (वलिउल्लाही) आंदोलन के प्रवर्तक सैयद अहमद बरेलवी थे, जिनका जन्म रायबरेली (उ.प्र.) में हुआ था। शाह वलिउल्लाह एवं उनके पुत्र शाह अब्दुल अज़ीज़ की शिक्षाओं से प्रेरित इस आंदोलन ने इस्लाम में शुद्धीकरण के साथ-साथ भारत को 'दार-उल-हर्ब' से 'दार-उल-इस्लाम' में बदलने का आह्वान किया — व्यवहार में यह पहले सिख शासन और बाद में ब्रिटिश सत्ता के विरुद्ध सशस्त्र संघर्ष बना। पटना इसका प्रमुख संगठनात्मक केंद्र रहा तथा सीमांत क्षेत्र (सित्ताना) सैन्य केंद्र। 1857 के बाद अंग्रेजों ने इसका व्यवस्थित दमन किया। उत्तर प्रदेश के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण यह है कि 19वीं शताब्दी के सबसे संगठित ब्रिटिश-विरोधी आंदोलनों में से एक की जड़ें रायबरेली में थीं।

12.2 1857 के बाद के प्रमुख किसान एवं जनजातीय विद्रोह

सुमेलन-तालिका 26 : विद्रोह ↔ क्षेत्र ↔ नेता ↔ परिणामी कानून
विद्रोहकालक्षेत्र एवं नेतापरिणाम
नील विद्रोह1859–60बंगाल (नदिया ज़िले से आरंभ); दिगंबर विश्वास एवं विष्णुचरण विश्वासयूरोपीय नील-बागान मालिकों की ज़ोर-ज़बरदस्ती के विरुद्ध; नील आयोग (1860); दीनबंधु मित्र का नाटक 'नील दर्पण' (हरीशचंद्र मुखर्जी के हिंदू पैट्रियट ने किसानों का पक्ष लिया)
पाबना कृषक विद्रोह1873–76पूर्वी बंगाल; 'कृषक संघ' (Agrarian League)ज़मींदारों द्वारा मनमानी लगान-वृद्धि एवं बेदखली के विरुद्ध; अंततः बंगाल काश्तकारी अधिनियम, 1885
दक्कन दंगे1875पुणे एवं अहमदनगर (महाराष्ट्र)मारवाड़ी एवं गुजराती साहूकारों के विरुद्ध; बहीखाते जलाए गए; परिणाम — दक्कन कृषक राहत अधिनियम, 1879
रम्पा विद्रोह1879–80आंध्र की पहाड़ियाँनए वन-कानूनों एवं मनसबदारों के विरुद्ध (1922–24 में अल्लूरी सीताराम राजू के नेतृत्व में पुनरावृत्ति)
कोया विद्रोह1879–80पूर्वी गोदावरी (आंध्र); टोम्मा सोरावन-अधिकारों एवं पुलिस-अत्याचार के विरुद्ध
मुंडा उलगुलान1899–1900राँची के दक्षिण का क्षेत्र; बिरसा मुंडा ('धरती आबा')'खूँटकट्टी' भूमि-व्यवस्था के विनाश, बेगारी तथा मिशनरी दबाव के विरुद्ध; परिणाम — छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम, 1908, जिसने जनजातीय भूमि के हस्तांतरण पर रोक लगाई
तानाभगत आंदोलन1914–15छोटानागपुर; जतरा भगत (उराँव)शुद्धीकरण एवं अहिंसक असहयोग; आगे चलकर कांग्रेस से जुड़ा
मोपला विद्रोह1921मालाबार (केरल)काश्तकारी असुरक्षा एवं अत्यधिक लगान; खिलाफ़त-असहयोग आंदोलन के दौरान उग्र रूप
उत्तर प्रदेश संदर्भ — अवध का किसान आंदोलन

