भाग 4 · भारतीय राजव्यवस्था एवं शासन

4.6 स्थानीय शासन, निर्वाचन एवं संवैधानिक निकाय

पंचायती राज एवं नगरीय शासन (भाग IX एवं IXक), निर्वाचन आयोग एवं निर्वाचन सुधार, तथा संविधान द्वारा एवं विधि द्वारा स्थापित निकायों का पूरा ढाँचा

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विषय-सूची

  1. पंचायती राज का विकास — समितियों की शृंखला
  2. 73वाँ संविधान संशोधन — भाग IX एवं ग्यारहवीं अनुसूची
  3. पेसा अधिनियम, 1996 — अनुसूचित क्षेत्रों में पंचायती राज
  4. 74वाँ संविधान संशोधन — भाग IXक एवं बारहवीं अनुसूची
  5. भारत निर्वाचन आयोग — अनुच्छेद 324
  6. निर्वाचन सुधार — जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, निरर्हताएँ, NOTA, VVPAT
  7. संघ एवं राज्य लोक सेवा आयोग — अनुच्छेद 315 से 323
  8. नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक — अनुच्छेद 148 से 151
  9. महान्यायवादी (अनु. 76) एवं महाधिवक्ता (अनु. 165)
  10. वित्त आयोग — अनुच्छेद 280 एवं राज्य वित्त आयोग
  11. अन्य संवैधानिक निकाय — अनुच्छेद 338, 338क, 338ख, 350ख
  12. प्रमुख वैधानिक एवं अर्ध-न्यायिक निकाय
  13. लोक नीति एवं अधिकार-मुद्दे — RTI, RTE, सेवा का अधिकार, ई-गवर्नेंस
  14. एक दृष्टि में — अनुच्छेद-सूची, कालक्रम एवं निर्णायक तथ्य
इस अध्याय का परीक्षा-भार बहुत उच्च

2025 के मूल प्रश्नपत्र में राजव्यवस्था एवं शासन से लगभग 19–20 प्रश्न आए। इस अध्याय का हिस्सा इसमें असामान्य रूप से बड़ा रहता है, क्योंकि यहाँ वह सब कुछ है जिसे परीक्षा सूची सुमेलन में ढाल सकती है — निकाय ↔ अनुच्छेद, संशोधन ↔ अनुसूची, समिति ↔ वर्ष, पद ↔ नियुक्तिकर्ता, निकाय ↔ संवैधानिक/वैधानिक। UPPSC की तीन पसंदीदा चालें यहाँ बार-बार दिखती हैं: (क) 73वें और 74वें संशोधन के आँकड़े आपस में बदल देना (29 बनाम 18, भाग IX बनाम IXक); (ख) “राज्य निर्वाचन आयोग” और “भारत निर्वाचन आयोग” को एक मान लेना; (ग) नीति आयोग, सीबीआई या लोकपाल को “संवैधानिक निकाय” बताकर विकल्प में रख देना। इसीलिए यहाँ हर खंड के अंत में सुमेलन-तालिका है और अंत में पूरी अनुच्छेद-सूची, कालक्रम तथा संवैधानिक/वैधानिक की अलग सूची दी गई है।

इस अध्याय की सीमा

केंद्र-राज्य वित्तीय संबंध, कर-विभाजन तथा जीएसटी परिषद अध्याय 4.3 में हैं — यहाँ वित्त आयोग का केवल संस्थागत पक्ष (अनुच्छेद 280, संरचना, कार्य, नवीनतम स्थिति) है। संसदीय समितियों का ढाँचा, जिसमें लोक लेखा समिति की पूरी संरचना आती है, अध्याय 4.4 में है — यहाँ केवल नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक से उसका संबंध बताया गया है। न्यायपालिका, अधिकरण तथा न्यायिक पुनर्विलोकन अध्याय 4.5 में हैं; मौलिक अधिकार एवं नीति-निदेशक तत्व अध्याय 4.2 में। उत्तर प्रदेश के अपने निकाय, आयोग एवं योजनाएँ भाग 8 में विस्तार से हैं — इस अध्याय में UP केवल राष्ट्रीय ढाँचे के उदाहरण के रूप में आता है।

1. पंचायती राज का विकास — समितियों की शृंखला

1.1 संविधान में पंचायत क्यों नहीं थी

मूल संविधान (1950) में स्थानीय स्वशासन के लिए कोई विस्तृत उपबंध नहीं था। पंचायतों का उल्लेख केवल अनुच्छेद 40 में था — एक नीति-निदेशक तत्व, जो राज्य से कहता है कि वह ग्राम पंचायतों का संगठन करे और उन्हें ऐसी शक्तियाँ एवं प्राधिकार दे जो उन्हें स्वशासन की इकाइयों के रूप में कार्य करने के लिए आवश्यक हों। साथ ही स्थानीय स्वशासन राज्य सूची की प्रविष्टि 5 का विषय है।

संविधान सभा में इस पर गहरा मतभेद था। महात्मा गांधी के “ग्राम स्वराज” के विचार के विपरीत डॉ. भीमराव अंबेडकर (B.R. Ambedkar) ने गाँव को “संकीर्णता की खोह, अज्ञान, संकुचित मानसिकता एवं सांप्रदायिकता का अड्डा” कहा था। परिणाम एक समझौता हुआ — पंचायत संविधान में आई, पर केवल एक अप्रवर्तनीय निदेश के रूप में। इसी कमज़ोर आधार ने आगे चार दशक तक की वह यात्रा तय की जो 1992 के 73वें संशोधन पर जाकर पूरी हुई।

स्वतंत्रता के बाद पहला बड़ा प्रयास सामुदायिक विकास कार्यक्रम (Community Development Programme) था, जो 2 अक्टूबर 1952 को आरंभ हुआ, और उसका विस्तार राष्ट्रीय प्रसार सेवा (National Extension Service), 2 अक्टूबर 1953। दोनों असफल रहे, क्योंकि इनमें जन-सहभागिता नहीं थी — ये अधिकारी-संचालित कार्यक्रम बनकर रह गए। इसी विफलता की जाँच से पंचायती राज की पूरी कहानी शुरू होती है।

1.2 बलवंत राय मेहता समिति (1957) — “लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण”

भारत सरकार ने जनवरी 1957 में बलवंत राय जी. मेहता (Balwant Rai G. Mehta) की अध्यक्षता में समिति नियुक्त की, जिसका काम सामुदायिक विकास कार्यक्रम एवं राष्ट्रीय प्रसार सेवा के कार्य की जाँच करना तथा उन्हें अधिक प्रभावी बनाने के उपाय सुझाना था। समिति ने नवंबर 1957 में प्रतिवेदन दिया और “लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण (Democratic Decentralisation)” की योजना रखी — यही आगे पंचायती राज कहलाई।

राष्ट्रीय विकास परिषद (NDC) ने इन सिफ़ारिशों को जनवरी 1958 में स्वीकार किया, पर कोई एक ढाँचा थोपा नहीं — राज्यों को अपनी परिस्थिति के अनुसार रूप चुनने की छूट दी गई। यही कारण है कि आगे चलकर राज्यों में ढाँचे भिन्न-भिन्न रहे (राजस्थान — त्रिस्तरीय, तमिलनाडु — द्विस्तरीय, पश्चिम बंगाल — चतुःस्तरीय)।

परीक्षा-दृष्टि — पहला राज्य कौन

पंचायती राज सर्वप्रथम राजस्थान में लागू हुआ — 2 अक्टूबर 1959 को नागौर (Nagaur) जिले में, उद्घाटन जवाहरलाल नेहरू ने किया। दूसरा राज्य आंध्र प्रदेश था — 1 नवंबर 1959। यह युग्म (राजस्थान–नागौर–1959) UPPSC में बहु-पूछित है; ध्यान रहे कि आंध्र प्रदेश को “पहला” बताना सबसे आम फंदा है।

1.3 अशोक मेहता समिति (1977–78) — द्विस्तरीय प्रतिमान

1960 के दशक के मध्य से पंचायती राज क्षीण होने लगा — निर्वाचन टलते रहे, वित्त सूखता रहा, अधिकारी हावी होते गए। जनता सरकार ने दिसंबर 1977 में अशोक मेहता (Ashok Mehta) की अध्यक्षता में समिति बनाई, जिसने अगस्त 1978 में 132 सिफ़ारिशों वाला प्रतिवेदन दिया।

केंद्र में जनता सरकार गिर जाने के कारण इन सिफ़ारिशों पर केंद्रीय स्तर पर कार्रवाई नहीं हुई, पर कर्नाटक, आंध्र प्रदेश एवं पश्चिम बंगाल ने इनके आधार पर अपने कानून बनाए — पश्चिम बंगाल में 1978 से नियमित पंचायत चुनाव इसी दौर की देन हैं।

1.4 जी.वी.के. राव समिति (1985) — “जड़ों के बिना घास”

योजना आयोग ने 1985 में जी.वी.के. राव (G.V.K. Rao) की अध्यक्षता में “ग्रामीण विकास एवं गरीबी उन्मूलन कार्यक्रमों के लिए विद्यमान प्रशासनिक व्यवस्थाओं की समीक्षा समिति” बनाई। समिति का सबसे उद्धृत वाक्य यही है कि नौकरशाही के बढ़ते वर्चस्व से पंचायती राज संस्थाएँ कमज़ोर होकर “जड़ों के बिना घास (grass without roots)” बन गई हैं।

1.5 एल.एम. सिंघवी समिति (1986) — संवैधानिक मान्यता का प्रस्ताव

राजीव गांधी सरकार ने 1986 में लक्ष्मी मल्ल सिंघवी (L.M. Singhvi) की अध्यक्षता में “लोकतंत्र एवं विकास के लिए पंचायती राज संस्थाओं के पुनरुज्जीवन संबंधी समिति” बनाई। यही वह समिति है जिसने पहली बार स्पष्ट रूप से कहा कि पंचायती राज को संविधान में ही मान्यता दी जाए — इसके लिए संविधान में एक नया अध्याय जोड़ा जाए।