20वीं शताब्दी में उत्तर प्रदेश किसान-आंदोलन का सबसे सक्रिय क्षेत्र बना — 1918 की उत्तर प्रदेश किसान सभा, 1920 की अवध किसान सभा (बाबा रामचंद्र के नेतृत्व में, प्रतापगढ़–रायबरेली–फ़ैज़ाबाद क्षेत्र) तथा 1921–22 का एका आंदोलन (हरदोई, बहराइच, सीतापुर; मदारी पासी)। इनकी मुख्य माँगें थीं — बेदखली पर रोक, 'नज़राना' एवं बेगार की समाप्ति तथा लगान में कमी। इन आंदोलनों का विस्तृत विवरण तथा किसान-सभा का राष्ट्रीय आंदोलन से जुड़ाव अध्याय 2.4 में देखें।

सावधानी
स्वयं जाँच — इस खंड से 3 प्रश्न

प्र.1 सूची-I (विद्रोह/आंदोलन) को सूची-II (नेतृत्वकर्ता) से सुमेलित कीजिए तथा सूचियों के नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
सूची-I: A. मुंडा उलगुलान  B. रम्पा विद्रोह (1922)  C. संथाल हूल  D. तानाभगत आंदोलन
सूची-II: 1. अल्लूरी सीताराम राजू  2. सिदो व कान्हू मुर्मू  3. जतरा भगत  4. बिरसा मुंडा
कूट:

AA-1, B-4, C-2, D-3BA-4, B-1, C-2, D-3CA-4, B-1, C-3, D-2DA-1, B-4, C-3, D-2
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (B)मुंडा उलगुलान (1899-1900) का नेतृत्व बिरसा मुंडा ने छोटानागपुर में किया; रम्पा (मन्यम) विद्रोह 1922-24 में गोदावरी एजेंसी क्षेत्र में अल्लूरी सीताराम राजू ने चलाया; संथाल हूल (1855) के अग्रदूत सिदो व कान्हू मुर्मू थे; तथा तानाभगत आंदोलन (1914) का सूत्रपात उराँव जतरा भगत ने किया। अतः सही सुमेलन A-4, B-1, C-2, D-3 है।

प्र.2 कृषक/जनजातीय आंदोलनों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'तेभागा आंदोलन' का संबंध पंजाब से था।
2. पाबना कृषक संघर्ष (1873) का आरंभ बिहार के दरभंगा जिले से हुआ था।
3. 'बिजोलिया किसान आंदोलन' का संबंध बंगाल से था।
4. मोपला विद्रोह (1921) मालाबार क्षेत्र में हुआ था।
उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:

A1 और 2Bकेवल 4C2, 3 और 4Dकेवल 1
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (B)तेभागा आंदोलन (1946-47) बंगाल का बटाईदार आंदोलन था, पंजाब का नहीं; पाबना कृषक संघर्ष बंगाल के पाबना जिले के यूसुफशाही परगना में आरंभ हुआ, दरभंगा में नहीं; तथा बिजोलिया किसान आंदोलन मेवाड़ (राजस्थान) का था, बंगाल का नहीं। केवल कथन 4 सही है — मोपला विद्रोह 1921 में मालाबार (वर्तमान केरल) में हुआ था।

प्र.3 'दक्कन दंगे (1875)' के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ये दंगे मुख्यतः बंगाली तथा तमिल साहूकारों के विरुद्ध भड़के थे।
2. इनका आरंभ पूना जिले के सुपा गाँव से हुआ था।
3. इनकी प्रतिक्रिया में सरकार ने 1879 में दक्कन कृषक राहत अधिनियम पारित किया।
उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:

A1 और 2Bकेवल 3C2 और 3Dकेवल 1
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (C)दक्कन दंगों का रोष मुख्यतः गुजराती तथा मारवाड़ी साहूकारों के विरुद्ध था, बंगाली या तमिल साहूकारों के विरुद्ध नहीं; अतः कथन 1 गलत है। इनका आरंभ मई 1875 में पूना जिले के सुपा गाँव से हुआ और ये अहमदनगर तक फैले; तथा इनके पश्चात सरकार ने दक्कन कृषक राहत अधिनियम, 1879 पारित किया — अतः कथन 2 और 3 सही हैं।