1.6 थुंगन एवं गाडगिल समितियाँ (1988) तथा 64वाँ–65वाँ विधेयक

पी.के. थुंगन समिति (P.K. Thungon, 1988) — संसदीय परामर्शदात्री समिति की उप-समिति — ने कहा कि पंचायती राज संस्थाओं को संविधान में मान्यता मिले, त्रिस्तरीय ढाँचा हो, 5 वर्ष का निश्चित कार्यकाल हो, जिला परिषद योजना एवं विकास की धुरी बने, तथा अनुसूचित जाति/जनजाति एवं महिलाओं के लिए आरक्षण हो।

वी.एन. गाडगिल समिति (V.N. Gadgil, 1988) ने और आगे जाकर उन प्रश्नों के उत्तर दिए जो वास्तव में 73वें संशोधन का ढाँचा बने — पंचायतों को संवैधानिक दर्जा, त्रिस्तरीय व्यवस्था, 5 वर्ष का कार्यकाल, प्रत्यक्ष निर्वाचन, अनुसूचित जाति/जनजाति एवं महिलाओं के लिए आरक्षण, तथा वित्त के लिए राज्य वित्त आयोग

गाडगिल समिति की सिफ़ारिशों के आधार पर राजीव गांधी सरकार जुलाई 1989 में 64वाँ संविधान संशोधन विधेयक (पंचायती राज) लोक सभा में लाई। लोक सभा ने उसे पारित कर दिया, किंतु राज्य सभा ने अक्टूबर 1989 में उसे गिरा दिया — विपक्ष का तर्क था कि यह संघीय ढाँचे में केंद्रीकरण बढ़ाएगा। इसी के साथ नगरीय निकायों के लिए लाया गया 65वाँ संविधान संशोधन विधेयक (नगरपालिका विधेयक) भी राज्य सभा में गिर गया।

वी.पी. सिंह सरकार ने 1990 में संयुक्त विधेयक लाने का प्रयास किया, पर सरकार गिर गई। अंततः पी.वी. नरसिम्हा राव सरकार ने सितंबर 1991 में संशोधित रूप में दो विधेयक प्रस्तुत किए — 72वाँ विधेयक (पंचायत) एवं 73वाँ विधेयक (नगरपालिका) — जो दिसंबर 1992 में पारित होकर क्रमशः 73वाँ एवं 74वाँ संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 बने।

सावधानी — विधेयक-संख्या और अधिनियम-संख्या अलग हैं
1952 · 1953सामुदायिक विकास कार्यक्रम (2 अक्टूबर 1952) एवं राष्ट्रीय प्रसार सेवा (2 अक्टूबर 1953) — जन-सहभागिता के अभाव में असफल
1957बलवंत राय मेहता समिति — “लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण”; त्रिस्तरीय; पंचायत समिति कार्यपालक, जिला परिषद परामर्शदात्री; कलेक्टर अध्यक्ष
1959राजस्थान (नागौर, 2 अक्टूबर) पंचायती राज लागू करने वाला पहला राज्य; आंध्र प्रदेश दूसरा (1 नवंबर)
1977–78अशोक मेहता समितिद्विस्तरीय (जिला परिषद + मंडल पंचायत); दलीय भागीदारी; 132 सिफ़ारिशें
1985जी.वी.के. राव समिति — “जड़ों के बिना घास”; जिला परिषद केंद्रीय इकाई; जिला विकास आयुक्त का पद
1986एल.एम. सिंघवी समितिसंवैधानिक मान्यता का प्रस्ताव; ग्राम सभा = प्रत्यक्ष लोकतंत्र; न्याय पंचायत
1988थुंगन समिति एवं गाडगिल समिति — संवैधानिक दर्जा, त्रिस्तरीय, 5 वर्ष, आरक्षण, राज्य वित्त आयोग
198964वाँ (पंचायत) एवं 65वाँ (नगरपालिका) विधेयक — लोक सभा में पारित, राज्य सभा में असफल
1992 · 199373वाँ एवं 74वाँ संविधान संशोधन पारित (दिसंबर 1992) → प्रवृत्त 24 अप्रैल 1993 एवं 1 जून 1993
चार प्रमुख समितियाँ — कालक्रम में “बलवान अशोक, राव सिंघवी”

बलवान = बलवंत राय मेहता (1957) → अशोक = अशोक मेहता (1977–78) → राव = जी.वी.के. राव (1985) → सिंघवी = एल.एम. सिंघवी (1986)। इसके बाद 1988 की जोड़ी थुंगन + गाडगिल याद रखें — “ठग” (थुंगन–गाडगिल) ने ही 73वें संशोधन का खाका खींचा।

सुमेलन-तालिका 1 : समिति ↔ वर्ष ↔ निर्णायक सिफ़ारिश
समितिवर्षजिस एक बात से पहचानी जाती है
बलवंत राय मेहता1957त्रिस्तरीय पंचायती राज; “लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण”; कलेक्टर जिला परिषद का अध्यक्ष
अशोक मेहता1977 (गठन) · 1978 (प्रतिवेदन)द्विस्तरीय — जिला परिषद + मंडल पंचायत; राजनीतिक दलों की भागीदारी
जी.वी.के. राव1985जड़ों के बिना घास”; जिला विकास आयुक्त का पद
एल.एम. सिंघवी1986संवैधानिक मान्यता; ग्राम सभा को प्रत्यक्ष लोकतंत्र का आधार
पी.के. थुंगन1988संवैधानिक दर्जा + जिला परिषद को नियोजन की धुरी
वी.एन. गाडगिल1988राज्य वित्त आयोग एवं 5-वर्षीय कार्यकाल का सुझाव — 73वें संशोधन का सीधा पूर्वज
प्रथम प्रशासनिक सुधार आयोग (मोरारजी देसाई, फिर के. हनुमंतैया)1966–70केंद्र में लोकपाल एवं राज्यों में लोकायुक्त की सिफ़ारिश; प्रशासनिक विकेंद्रीकरण का समर्थन
स्वयं जाँच — इस खंड से 3 प्रश्न

प्र.1 सूची-I को सूची-II से सुमेलित कीजिए तथा सूचियों के नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए।
   सूची-I (समिति)    सूची-II (प्रमुख सिफ़ारिश)
A. बलवंत राय मेहता   1. पंचायती राज को संवैधानिक मान्यता
B. अशोक मेहता   2. त्रिस्तरीय लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण
C. जी.वी.के. राव   3. द्विस्तरीय ढाँचा — जिला परिषद एवं मंडल पंचायत
D. एल.एम. सिंघवी   4. जिला विकास आयुक्त का पद
कूट:

AA-2, B-3, C-1, D-4BA-3, B-2, C-4, D-1CA-2, B-3, C-4, D-1DA-3, B-2, C-1, D-4
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (C)बलवंत राय मेहता (1957) — त्रिस्तरीय लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण; अशोक मेहता (1978) — द्विस्तरीय जिला परिषद एवं मंडल पंचायत; जी.वी.के. राव (1985) — जिला विकास आयुक्त का पद; एल.एम. सिंघवी (1986) — संवैधानिक मान्यता। अतः A-2, B-3, C-4, D-1 सही है।

प्र.2 निम्नलिखित घटनाओं को सही कालक्रमानुसार व्यवस्थित कीजिए।
1. राजस्थान में पंचायती राज का उद्घाटन
2. अशोक मेहता समिति का प्रतिवेदन
3. 64वाँ संविधान संशोधन विधेयक का राज्य सभा में गिरना
4. एल.एम. सिंघवी समिति का गठन
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:

A1, 2, 4, 3B2, 1, 3, 4C2, 1, 4, 3D1, 2, 3, 4
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (A)राजस्थान में उद्घाटन 2 अक्टूबर 1959; अशोक मेहता समिति का प्रतिवेदन अगस्त 1978; एल.एम. सिंघवी समिति 1986; 64वाँ संशोधन विधेयक अक्टूबर 1989 में राज्य सभा में गिरा। अतः क्रम 1, 2, 4, 3 है।

प्र.3 नीचे दो कथन दिए गए हैं, जिनमें से एक को अभिकथन (A) तथा दूसरे को कारण (R) कहा गया है।
अभिकथन (A): मूल संविधान में पंचायतों के लिए कोई विस्तृत उपबंध नहीं था।
कारण (R): मूल संविधान में स्थानीय स्वशासन को सातवीं अनुसूची की समवर्ती सूची में रखा गया था।
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:

A(A) और (R) दोनों सही हैं, किन्तु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं करता हैB(A) गलत है, किन्तु (R) सही हैC(A) सही है, किन्तु (R) गलत हैD(A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या करता है
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (C)मूल संविधान में पंचायतों का केवल एक अप्रवर्तनीय निदेश (अनुच्छेद 40) था — (A) सही है। किंतु स्थानीय स्वशासन राज्य सूची की प्रविष्टि 5 का विषय है, समवर्ती सूची का नहीं — अतः (R) गलत है।

2. 73वाँ संविधान संशोधन — भाग IX एवं ग्यारहवीं अनुसूची

2.1 संशोधन का ढाँचा — एक वाक्य में

73वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 ने संविधान में एक नया भाग IX — “पंचायतें” जोड़ा, जिसमें अनुच्छेद 243 से 243ण तक (अंग्रेज़ी क्रम में 243 से 243-O) कुल 16 अनुच्छेद हैं, तथा एक नई ग्यारहवीं अनुसूची जोड़ी जिसमें पंचायतों के 29 विषय हैं। इसे राष्ट्रपति की अनुमति 20 अप्रैल 1993 को मिली और यह 24 अप्रैल 1993 से प्रवृत्त हुआ — इसी कारण 24 अप्रैल को राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस मनाया जाता है। इस संशोधन ने अनुच्छेद 40 के अप्रवर्तनीय निदेश को प्रवर्तनीय संवैधानिक ढाँचे में बदल दिया।