13. सम्पूर्ण कालक्रम — एक दृष्टि में

तालिका 27 : आधुनिक भारत का कालक्रम (1498–1947)
वर्षघटना
1498वास्को द गामा कालीकट पहुँचा
1510अल्बुकर्क द्वारा गोवा पर अधिकार
1600अंग्रेजी ईस्ट इंडिया कंपनी का चार्टर
1602डच ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना
1613सूरत में अंग्रेजी कारखाना
1639मद्रास — फोर्ट सेंट जॉर्ज
1664फ्रांसीसी ईस्ट इंडिया कंपनी (कॉलबर्ट)
1674पांडिचेरी की स्थापना (फ्रांस्वा मार्टिन)
1690जॉब चारनॉक — कलकत्ता की नींव
1717फर्रुखसियर का फ़रमान — 'कंपनी का मैग्ना कार्टा'
1746–48 / 1749–54 / 1756–63प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय कर्नाटक युद्ध
1757प्लासी का युद्ध (23 जून)
1760वांडीवाश का युद्ध (आयर कूट बनाम लाली)
1764बक्सर का युद्ध (22 अक्टूबर)
1765इलाहाबाद की संधियाँ; दीवानी; द्वैध शासन का आरंभ
1770बंगाल का महा-अकाल
1772वारेन हेस्टिंग्स — द्वैध शासन की समाप्ति
1773रेगुलेटिंग एक्ट; बनारस की प्रथम संधि
1774कलकत्ता में सर्वोच्च न्यायालय; रुहेला युद्ध
1775फ़ैज़ाबाद की संधि — बनारस एवं गाज़ीपुर कंपनी को; प्रथम आंग्ल-मराठा युद्ध आरंभ
1780बंगाल गजट — भारत का प्रथम समाचार-पत्र
1781संशोधक अधिनियम; कलकत्ता मदरसा; चेतसिंह प्रकरण
1782सालबाई की संधि
1784पिट्स इंडिया एक्ट; मंगलौर की संधि; एशियाटिक सोसाइटी (1784)
1791बनारस संस्कृत कॉलेज (जोनाथन डंकन)
1792श्रीरंगपट्टनम की संधि
1793स्थायी बंदोबस्त; चार्टर एक्ट; कॉर्नवालिस कोड
1795बनारस प्रांत में स्थायी बंदोबस्त
1798वेलेज़ली — हैदराबाद के साथ प्रथम सहायक संधि
1799चतुर्थ आंग्ल-मैसूर युद्ध; टीपू की मृत्यु; प्रेस सेंसरशिप अधिनियम
1800फोर्ट विलियम कॉलेज
1801अवध पर सहायक संधि; रुहेलखंड एवं दोआब कंपनी को
1802बसीन की संधि
1813चार्टर एक्ट — व्यापारिक एकाधिकार समाप्त; शिक्षा हेतु ₹1 लाख
1815आत्मीय सभा
1817हिंदू कॉलेज, कलकत्ता; तृतीय आंग्ल-मराठा युद्ध आरंभ
1818पेशवा पद की समाप्ति; बाजीराव द्वितीय बिठूर भेजे गए
1822 / 1833महालवाड़ी — रेगुलेशन VII (मैकेंज़ी) एवं रेगुलेशन IX (बर्ड)
1824–26प्रथम आंग्ल-बर्मा युद्ध; यंडबू की संधि (1826)
1828ब्रह्म समाज की स्थापना
1829सती प्रथा पर रोक (बेंटिंक)
1831–32 / 1855–56कोल विद्रोह / संथाल विद्रोह
1833चार्टर एक्ट — भारत का गवर्नर-जनरल; कंपनी का व्यापार समाप्त
1835मैकाले मिनट एवं अंग्रेजी शिक्षा; मेटकाफ़ प्रेस एक्ट; एकसमान रुपया
1843सिंध का विलय; दास प्रथा उन्मूलन (Act V)
1845–46 / 1848–49प्रथम एवं द्वितीय आंग्ल-सिख युद्ध; 1849 — पंजाब का विलय
1849बेथ्यून स्कूल; सतारा का विलय (1848)
1851रहनुमाई मज़दयासनन सभा
1852द्वितीय आंग्ल-बर्मा युद्ध — पेगू का विलय