2.2 अनुच्छेदवार विवरण — 243 से 243ण

UPPSC में इस भाग से सर्वाधिक प्रश्न अनुच्छेद ↔ विषय के सुमेलन में आते हैं। इसीलिए पूरी सूची एक साथ दी जा रही है।

सुमेलन-तालिका 2 : भाग IX के अनुच्छेद ↔ विषय (हिंदी एवं अंग्रेज़ी दोनों क्रम में)
हिंदीअंग्रेज़ीविषयनिर्णायक बिंदु
243243परिभाषाएँ“जिला”, “ग्राम सभा”, “मध्यवर्ती स्तर”, “पंचायत”, “पंचायत क्षेत्र”, “जनसंख्या”
243क243Aग्राम सभाग्राम स्तर पर ऐसी शक्तियों का प्रयोग करेगी जो राज्य विधानमंडल विधि द्वारा उपबंधित करे — शक्तियाँ संविधान ने नहीं गिनाईं
243ख243Bपंचायतों का गठनत्रिस्तरीय अनिवार्य; किंतु 20 लाख से अनधिक जनसंख्या वाले राज्य में मध्यवर्ती स्तर न बनाना अनुज्ञेय
243ग243Cसंरचनासभी स्थान प्रत्यक्ष निर्वाचन से भरे जाएँगे; मध्यवर्ती एवं जिला स्तर के अध्यक्ष निर्वाचित सदस्यों द्वारा उन्हीं में से चुने जाएँगे; ग्राम स्तर के अध्यक्ष की रीति राज्य तय करेगा
243घ243Dस्थानों का आरक्षणअजा/अजजा — जनसंख्या के अनुपात में; महिलाओं के लिए कुल स्थानों का कम-से-कम 1/3 (अजा/अजजा के आरक्षित स्थानों के भीतर भी 1/3); अध्यक्ष-पदों पर भी यही; पिछड़े वर्गों का आरक्षण राज्य के विवेक पर
243ङ243Eअवधि5 वर्ष; पूर्व-विघटन पर 6 माह के भीतर निर्वाचन; पुनर्गठित पंचायत केवल शेष अवधि के लिए; यदि शेष अवधि 6 माह से कम है तो निर्वाचन आवश्यक नहीं
243च243Fनिरर्हताएँराज्य विधानमंडल के लिए लागू निरर्हताएँ; किंतु आयु 21 वर्ष — 25 से कम होने के आधार पर निरर्हित नहीं
243छ243Gशक्तियाँ, प्राधिकार एवं उत्तरदायित्वग्यारहवीं अनुसूची के 29 विषय; “स्वशासन की संस्था” बनने के लिए आर्थिक विकास एवं सामाजिक न्याय की योजनाएँ
243ज243Hकर अधिरोपित करने की शक्ति एवं निधियाँराज्य विधानमंडल प्राधिकृत कर सकता है — पंचायत को कर-शक्ति संविधान से सीधे नहीं मिलती
243झ243Iराज्य वित्त आयोगराज्यपाल द्वारा प्रत्येक 5वें वर्ष गठित; पंचायतों की वित्तीय स्थिति की समीक्षा; प्रतिवेदन राज्य विधानमंडल के समक्ष कृत-कार्रवाई ज्ञापन सहित
243ञ243Jलेखाओं की संपरीक्षाराज्य विधानमंडल विधि द्वारा उपबंध करेगा
243ट243Kराज्य निर्वाचन आयोगराज्य निर्वाचन आयुक्त की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा; हटाया केवल उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की रीति एवं आधार पर; सेवा-शर्तें नियुक्ति के बाद अलाभकारी रूप से नहीं बदली जा सकतीं
243ठ243Lसंघ राज्यक्षेत्रों को लागू होनाराष्ट्रपति निदेश द्वारा अपवाद/उपांतरण कर सकते हैं
243ड243Mकतिपय क्षेत्रों को लागू न होनानागालैंड, मेघालय, मिज़ोरम; मणिपुर के जिला परिषद वाले पहाड़ी क्षेत्र; पाँचवीं अनुसूची के अनुसूचित क्षेत्र एवं छठी अनुसूची के जनजातीय क्षेत्र; दार्जिलिंग गोरखा पर्वतीय परिषद क्षेत्र (जिला पंचायत के संबंध में)
243ढ243Nविद्यमान विधियों का बना रहनाअसंगत विधियाँ 1 वर्ष (अर्थात् 24 अप्रैल 1994) तक प्रवृत्त रहीं
243ण243-Oन्यायालयों के हस्तक्षेप का वर्जनपरिसीमन/स्थान-आवंटन विधि की वैधता न्यायालय में प्रश्नगत नहीं; निर्वाचन को केवल निर्वाचन याचिका से चुनौती
भाग IX के दो सबसे पूछे जाने वाले अनुच्छेद “झ = झोली (वित्त), ट = टिकट (चुनाव)”

243झराज्य वित्त आयोग (झोली = धन); 243टराज्य निर्वाचन आयोग (टिकट = चुनाव)। नगरपालिकाओं में यही जोड़ी 243म (वित्त आयोग) एवं 243यक (निर्वाचन) बन जाती है। और याद रखें — 243घ = आरक्षण (घ से “घर में एक-तिहाई महिलाएँ”)।

2.3 ग्यारहवीं अनुसूची — 29 विषय

ग्यारहवीं अनुसूची अनुच्छेद 243छ से संबंधित है और इसमें वे विषय हैं जो राज्य विधानमंडल पंचायतों को सौंप सकता है। ध्यान दें — यह सौंपना स्वैच्छिक है; संविधान ने ये विषय स्वतः पंचायतों को नहीं दिए।

परीक्षा-दृष्टि — सूची के दोनों सिरे याद रखें

ग्यारहवीं अनुसूची का प्रश्न प्रायः सूची के पहले और अंतिम विषय पर आता है — पहला: कृषि (कृषि प्रसार सहित), अंतिम (29वाँ): सामुदायिक आस्तियों का अनुरक्षण। इसी प्रकार बारहवीं अनुसूची का पहला: नगरीय योजना (नगर योजना सहित) और अंतिम (18वाँ): वधशालाओं एवं चर्मशोधनशालाओं का विनियमन। दूसरा पसंदीदा फंदा यह है कि अग्निशमन सेवाएँ (Fire Services) या झुग्गी-झोपड़ी सुधार को ग्यारहवीं अनुसूची में बता दिया जाए — ये दोनों बारहवीं अनुसूची के विषय हैं।

2.4 अनिवार्य बनाम स्वैच्छिक उपबंध — यह तालिका अलग से याद करें

73वाँ संशोधन सब कुछ बाध्यकारी नहीं करता। कुछ उपबंध राज्य पर बाध्यकारी (compulsory) हैं, कुछ केवल विवेकाधीन/स्वैच्छिक (voluntary)। यही भेद UPPSC का प्रिय दो-कथन प्रश्न है।

अनिवार्य उपबंध · Compulsory

  • ग्राम स्तर पर ग्राम सभा का गठन
  • ग्राम, मध्यवर्ती एवं जिला — तीनों स्तरों पर पंचायतों का गठन (20 लाख से कम जनसंख्या वाले राज्य में मध्यवर्ती स्तर छूट सकता है)
  • तीनों स्तरों पर सभी स्थानों का प्रत्यक्ष निर्वाचन
  • मध्यवर्ती एवं जिला स्तर के अध्यक्षों का अप्रत्यक्ष निर्वाचन
  • चुनाव लड़ने की न्यूनतम आयु 21 वर्ष
  • अजा/अजजा का जनसंख्यानुपाती आरक्षण तथा महिलाओं के लिए 1/3 आरक्षण — स्थानों एवं अध्यक्ष-पदों दोनों पर
  • 5 वर्ष का कार्यकाल; विघटन पर 6 माह में चुनाव
  • राज्य निर्वाचन आयोग (243ट) की स्थापना
  • राज्य वित्त आयोग (243झ) का प्रत्येक 5वें वर्ष गठन
  • निर्वाचन मामलों में न्यायालयीय हस्तक्षेप का वर्जन

स्वैच्छिक उपबंध · Voluntary

  • पंचायतों में सांसदों एवं विधायकों को प्रतिनिधित्व देना
  • पिछड़े वर्गों के लिए स्थानों एवं अध्यक्ष-पदों का आरक्षण
  • पंचायतों को स्वशासन की संस्था के रूप में कार्य करने योग्य शक्तियाँ एवं प्राधिकार देना
  • ग्यारहवीं अनुसूची के 29 विषयों में योजना-निर्माण एवं क्रियान्वयन सौंपना
  • पंचायतों को कर, शुल्क, पथकर एवं फ़ीस उद्ग्रहीत करने का प्राधिकार देना
  • राज्य की संचित निधि से पंचायतों को सहायता अनुदान देना
  • ग्राम पंचायत के अध्यक्ष के निर्वाचन की रीति तय करना
  • ग्राम सभा को कौन-सी शक्तियाँ मिलेंगी — यह भी राज्य तय करता है
सावधानी — 73वें संशोधन के चार सूक्ष्म बिंदु
सावधानी — राज्य निर्वाचन आयोग बनाम भारत निर्वाचन आयोग
आधारभारत निर्वाचन आयोगराज्य निर्वाचन आयोग
अनुच्छेद324243ट (पंचायत) एवं 243यक (नगरपालिका)
कार्यक्षेत्रसंसद, राज्य विधानमंडल, राष्ट्रपति एवं उपराष्ट्रपति के निर्वाचनपंचायतों एवं नगरपालिकाओं के निर्वाचन
नियुक्तिराष्ट्रपति (2023 के अधिनियम के अधीन चयन समिति की सिफ़ारिश पर)राज्यपाल
हटाया जानामुख्य निर्वाचन आयुक्त — उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश की रीति सेराज्य निर्वाचन आयुक्त — उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की रीति एवं आधार पर
संरचनाबहु-सदस्यीय (वर्तमान में मु.नि.आ. + 2 निर्वाचन आयुक्त)सामान्यतः एक-सदस्यीय — “राज्य निर्वाचन आयुक्त”
निर्वाचक नामावलीस्वयं तैयार कराता हैप्रायः भारत निर्वाचन आयोग की नामावली को आधार बनाकर अपनी नामावली बनाता है

यह वही भेद है जिस पर UPPSC बार-बार लौटता है। “ग्राम प्रधान का चुनाव भारत निर्वाचन आयोग कराता है” — यह कथन सदैव गलत है।

उत्तर प्रदेश संदर्भ — देश की सर्वाधिक ग्राम पंचायतें
स्वयं जाँच — इस खंड से 3 प्रश्न

प्र.1 निम्नलिखित में से कौन-सा/से युग्म सही सुमेलित नहीं है/हैं?
   (अनुच्छेद)    (विषय)
1. अनुच्छेद 243क — ग्राम सभा
2. अनुच्छेद 243झ — राज्य निर्वाचन आयोग
3. अनुच्छेद 243घ — स्थानों का आरक्षण
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:

A1 और 2Bकेवल 2C2 और 3Dकेवल 1
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (B)अनुच्छेद 243झ राज्य वित्त आयोग से संबंधित है, राज्य निर्वाचन आयोग से नहीं — राज्य निर्वाचन आयोग अनुच्छेद 243ट में है। अतः युग्म 2 सुमेलित नहीं है। 243क (ग्राम सभा) एवं 243घ (स्थानों का आरक्षण) सही हैं।

प्र.2 73वें संविधान संशोधन के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
1. पंचायतों में पिछड़े वर्गों के लिए स्थानों का आरक्षण संविधान द्वारा अनिवार्य किया गया है।
2. किसी राज्य में मध्यवर्ती स्तर पर पंचायत का गठन तब आवश्यक नहीं है जब उस राज्य की जनसंख्या 20 लाख से अधिक न हो।
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:

Aकेवल 2Bन तो 1 और न ही 2C1 और 2 दोनोंDकेवल 1
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (A)पिछड़े वर्गों का आरक्षण अनुच्छेद 243घ(6) के अधीन राज्य विधानमंडल के विवेक पर है, अनिवार्य नहीं — कथन 1 गलत है। अनुच्छेद 243ख के परंतुक के अनुसार 20 लाख से अनधिक जनसंख्या वाले राज्य में मध्यवर्ती स्तर की पंचायत का गठन आवश्यक नहीं — कथन 2 सही है।

प्र.3 नीचे दो कथन दिए गए हैं, जिनमें से एक को अभिकथन (A) तथा दूसरे को कारण (R) कहा गया है।
अभिकथन (A): ग्राम पंचायत का चुनाव भारत निर्वाचन आयोग नहीं कराता।
कारण (R): अनुच्छेद 324 के अधीन भारत निर्वाचन आयोग केवल राष्ट्रपति एवं उपराष्ट्रपति के पद के निर्वाचन कराता है।
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:

A(A) और (R) दोनों सही हैं, किन्तु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं करता हैB(A) गलत है, किन्तु (R) सही हैC(A) सही है, किन्तु (R) गलत हैD(A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या करता है
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (C)पंचायत निर्वाचन अनुच्छेद 243ट के अधीन राज्य निर्वाचन आयोग के अधिकार में है — (A) सही है। किंतु (R) गलत है: अनुच्छेद 324 में संसद तथा राज्य विधानमंडलों के निर्वाचन भी सम्मिलित हैं, केवल राष्ट्रपति-उपराष्ट्रपति के नहीं।

3. पेसा अधिनियम, 1996 — अनुसूचित क्षेत्रों में पंचायती राज

3.1 पेसा क्यों आवश्यक हुआ

अनुच्छेद 243ड के अनुसार भाग IX पाँचवीं अनुसूची के अनुसूचित क्षेत्रों तथा छठी अनुसूची के जनजातीय क्षेत्रों पर स्वतः लागू नहीं होता। किंतु उसी अनुच्छेद के खंड (4)(ख) में कहा गया कि संसद विधि द्वारा भाग IX के उपबंधों को इन क्षेत्रों तक अपवादों एवं उपांतरणों सहित विस्तारित कर सकती है। इसी शक्ति के अधीन बना पंचायत उपबंध (अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार) अधिनियम, 1996 — संक्षेप में पेसा (PESA — Panchayats Extension to Scheduled Areas Act), जो 24 दिसंबर 1996 को अधिनियमित हुआ।

इसका आधार दिलीप सिंह भूरिया समिति (Dilip Singh Bhuria Committee, 1994–95) का प्रतिवेदन था, जिसे विशेष रूप से यह देखने के लिए बनाया गया था कि जनजातीय क्षेत्रों में पंचायती राज को परंपरागत स्वशासन के साथ कैसे जोड़ा जाए।

3.2 ग्राम सभा की विशेष शक्तियाँ — पेसा का हृदय

सामान्य भाग IX में ग्राम सभा की शक्तियाँ राज्य विधानमंडल तय करता है। पेसा इसे उलट देता है — यहाँ ग्राम सभा को स्वयं अधिनियम से कुछ शक्तियाँ मिलती हैं, और राज्य विधान इनके विरुद्ध नहीं जा सकता।

सावधानी — पेसा के तीन आँकड़े

क्रियान्वयन की दृष्टि से पेसा का इतिहास मिला-जुला रहा है — नियम बनाने में राज्यों ने बहुत देर की। मध्य प्रदेश ने 15 नवंबर 2022 (जनजातीय गौरव दिवस) को अपने पेसा नियम अधिसूचित किए, जो इस दिशा में सबसे चर्चित कदम रहा। अनेक राज्यों में खनन एवं भूमि-अर्जन से जुड़े विवादों में न्यायालयों ने ग्राम सभा की सहमति की उपेक्षा को अवैध ठहराया है — इसी शृंखला का एक प्रसिद्ध उदाहरण ओडिशा के नियमगिरि (वेदांता) मामले में 2013 का उच्चतम न्यायालय का निर्णय है, जिसमें ग्राम सभाओं को धार्मिक एवं सांस्कृतिक दावों पर निर्णय करने का अधिकार दिया गया।

स्वयं जाँच — इस खंड से 3 प्रश्न

प्र.1 पेसा अधिनियम, 1996 के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
1. यह संविधान की छठी अनुसूची के जनजातीय क्षेत्रों पर भी लागू होता है।
2. अनुसूचित क्षेत्रों में पंचायतों के सभी स्तरों पर अध्यक्ष के पद अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षित हैं।
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:

Aकेवल 2Bन तो 1 और न ही 2C1 और 2 दोनोंDकेवल 1
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (A)पेसा केवल पाँचवीं अनुसूची के अनुसूचित क्षेत्रों पर लागू होता है, छठी अनुसूची के क्षेत्रों पर नहीं — कथन 1 गलत। पेसा के अधीन सभी स्तरों के अध्यक्ष-पद अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षित हैं — कथन 2 सही।

प्र.2 निम्नलिखित में से कौन-सा युग्म सही सुमेलित नहीं है?

Aपेसा का आधार — भूरिया समितिBपेसा का अधिनियमन वर्ष — 1996Cपेसा का संवैधानिक आधार — अनुच्छेद 243डDपेसा में अजजा आरक्षण — जनसंख्या के ठीक अनुपात में
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (D)पेसा में अनुसूचित जनजातियों का आरक्षण जनसंख्या के अनुपात में तो होता है, पर वह कुल स्थानों के आधे से कम नहीं हो सकता — अतः “ठीक अनुपात में” कहना गलत है। शेष तीनों युग्म सही हैं।

प्र.3 पेसा के अधीन ग्राम सभा की शक्तियों पर विचार कीजिए:
1. गौण खनिजों के खनन पट्टे के लिए पूर्व-सिफ़ारिश
2. गौण वन उपज का स्वामित्व
3. अनुसूचित जनजातियों को साहूकारी पर नियंत्रण
इनमें से कौन-से सही हैं? नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:

A1 और 2Bकेवल 3C1, 2 और 3Dकेवल 1
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (C)पेसा की धारा 4 में तीनों शक्तियाँ स्पष्ट रूप से दी गई हैं — गौण खनिजों के लिए पूर्व-सिफ़ारिश, गौण वन उपज का स्वामित्व तथा अनुसूचित जनजातियों को दिए जाने वाले ऋण/साहूकारी पर नियंत्रण।

4. 74वाँ संविधान संशोधन — भाग IXक एवं बारहवीं अनुसूची

4.1 ढाँचा एवं तिथियाँ

74वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 ने संविधान में भाग IXक — “नगरपालिकाएँ” जोड़ा, जिसमें अनुच्छेद 243त से 243यछ (अंग्रेज़ी में 243P से 243ZG) तक कुल 18 अनुच्छेद हैं, तथा बारहवीं अनुसूची जोड़ी जिसमें नगरपालिकाओं के 18 विषय हैं। यह 1 जून 1993 से प्रवृत्त हुआ। इसे नगरपालिका अधिनियम (Nagarpalika Act) भी कहा जाता है।

सावधानी — भाग IXक का अंतिम अनुच्छेद

भाग IXक 243त से 243यछ तक है — 243यग तक नहीं। कोष्ठक में मिलान इस प्रकार है: 243त = 243P, 243थ = Q, 243द = R, 243ध = S, 243न = T, 243प = U, 243फ = V, 243ब = W, 243भ = X, 243म = Y, 243य = Z, 243यक = ZA, 243यख = ZB, 243यग = ZC, 243यघ = ZD, 243यङ = ZE, 243यच = ZF, 243यछ = ZG। परीक्षा में “भाग IXक 243त से 243यग तक है” — यह एक बहुत आम, और गलत, विकल्प है।