1853प्रथम रेल (बंबई–ठाणे, 16 अप्रैल); चार्टर एक्ट; झाँसी का विलय
1854वुड डिस्पैच; प्रथम सूती मिल (बंबई); नागपुर का विलय (1854)
1855प्रथम जूट मिल (रिसड़ा); सहारनपुर नियम
1856अवध का विलय; विधवा पुनर्विवाह अधिनियम; सामान्य सेवा भर्ती अधिनियम
1857विद्रोह — 29 मार्च बैरकपुर, 10 मई मेरठ, 11 मई दिल्ली; तीन विश्वविद्यालय (कलकत्ता, बंबई, मद्रास)
1858भारत शासन अधिनियम; 1 नवंबर — इलाहाबाद में महारानी की घोषणा
1859पील आयोग; नील विद्रोह; इलाहाबाद–कानपुर रेल; 8 जुलाई 1859 — शांति की घोषणा
1860–61भारतीय दंड संहिता लागू; पुलिस अधिनियम 1861; भारतीय परिषद अधिनियम 1861; उच्च न्यायालय अधिनियम 1861
1866देवबंद दारुल उलूम; आगरा में उच्च न्यायालय; उड़ीसा का अकाल एवं कैंपबेल आयोग
1867प्रार्थना समाज; प्रेस एवं पुस्तक पंजीकरण अधिनियम; कविवचन सुधा
1869उच्च न्यायालय का इलाहाबाद स्थानांतरण
1873सत्यशोधक समाज; सिंह सभा (अमृतसर); पाबना विद्रोह आरंभ
1875आर्य समाज (बंबई); थियोसोफिकल सोसाइटी (न्यूयॉर्क); मदरसतुल उलूम, अलीगढ़; दक्कन दंगे (1875)
1878वर्नाक्युलर प्रेस एक्ट एवं भारतीय शस्त्र अधिनियम (लिटन)
1880 / 1882स्ट्रेची अकाल आयोग / हंटर शिक्षा आयोग, स्थानीय स्वशासन प्रस्ताव, वर्नाक्युलर प्रेस एक्ट का निरसन
1883प्रथम अकाल संहिता; इल्बर्ट बिल विवाद
1885बंगाल काश्तकारी अधिनियम
1886–87एचिसन आयोग; डी.ए.वी. लाहौर (1886); इलाहाबाद विश्वविद्यालय (1887)
1891सहमति की आयु अधिनियम
1892भारतीय परिषद अधिनियम — अप्रत्यक्ष निर्वाचन का सिद्धांत
1893नागरी प्रचारिणी सभा (काशी); विवेकानंद का शिकागो भाषण
1897 / 1901लायल / मैकडॉनेल अकाल आयोग; रामकृष्ण मिशन (1897)
1898सेंट्रल हिंदू कॉलेज (बनारस); नदवा का दारुल उलूम (लखनऊ)
1899–1900मुंडा उलगुलान (बिरसा मुंडा)
1902–04फ्रेज़र पुलिस आयोग; रैले आयोग; भारतीय विश्वविद्यालय अधिनियम (1904); गुरुकुल कांगड़ी (1902)
1903 / 1916 / 1925एस.एन.डी.पी. योगम / जस्टिस पार्टी / आत्म-सम्मान आंदोलन
1909मॉर्ले–मिंटो सुधार — पृथक निर्वाचक मंडल
1916 / 1920काशी हिंदू विश्वविद्यालय / अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय एवं लखनऊ विश्वविद्यालय
1917–19सैडलर आयोग
1919भारत शासन अधिनियम — प्रांतों में द्वैध शासन
1923 / 1926विभेदकारी संरक्षण की नीति / लोक सेवा आयोग (1 अक्टूबर 1926)
1929हर्टाग समिति; शारदा अधिनियम
1935भारत शासन अधिनियम; भारतीय रिज़र्व बैंक (1 अप्रैल 1935)
1937प्रांतीय स्वायत्तता लागू; संघीय न्यायालय; बर्मा भारत से पृथक
1947भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम — 15 अगस्त 1947
अंतिम पुनरावृत्ति — 'प्रथम' की सूची
स्वयं जाँच — इस खंड से 3 प्रश्न