4.2 नगरीय निकायों के तीन संवैधानिक प्रकार — अनुच्छेद 243थ

अनुच्छेद 243थ (243Q) प्रत्येक राज्य में तीन प्रकार की नगरपालिकाओं का गठन अनिवार्य करता है। किस क्षेत्र में कौन-सी बनेगी, यह राज्यपाल लोक अधिसूचना द्वारा तय करते हैं — और आधार होते हैं: जनसंख्या, जनसंख्या-घनत्व, स्थानीय प्रशासन के लिए उत्पन्न राजस्व, गैर-कृषि क्रियाकलापों में नियोजन का प्रतिशत, आर्थिक महत्व तथा अन्य निर्धारित कारक।

सावधानी — छावनी परिषद संवैधानिक नगरपालिका नहीं है

छावनी परिषद (Cantonment Board) भाग IXक से नहीं, छावनी अधिनियम, 2006 से चलती है और रक्षा मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण में है। इसका पदेन अध्यक्ष स्टेशन कमांडर होता है और मुख्य कार्यपालक अधिकारी की नियुक्ति केंद्र सरकार करती है। इसी प्रकार अधिसूचित क्षेत्र समिति पूर्णतः नामनिर्देशित होती है — इसे “निर्वाचित नगरीय निकाय” बताना गलत है। उत्तर प्रदेश में मेरठ, आगरा, कानपुर, झाँसी, इलाहाबाद (प्रयागराज), लखनऊ, वाराणसी, बरेली, फ़तेहगढ़, फ़ैज़ाबाद, मथुरा, शाहजहाँपुर एवं बबीना जैसी छावनियाँ हैं — देश में सर्वाधिक छावनी परिषदें UP में ही हैं।

4.3 अनुच्छेदवार विवरण — 243त से 243यछ

सुमेलन-तालिका 3 : भाग IXक के अनुच्छेद ↔ विषय
हिंदीअंग्रेज़ीविषयनिर्णायक बिंदु
243त243Pपरिभाषाएँ“महानगर क्षेत्र” = 10 लाख या अधिक जनसंख्या; “नगरपालिका क्षेत्र”; “जिला”; “समिति”
243थ243Qनगरपालिकाओं का गठनतीन प्रकार; औद्योगिक नगरी का अपवाद राज्यपाल दे सकते हैं
243द243Rसंरचनासभी स्थान प्रत्यक्ष निर्वाचन से; राज्य विधानमंडल विशेष ज्ञान रखने वालों को प्रतिनिधित्व दे सकता है — किंतु उन्हें मत देने का अधिकार नहीं; सांसद/विधायक तथा वार्ड समितियों के अध्यक्ष भी प्रतिनिधित्व पा सकते हैं
243ध243Sवार्ड समितियाँ3 लाख या अधिक जनसंख्या वाली नगरपालिका में एक या अधिक वार्डों के लिए वार्ड समिति अनिवार्य
243न243Tस्थानों का आरक्षणअजा/अजजा जनसंख्यानुपात में; महिलाओं के लिए 1/3; पिछड़े वर्ग राज्य के विवेक पर; अध्यक्ष-पदों पर आरक्षण राज्य विधि से
243प243Uअवधि5 वर्ष; विघटन पर 6 माह में चुनाव; शेष अवधि वाला नियम पंचायत जैसा
243फ243Vनिरर्हताएँआयु 21 वर्ष
243ब243Wशक्तियाँ एवं उत्तरदायित्वबारहवीं अनुसूची के 18 विषय
243भ243Xकर-शक्ति एवं निधियाँराज्य विधानमंडल प्राधिकृत करे
243म243Yवित्त आयोगवही राज्य वित्त आयोग जो अनु. 243झ के अधीन गठित है, नगरपालिकाओं की भी समीक्षा करेगा — अलग आयोग नहीं
243य243Zलेखाओं की संपरीक्षाराज्य विधानमंडल विधि द्वारा
243यक243ZAनिर्वाचनवही राज्य निर्वाचन आयोग (243ट)
243यख243ZBसंघ राज्यक्षेत्रों को लागू होनाराष्ट्रपति निदेश द्वारा
243यग243ZCकतिपय क्षेत्रों को लागू न होनाअनुसूचित एवं जनजातीय क्षेत्र; दार्जिलिंग गोरखा पर्वतीय परिषद
243यघ243ZDजिला योजना समितिप्रत्येक राज्य में जिला स्तर पर; पंचायतों एवं नगरपालिकाओं की योजनाओं का समेकन; सदस्यों का कम-से-कम 4/5 भाग जिला पंचायत एवं नगरपालिकाओं के निर्वाचित सदस्यों द्वारा उन्हीं में से चुना जाए, ग्रामीण-नगरीय जनसंख्या के अनुपात में
243यङ243ZEमहानगर योजना समिति10 लाख या अधिक जनसंख्या वाले महानगर क्षेत्र में; सदस्यों का कम-से-कम 2/3 भाग नगरपालिकाओं के निर्वाचित सदस्यों एवं पंचायतों के अध्यक्षों द्वारा उन्हीं में से, जनसंख्यानुपात में
243यच243ZFविद्यमान विधियों का बना रहना1 वर्ष (1 जून 1994) तक
243यछ243ZGन्यायालयों के हस्तक्षेप का वर्जनपंचायत वाले 243ण के समान

4.4 बारहवीं अनुसूची — 18 विषय

4.5 73वाँ बनाम 74वाँ संशोधन — हस्ताक्षर-तुलना

73वाँ संशोधन, 1992 · पंचायतें

  • नया भाग — भाग IX, शीर्षक “पंचायतें”
  • अनुच्छेद — 243 से 243ण (243 – 243-O), कुल 16
  • अनुसूची — ग्यारहवीं, 29 विषय, अनुच्छेद 243छ से संबद्ध
  • प्रवृत्त — 24 अप्रैल 1993 (राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस)
  • ढाँचा — तीन स्तर: ग्राम, मध्यवर्ती, जिला
  • जन-निकाय — ग्राम सभा (अनु. 243क)
  • वित्त आयोग — 243झ; निर्वाचन आयोग — 243ट
  • छूट — 20 लाख से कम जनसंख्या वाले राज्य में मध्यवर्ती स्तर नहीं
  • न्यायालय-वर्जन — 243ण
  • विस्तार-विधि — पेसा, 1996 (अनुसूचित क्षेत्रों हेतु)

74वाँ संशोधन, 1992 · नगरपालिकाएँ

  • नया भाग — भाग IXक, शीर्षक “नगरपालिकाएँ”
  • अनुच्छेद — 243त से 243यछ (243P – 243ZG), कुल 18
  • अनुसूची — बारहवीं, 18 विषय, अनुच्छेद 243ब से संबद्ध
  • प्रवृत्त — 1 जून 1993
  • ढाँचा — तीन प्रकार: नगर पंचायत, नगर पालिका परिषद, नगर निगम
  • जन-निकाय — वार्ड समिति (अनु. 243ध), 3 लाख+ जनसंख्या पर अनिवार्य
  • वित्त आयोग — 243म (वही राज्य वित्त आयोग); निर्वाचन — 243यक (वही राज्य निर्वाचन आयोग)
  • छूट — औद्योगिक नगरी में नगरपालिका न बनाना
  • न्यायालय-वर्जन — 243यछ
  • विशेष निकाय — जिला योजना समिति (243यघ) एवं महानगर योजना समिति (243यङ)
29 बनाम 18 — कौन-सी अनुसूची किसकी “ग्यारह गाँव उनतीस, बारह शहर अठारह”

ग्यारहवीं अनुसूची = गाँव (पंचायत) = 29 विषय = 73वाँ संशोधन = भाग IX। बारहवीं अनुसूची = शहर (नगरपालिका) = 18 विषय = 74वाँ संशोधन = भाग IXक। जोड़कर देखें — 29 + 18 = 47, और दोनों भागों के अनुच्छेद 16 + 18 = 34। सरल सूत्र: “गिनती बड़ी, संख्या छोटी” — अनुसूची जितनी बड़ी (12वीं), विषय उतने कम (18)।

4.6 जिला एवं महानगर योजना समिति — दोनों का भेद

सुमेलन-तालिका 4 : जिला योजना समिति (243यघ) बनाम महानगर योजना समिति (243यङ)
आधारजिला योजना समितिमहानगर योजना समिति
अनुच्छेद243यघ (243ZD)243यङ (243ZE)
कहाँप्रत्येक राज्य के प्रत्येक जिले में10 लाख या अधिक जनसंख्या वाले प्रत्येक महानगर क्षेत्र में
निर्वाचित अंशकम-से-कम 4/5कम-से-कम 2/3
कौन चुनता हैजिला पंचायत एवं जिले की नगरपालिकाओं के निर्वाचित सदस्य, अपने में से — ग्रामीण एवं नगरीय जनसंख्या के अनुपात मेंमहानगर क्षेत्र की नगरपालिकाओं के निर्वाचित सदस्य एवं पंचायतों के अध्यक्ष, अपने में से — जनसंख्या के अनुपात में
कार्यपंचायतों एवं नगरपालिकाओं की योजनाओं का समेकन कर जिले के लिए प्रारूप विकास योजना बनानामहानगर क्षेत्र के लिए प्रारूप विकास योजना तैयार करना
योजना कहाँ जाती हैसमिति का अध्यक्ष उसे राज्य सरकार को अग्रेषित करता हैवही — अध्यक्ष द्वारा राज्य सरकार को
उत्तर प्रदेश संदर्भ — देश के सर्वाधिक नगरीय निकाय
स्वयं जाँच — इस खंड से 3 प्रश्न

प्र.1 सूची-I को सूची-II से सुमेलित कीजिए तथा सूचियों के नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए।
   सूची-I (विषय)    सूची-II (अनुच्छेद)
A. वार्ड समितियों का गठन   1. 243यङ
B. जिला योजना समिति   2. 243ध
C. महानगर योजना समिति   3. 243थ
D. नगरपालिकाओं का गठन   4. 243यघ
कूट:

AA-2, B-4, C-3, D-1BA-2, B-4, C-1, D-3CA-4, B-2, C-3, D-1DA-4, B-2, C-1, D-3
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (B)वार्ड समिति — 243ध; जिला योजना समिति — 243यघ; महानगर योजना समिति — 243यङ; नगरपालिकाओं का गठन — 243थ। अतः A-2, B-4, C-1, D-3 सही है।

प्र.2 74वें संविधान संशोधन के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
1. वार्ड समिति का गठन तीन लाख या उससे अधिक जनसंख्या वाली नगरपालिका में अनिवार्य है।
2. महानगर योजना समिति के कम-से-कम चार-पाँचवें सदस्य निर्वाचित सदस्यों द्वारा चुने जाते हैं।
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:

Aकेवल 2Bन तो 1 और न ही 2C1 और 2 दोनोंDकेवल 1
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (D)अनुच्छेद 243ध के अधीन 3 लाख या अधिक जनसंख्या पर वार्ड समिति अनिवार्य है — कथन 1 सही। महानगर योजना समिति में यह अनुपात दो-तिहाई है; चार-पाँचवाँ अनुपात जिला योजना समिति (243यघ) का है — कथन 2 गलत।

प्र.3 नीचे दो कथन दिए गए हैं, जिनमें से एक को अभिकथन (A) तथा दूसरे को कारण (R) कहा गया है।
अभिकथन (A): छावनी परिषद 74वें संविधान संशोधन के अंतर्गत गठित नगरपालिका नहीं है।
कारण (R): छावनी परिषद छावनी अधिनियम के अधीन गठित होती है और केंद्रीय रक्षा मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण में रहती है।
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:

A(A) और (R) दोनों सही हैं, किन्तु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं करता हैB(A) गलत है, किन्तु (R) सही हैC(A) सही है, किन्तु (R) गलत हैD(A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या करता है
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (D)अनुच्छेद 243थ केवल नगर पंचायत, नगर पालिका परिषद एवं नगर निगम की बात करता है। छावनी परिषद छावनी अधिनियम, 2006 के अधीन रक्षा मंत्रालय के नियंत्रण में कार्य करती है — यही कारण है कि वह भाग IXक की नगरपालिका नहीं है।

5. भारत निर्वाचन आयोग — अनुच्छेद 324

5.1 अनुच्छेद 324 — शक्ति का स्रोत

अनुच्छेद 324(1) कहता है कि संसद तथा प्रत्येक राज्य के विधानमंडल के लिए सभी निर्वाचनों के तथा राष्ट्रपति एवं उपराष्ट्रपति के पद के निर्वाचनों के लिए निर्वाचक नामावलियाँ तैयार कराने का तथा उन सभी निर्वाचनों के संचालन का अधीक्षण, निदेशन एवं नियंत्रण निर्वाचन आयोग में निहित होगा। यही एक वाक्य आयोग की सारी शक्ति का स्रोत है — और इसी में उसकी सीमा भी है।

सावधानी — निर्वाचन आयोग क्या नहीं कराता

अनुच्छेद 324 में पंचायत एवं नगरपालिका के निर्वाचन शामिल नहीं हैं — वे राज्य निर्वाचन आयोग (अनु. 243ट/243यक) के अधिकार में हैं। इसी प्रकार भारत निर्वाचन आयोग राज्य सभा एवं विधान परिषद के निर्वाचन कराता है (ये “संसद” एवं “राज्य के विधानमंडल” में आते हैं), किंतु राजनीतिक दलों के आंतरिक चुनाव या सहकारी समितियों/विश्वविद्यालयों के चुनाव नहीं। “राष्ट्रपति के निर्वाचन संबंधी विवाद” का निपटारा भी आयोग नहीं, बल्कि उच्चतम न्यायालय (अनुच्छेद 71) करता है।

5.2 संरचना — एक से तीन तक का सफ़र

अनुच्छेद 324(2) के अनुसार आयोग में मुख्य निर्वाचन आयुक्त तथा उतने अन्य निर्वाचन आयुक्त होंगे जितने राष्ट्रपति समय-समय पर नियत करें — अर्थात् संख्या संविधान में निश्चित नहीं है। व्यवहार में यह इस प्रकार बदली:

25 जनवरी 1950निर्वाचन आयोग की स्थापना — इसी कारण 25 जनवरी को राष्ट्रीय मतदाता दिवस (2011 से) मनाया जाता है। प्रथम मुख्य निर्वाचन आयुक्त — सुकुमार सेन
1950 – अक्टूबर 1989एकल-सदस्यीय आयोग
16 अक्टूबर 1989मतदान आयु 21 से 18 होने पर बढ़े कार्यभार के कारण दो निर्वाचन आयुक्त नियुक्त — आयोग तीन-सदस्यीय
1 जनवरी 1990दोनों पद समाप्त — आयोग फिर एकल-सदस्यीय
1 अक्टूबर 1993पुनः दो निर्वाचन आयुक्त — तब से आयोग बहु-सदस्यीय है और निर्णय बहुमत से होते हैं
1995टी.एन. शेषन बनाम भारत संघ — उच्चतम न्यायालय ने बहु-सदस्यीय आयोग को वैध ठहराया; मु.नि.आ. को अन्य आयुक्तों पर “श्रेष्ठ” नहीं, समकक्षों में प्रथम माना

आयोग की सहायता के लिए राष्ट्रपति, निर्वाचन आयोग से परामर्श कर प्रादेशिक आयुक्त (Regional Commissioners) भी नियुक्त कर सकते हैं (अनु. 324(4))। राज्य स्तर पर आयोग का प्रतिनिधि मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) होता है, जिसकी नियुक्ति आयोग राज्य सरकार से परामर्श कर करता है; जिला स्तर पर जिला निर्वाचन अधिकारी (प्रायः जिलाधिकारी) तथा निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ERO) एवं रिटर्निंग अधिकारी कार्य करते हैं — ये सब जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950/1951 के पद हैं।

5.3 नियुक्ति — 2023 के अधिनियम के बाद की स्थिति

मूल संविधान में मुख्य निर्वाचन आयुक्त एवं निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा होनी थी, “संसद द्वारा बनाई गई किसी विधि के उपबंधों के अधीन रहते हुए” — किंतु सात दशक तक ऐसी कोई विधि बनी ही नहीं और नियुक्ति व्यवहार में मंत्रिपरिषद की सलाह पर होती रही।

अनूप बरनवाल बनाम भारत संघ (2 मार्च 2023) में उच्चतम न्यायालय की पाँच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने एकमत से कहा कि जब तक संसद विधि न बनाए, नियुक्ति प्रधानमंत्री, लोक सभा में विपक्ष के नेता तथा भारत के मुख्य न्यायमूर्ति की समिति की सलाह पर होगी। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि यह व्यवस्था केवल विधायी रिक्तता भरने के लिए है।

संसद ने उसी वर्ष मुख्य निर्वाचन आयुक्त तथा अन्य निर्वाचन आयुक्त (नियुक्ति, सेवा शर्तें एवं पदावधि) अधिनियम, 2023 बनाया — राष्ट्रपति की अनुमति 28 दिसंबर 2023, प्रवृत्त 2 जनवरी 2024। इसने 1991 के पुराने अधिनियम का स्थान लिया और मुख्य न्यायमूर्ति के स्थान पर एक केंद्रीय कैबिनेट मंत्री को चयन समिति में रखा।

1. खोज समितिअध्यक्ष — विधि एवं न्याय मंत्री; दो अन्य सदस्य भारत सरकार के सचिव से अनिम्न रैंक के। यह पाँच नामों का पैनल तैयार करती है
2. चयन समितिप्रधानमंत्री (अध्यक्ष) · प्रधानमंत्री द्वारा नामनिर्देशित एक केंद्रीय कैबिनेट मंत्री · लोक सभा में विपक्ष का नेता (या सबसे बड़े विपक्षी दल का नेता)। समिति पैनल से बाहर का नाम भी विचार में ले सकती है
3. नियुक्तिराष्ट्रपति द्वारा। अर्हता — वे व्यक्ति जो भारत सरकार में सचिव के समकक्ष पद पर हैं या रह चुके हैं, तथा सत्यनिष्ठा एवं निर्वाचन-प्रबंधन का अनुभव रखते हों

5.4 हटाया जाना एवं स्वतंत्रता के उपबंध

सुमेलन-तालिका 5 : निर्वाचन आयोग की स्वतंत्रता के संवैधानिक सुरक्षा-कवच
उपबंधमुख्य निर्वाचन आयुक्तअन्य निर्वाचन आयुक्त एवं प्रादेशिक आयुक्त
हटाया जानाउच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश की रीति एवं आधार पर — अर्थात् संसद के दोनों सदनों के विशेष बहुमत से पारित समावेदन पर, सिद्ध कदाचार या असमर्थता के आधार पर, राष्ट्रपति द्वारामुख्य निर्वाचन आयुक्त की सिफ़ारिश पर राष्ट्रपति द्वारा — यही उन्हें मु.नि.आ. से कम सुरक्षित बनाता है
सेवा-शर्तेंनियुक्ति के बाद अलाभकारी रूप से परिवर्तित नहीं की जा सकतींवही संरक्षण
पदत्यागराष्ट्रपति कोराष्ट्रपति को
सावधानी — तीन बार-दोहराए जाने वाले भ्रम

5.5 शक्तियाँ एवं कार्य — तीन वर्गों में

5.6 आदर्श आचार संहिता (Model Code of Conduct)

आदर्श आचार संहिता किसी विधि में नहीं है — यह राजनीतिक दलों की सहमति से विकसित एक गैर-सांविधिक दस्तावेज़ है, जिसका पालन आयोग अनुच्छेद 324 की व्यापक शक्ति के बल पर कराता है। इसकी शुरुआत केरल में 1960 के विधानसभा चुनाव के समय बनी एक स्थानीय आचार-संहिता से मानी जाती है; आयोग ने इसे 1968 से देशव्यापी रूप दिया और 1991 में वर्तमान सुदृढ़ रूप मिला।

उत्तर प्रदेश संदर्भ — सबसे बड़ा निर्वाचन-क्षेत्र
स्वयं जाँच — इस खंड से 3 प्रश्न

प्र.1 भारत निर्वाचन आयोग के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
1. संविधान में निर्वाचन आयुक्तों की संख्या निश्चित की गई है।
2. निर्वाचन आयुक्त को राष्ट्रपति, मुख्य निर्वाचन आयुक्त की सिफ़ारिश पर ही हटा सकते हैं।
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:

Aकेवल 2Bन तो 1 और न ही 2C1 और 2 दोनोंDकेवल 1
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (A)अनुच्छेद 324(2) के अनुसार अन्य निर्वाचन आयुक्तों की संख्या राष्ट्रपति समय-समय पर नियत करते हैं — संविधान में निश्चित नहीं — कथन 1 गलत। अनुच्छेद 324(5) के परंतुक के अनुसार निर्वाचन आयुक्त एवं प्रादेशिक आयुक्त मुख्य निर्वाचन आयुक्त की सिफ़ारिश पर ही हटाए जा सकते हैं — कथन 2 सही।

प्र.2 मुख्य निर्वाचन आयुक्त तथा अन्य निर्वाचन आयुक्त (नियुक्ति, सेवा शर्तें एवं पदावधि) अधिनियम, 2023 के अनुसार चयन समिति में निम्नलिखित में से कौन सम्मिलित नहीं है?