प्र.1 'भारत शासन अधिनियम, 1935' के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
1. इसने प्रांतों में द्वैध शासन समाप्त कर प्रांतीय स्वायत्तता प्रदान की।
2. इसी अधिनियम के अंतर्गत 1937 में दिल्ली में संघीय न्यायालय (Federal Court) की स्थापना हुई।
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:

Aकेवल 2Bन तो 1 और न ही 2C1 और 2 दोनोंDकेवल 1
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (C)1935 के अधिनियम ने प्रांतों से द्वैध शासन हटाकर प्रांतीय स्वायत्तता दी और प्रांतों में उत्तरदायी शासन की व्यवस्था की; कथन 1 सही है। इसी अधिनियम के प्रावधान के अंतर्गत 1937 में दिल्ली में संघीय न्यायालय स्थापित हुआ, जो केंद्र-प्रांत तथा प्रांतों के आपसी विवादों का निपटारा करता था; कथन 2 भी सही है।

प्र.2 नीचे दो कथन दिए गए हैं, जिनमें से एक को अभिकथन (A) तथा दूसरे को कारण (R) कहा गया है।
अभिकथन (A): 1878 के वर्नाक्युलर प्रेस एक्ट को 'मुँह बंद करने वाला अधिनियम' (Gagging Act) कहा गया।
कारण (R): इस अधिनियम ने अंग्रेजी तथा देशी भाषाओं के समाचार-पत्रों पर समान प्रतिबंध लगाए थे।
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:

A(A) और (R) दोनों सही हैं, किन्तु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं करता हैB(A) गलत है, किन्तु (R) सही हैC(A) सही है, किन्तु (R) गलत हैD(A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या करता है
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (C)लॉर्ड लिटन द्वारा लाए गए 1878 के वर्नाक्युलर प्रेस एक्ट को उसके कठोर प्रावधानों के कारण 'गैगिंग एक्ट' कहा गया; अतः (A) सही है। किन्तु यह अधिनियम केवल देशी भाषाओं के पत्रों पर लागू था, अंग्रेजी भाषा के समाचार-पत्रों को इससे छूट प्राप्त थी — यही इसका भेदभावपूर्ण चरित्र था; अतः (R) गलत है।

प्र.3 निम्नलिखित में से कौन-सा/से युग्म सही सुमेलित नहीं है/हैं?
   (उपाय)    (वायसराय)
1. वर्नाक्युलर प्रेस एक्ट, 1878 — लॉर्ड रिपन
2. इल्बर्ट बिल विवाद — लॉर्ड रिपन
3. भारतीय विश्वविद्यालय अधिनियम, 1904 — लॉर्ड कर्जन
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:

A1 और 2Bकेवल 3C2 और 3Dकेवल 1
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (D)वर्नाक्युलर प्रेस एक्ट 1878 में लॉर्ड लिटन ने पारित कराया था; रिपन ने तो इसे निरस्त किया। अतः युग्म 1 सुमेलित नहीं है। इल्बर्ट बिल विवाद (1883) रिपन के काल की घटना है और भारतीय विश्वविद्यालय अधिनियम, 1904 कर्जन की देन है — ये दोनों युग्म सही हैं।