Aप्रधानमंत्रीBभारत के मुख्य न्यायमूर्तिCलोक सभा में विपक्ष का नेताDप्रधानमंत्री द्वारा नामनिर्देशित एक केंद्रीय कैबिनेट मंत्री
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (B)2023 के अधिनियम ने अनूप बरनवाल (2023) की अंतरिम व्यवस्था में सम्मिलित मुख्य न्यायमूर्ति के स्थान पर प्रधानमंत्री द्वारा नामनिर्देशित एक केंद्रीय कैबिनेट मंत्री को रखा। शेष तीनों चयन समिति के सदस्य हैं।

प्र.3 आदर्श आचार संहिता के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
1. यह जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 में सम्मिलित एक सांविधिक संहिता है।
2. यह निर्वाचन कार्यक्रम की घोषणा के दिन से प्रभावी हो जाती है।
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:

Aकेवल 2Bन तो 1 और न ही 2C1 और 2 दोनोंDकेवल 1
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (A)आदर्श आचार संहिता किसी विधि में नहीं है — यह दलों की सहमति से विकसित गैर-सांविधिक दस्तावेज़ है जिसे आयोग अनुच्छेद 324 की शक्ति से लागू कराता है; कथन 1 गलत। यह निर्वाचन कार्यक्रम की घोषणा के दिन से लागू होकर परिणाम घोषित होने तक चलती है; कथन 2 सही।

6. निर्वाचन सुधार — जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, निरर्हताएँ, NOTA, VVPAT

6.1 संविधान के निर्वाचन-संबंधी अनुच्छेद

सुमेलन-तालिका 6 : भाग XV — निर्वाचन (अनुच्छेद 324 से 329क)
अनुच्छेदविषयनिर्णायक बिंदु
324निर्वाचन आयोग में निर्वाचनों का निहित होनाअधीक्षण, निदेशन एवं नियंत्रण
325एक ही सामान्य निर्वाचक नामावलीधर्म, मूलवंश, जाति या लिंग के आधार पर किसी को नामावली से बाहर नहीं किया जाएगा — पृथक निर्वाचक-मंडल का अंत
326वयस्क मताधिकारमूलतः 21 वर्ष; 61वें संविधान संशोधन, 1988 द्वारा 18 वर्ष
327संसद की विधि-निर्माण शक्तिसंसद एवं विधानमंडल दोनों के निर्वाचनों के संबंध में — इसी से जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 एवं 1951 बने
328राज्य विधानमंडल की विधि-निर्माण शक्तिकेवल उस राज्य के विधानमंडल के निर्वाचन के संबंध में, और केवल वहाँ जहाँ संसद ने उपबंध न किया हो
329न्यायालयों के हस्तक्षेप का वर्जनपरिसीमन विधि प्रश्नगत नहीं; निर्वाचन को केवल निर्वाचन याचिका से चुनौती
103 एवं 192सदस्यों की निरर्हता का विनिश्चयक्रमशः राष्ट्रपति एवं राज्यपाल, निर्वाचन आयोग की बाध्यकारी सलाह पर
102 एवं 191निरर्हता के आधारलाभ का पद; विकृतचित्त; अनुन्मोचित दिवालिया; अनागरिक; संसद द्वारा बनाई विधि के अधीन निरर्हता; तथा दसवीं अनुसूची के अधीन दल-बदल

6.2 जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 बनाम 1951 — यह भेद अनिवार्य है

दोनों अधिनियम डॉ. बी.आर. अंबेडकर के विधि मंत्री रहते हुए अंतरिम संसद द्वारा पारित हुए, और दोनों का क्षेत्र स्पष्ट रूप से बँटा हुआ है। सूत्र यह है — 1950 = चुनाव से “पहले” का ढाँचा; 1951 = चुनाव के “दौरान एवं बाद” की प्रक्रिया

जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950

  • लोक सभा एवं विधानमंडलों में स्थानों का आवंटन
  • निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन (मूल ढाँचा)
  • मतदाता की अर्हताएँ — कौन मतदाता बन सकता है
  • निर्वाचक नामावली की तैयारी एवं पुनरीक्षण
  • निर्वाचन मशीनरी के पद — मुख्य निर्वाचन अधिकारी, जिला निर्वाचन अधिकारी, निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी
  • राज्य सभा/विधान परिषद के स्थानों को भरने की रीति

जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951

  • निर्वाचनों का वास्तविक संचालन — अधिसूचना, नामनिर्देशन, संवीक्षा, मतदान, मतगणना
  • सदस्यता की अर्हताएँ एवं निरर्हताएँ (धारा 8 आदि)
  • भ्रष्ट आचरण (corrupt practices) एवं निर्वाचन अपराध
  • निर्वाचन विवाद — निर्वाचन याचिका उच्च न्यायालय में
  • राजनीतिक दलों का पंजीकरण — धारा 29क (1989 में जोड़ी गई)
  • व्यय-लेखा — धारा 77; तथा उप-निर्वाचन एवं रिक्तियाँ
सावधानी — 1950/1951 के तीन मानक फंदे

6.3 निरर्हताएँ — संवैधानिक एवं सांविधिक

6.4 NOTA, EVM एवं VVPAT

6.5 निर्वाचन व्यय की सीमा

अभ्यर्थी को जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 77 के अधीन अपने निर्वाचन-व्यय का पृथक एवं सही लेखा रखना होता है; सीमा निर्वाचन संचालन नियम, 1961 के नियम 90 में दी जाती है और निर्वाचन आयोग समय-समय पर उसे संशोधित करता है। जनवरी 2022 में की गई अंतिम बड़ी वृद्धि के बाद वर्तमान सीमाएँ:

सुमेलन-तालिका 7 : अभ्यर्थी की व्यय-सीमा (जनवरी 2022 से)
निर्वाचनबड़े राज्यछोटे राज्य एवं संघ राज्यक्षेत्र
लोक सभा₹95 लाख₹75 लाख
विधान सभा₹40 लाख₹28 लाख
सावधानी — सीमा केवल अभ्यर्थी पर है

राजनीतिक दल के व्यय पर कोई सीमा नहीं है। कंवर लाल गुप्ता बनाम अमरनाथ चावला (1975) में उच्चतम न्यायालय ने दल के व्यय को अभ्यर्थी के खाते में जोड़ा था, किंतु संसद ने उसी वर्ष धारा 77(1) में स्पष्टीकरण 1 जोड़कर उस निर्णय को निष्प्रभावी कर दिया — दल तथा अन्य समर्थकों का व्यय अभ्यर्थी के खाते में नहीं जुड़ता। दल को चुनाव के 75 दिन (लोक सभा) / 45 दिन (विधान सभा) के भीतर आयोग को व्यय-विवरण देना होता है, पर वह सीमा नहीं है। दूसरा फंदा — व्यय-लेखा प्रस्तुत न करने पर निरर्हता 3 वर्ष तक की होती है (धारा 10क)।

6.6 प्रमुख निर्वाचन सुधार एवं समितियाँ

सुमेलन-तालिका 8 : सुधार ↔ वर्ष ↔ प्रभाव
वर्षसुधार/समितिप्रभाव
1975तारकुंडे समिति (जयप्रकाश नारायण की पहल पर)मतदान आयु 18; निर्वाचन आयोग की नियुक्ति के लिए समिति; दलों के लिए आचार-संहिता
198861वाँ संविधान संशोधनमतदान आयु 21 → 18
1989जन प्रतिनिधित्व अधिनियम में संशोधनEVM को विधिक मान्यता (धारा 61क); दलों का पंजीकरण (धारा 29क)
1990दिनेश गोस्वामी समितिनिर्वाचन सुधारों पर सर्वाधिक उद्धृत प्रतिवेदन — राज्य द्वारा आंशिक वित्त-पोषण, अपराधीकरण पर रोक, आयोग की स्वतंत्रता
1993वोहरा समितिराजनीति–अपराध–नौकरशाही के गठजोड़ (criminal-politician nexus) पर
1996व्यापक संशोधनएक व्यक्ति दो से अधिक निर्वाचन क्षेत्रों से नहीं लड़ सकता; मतदान से 48 घंटे पूर्व सार्वजनिक प्रचार पर रोक; प्रस्तावकों की संख्या बढ़ी; मतदान के दिन शराब-बिक्री पर रोक
1998इंद्रजीत गुप्ता समितिचुनावों के राज्य वित्त-पोषण (state funding) की सिफ़ारिश — वस्तु-रूप में एवं मान्यताप्राप्त दलों तक सीमित
1999विधि आयोग की 170वीं रिपोर्टदलों के भीतर लोकतंत्र, व्यय-लेखा-परीक्षा, दल-बदल पर कठोरता
2003संशोधनराज्य सभा चुनाव में खुला मतपत्र (open ballot) तथा अधिवास (domicile) की शर्त समाप्तकुलदीप नैयर बनाम भारत संघ (2006) में वैध ठहराया गया
2010धारा 20कप्रवासी भारतीय मतदाता (overseas electors) का पंजीकरण
2013NOTA · लिली थॉमस · VVPATतीनों एक ही वर्ष — इसी वर्ष कारागार में बंद व्यक्ति के चुनाव लड़ने के अधिकार को संशोधन द्वारा बहाल किया गया
2021निर्वाचन विधि (संशोधन) अधिनियम, 2021निर्वाचक नामावली से आधार का स्वैच्छिक जोड़ना; पंजीकरण के लिए चार अर्हक तिथियाँ (1 जनवरी, 1 अप्रैल, 1 जुलाई, 1 अक्टूबर); सेवा-मतदाता के लिए “पत्नी” के स्थान पर लिंग-निरपेक्ष “पति/पत्नी”
2023106वाँ संविधान संशोधन (नारी शक्ति वंदन अधिनियम)लोक सभा, राज्य विधान सभाओं तथा दिल्ली विधान सभा में महिलाओं के लिए एक-तिहाई स्थान — नए अनुच्छेद 330क, 332क, 334क तथा 239कक में संशोधन; जनगणना एवं परिसीमन के बाद प्रभावी; 15 वर्ष की अवधि
2024निर्वाचन बॉण्ड योजना15 फ़रवरी 2024 को उच्चतम न्यायालय की पाँच-सदस्यीय संविधान पीठ ने योजना को असंवैधानिक घोषित किया — अनुच्छेद 19(1)(क) के अधीन मतदाता के जानने के अधिकार का उल्लंघन
परीक्षा-दृष्टि — “एक राष्ट्र, एक चुनाव”

लोक सभा एवं राज्य विधान सभाओं के एक साथ चुनाव के प्रश्न पर पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता वाली उच्च स्तरीय समिति ने मार्च 2024 में प्रतिवेदन दिया, और इसके आधार पर दिसंबर 2024 में संविधान (129वाँ संशोधन) विधेयक तथा संघ राज्यक्षेत्र विधियों का संशोधन विधेयक लोक सभा में प्रस्तुत कर संयुक्त संसदीय समिति को भेजे गए। परीक्षा के लिए याद रखें — यह अभी विधेयक है, अधिनियम नहीं; और 1951–1967 तक भारत में चुनाव वस्तुतः एक साथ ही होते थे।

स्वयं जाँच — इस खंड से 3 प्रश्न

प्र.1 सूची-I को सूची-II से सुमेलित कीजिए तथा सूचियों के नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए।
   सूची-I (विषय)    सूची-II (उपबंध)
A. राजनीतिक दलों का पंजीकरण   1. जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950
B. निर्वाचक नामावली की तैयारी   2. जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 29क
C. वयस्क मताधिकार   3. अनुच्छेद 324
D. निर्वाचनों का अधीक्षण एवं नियंत्रण   4. अनुच्छेद 326
कूट:

AA-2, B-1, C-3, D-4BA-1, B-2, C-4, D-3CA-2, B-1, C-4, D-3DA-1, B-2, C-3, D-4
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (C)दलों का पंजीकरण — 1951 की धारा 29क; निर्वाचक नामावली की तैयारी — 1950 का अधिनियम; वयस्क मताधिकार — अनुच्छेद 326; निर्वाचनों का अधीक्षण — अनुच्छेद 324। अतः A-2, B-1, C-4, D-3 सही है।

प्र.2 निम्नलिखित को सही कालक्रमानुसार व्यवस्थित कीजिए।
1. मतदान आयु घटाकर 18 वर्ष करना
2. VVPAT का प्रथम प्रयोग
3. राज्य सभा निर्वाचन में खुले मतपत्र की व्यवस्था
4. निर्वाचन बॉण्ड योजना का असंवैधानिक घोषित होना
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:

A1, 3, 4, 2B1, 3, 2, 4C3, 1, 4, 2D3, 1, 2, 4
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (B)61वाँ संशोधन 1988 (मतदान आयु 18); राज्य सभा में खुला मतपत्र 2003; VVPAT का प्रथम प्रयोग सितंबर 2013 (नोकसेन, नागालैंड); निर्वाचन बॉण्ड 15 फ़रवरी 2024 को असंवैधानिक। अतः क्रम 1, 3, 2, 4 है।

प्र.3 नीचे दो कथन दिए गए हैं, जिनमें से एक को अभिकथन (A) तथा दूसरे को कारण (R) कहा गया है।
अभिकथन (A): NOTA को किसी निर्वाचन क्षेत्र में सर्वाधिक मत मिल जाने पर भी वह निर्वाचन रद्द नहीं होता।
कारण (R): NOTA मतदाता को अस्वीकृति व्यक्त करने का विकल्प देता है, किंतु उसे “अस्वीकार करने का अधिकार” नहीं देता; शेष अभ्यर्थियों में सर्वाधिक मत पाने वाला ही निर्वाचित होता है।
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:

A(A) और (R) दोनों सही हैं, किन्तु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं करता हैB(A) गलत है, किन्तु (R) सही हैC(A) सही है, किन्तु (R) गलत हैD(A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या करता है
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (D)वर्तमान विधिक स्थिति में NOTA का प्रभाव केवल असंतोष दर्ज कराने तक है; निर्वाचन परिणाम शेष अभ्यर्थियों के मतों से तय होता है। अतः दोनों कथन सही हैं और (R) ही (A) की सही व्याख्या है।

7. संघ एवं राज्य लोक सेवा आयोग — अनुच्छेद 315 से 323

7.1 पृष्ठभूमि एवं अनुच्छेद 315

लोक सेवा आयोग की जड़ें औपनिवेशिक काल में हैं। ली आयोग (Lee Commission, 1924) की सिफ़ारिश पर 1 अक्टूबर 1926 को लोक सेवा आयोग (Public Service Commission) स्थापित हुआ, जिसके प्रथम अध्यक्ष सर रॉस बार्कर थे। भारत शासन अधिनियम, 1935 ने इसे संघीय लोक सेवा आयोग (Federal Public Service Commission) बनाया और प्रांतीय लोक सेवा आयोगों की भी व्यवस्था की। 26 जनवरी 1950 को यही संघीय आयोग संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) बन गया।

अनुच्छेद 315 कहता है — संघ के लिए एक संघ लोक सेवा आयोग तथा प्रत्येक राज्य के लिए एक राज्य लोक सेवा आयोग होगा। इसके तीन विशेष उपबंध भी हैं:

7.2 संरचना, पदावधि एवं हटाया जाना

सुमेलन-तालिका 9 : UPSC बनाम राज्य लोक सेवा आयोग — बिंदुवार
आधारसंघ लोक सेवा आयोगराज्य लोक सेवा आयोग
सदस्य-संख्यासंविधान में निर्धारित नहीं — राष्ट्रपति/राज्यपाल तय करते हैं। किंतु लगभग आधे सदस्य ऐसे हों जिन्होंने भारत सरकार या किसी राज्य सरकार के अधीन कम-से-कम 10 वर्ष पद धारण किया हो (अनु. 316)
नियुक्तिराष्ट्रपतिराज्यपाल
पदावधि6 वर्ष या 65 वर्ष की आयु, जो पहले हो6 वर्ष या 62 वर्ष की आयु, जो पहले हो
पदत्यागराष्ट्रपति कोराज्यपाल को
हटाया जाना (अनु. 317)दोनों ही स्थितियों में केवल राष्ट्रपति हटा सकते हैं। कदाचार के आधार पर हटाने से पूर्व मामला उच्चतम न्यायालय को निर्देशित करना अनिवार्य है और न्यायालय की सलाह बाध्यकारी है। जाँच के दौरान राष्ट्रपति निलंबित कर सकते हैं
अन्य आधारदिवालिया घोषित होना; पद के कर्तव्यों के बाहर सवेतन नियोजन करना; शारीरिक/मानसिक अक्षमता — इन आधारों पर उच्चतम न्यायालय की जाँच आवश्यक नहीं
सेवा-शर्तें (318)नियुक्ति के बाद अलाभकारी रूप से परिवर्तित नहीं
व्यय (322)भारत की संचित निधि पर भारितराज्य की संचित निधि पर भारित
वार्षिक प्रतिवेदन (323)राष्ट्रपति को → संसद के दोनों सदनों के समक्ष, अस्वीकृत सलाह के कारण बताते हुए ज्ञापन सहितराज्यपाल को → राज्य विधानमंडल के समक्ष, वैसा ही ज्ञापन सहित

7.3 अनुच्छेद 319 — सेवानिवृत्ति के बाद क्या कर सकते हैं

यह उपबंध UPPSC में बार-बार पूछा गया है, क्योंकि इसमें चार अलग-अलग स्थितियाँ हैं और उन्हें आपस में बदल देना बहुत आसान है।

सुमेलन-तालिका 10 : अनुच्छेद 319 — पद छोड़ने के बाद पात्रता
कौनकिसके लिए पात्रकिसके लिए अपात्र
UPSC का अध्यक्षकिसी भी पद के लिए नहींभारत सरकार या किसी राज्य सरकार के अधीन कोई भी आगे का नियोजन
UPSC का सदस्यUPSC का अध्यक्ष अथवा किसी राज्य लोक सेवा आयोग का अध्यक्षइसके अतिरिक्त कोई भी सरकारी नियोजन
SPSC का अध्यक्षUPSC का अध्यक्ष या सदस्य अथवा किसी अन्य राज्य के SPSC का अध्यक्षइसके अतिरिक्त कोई भी सरकारी नियोजन
SPSC का सदस्यUPSC का अध्यक्ष या सदस्य; उसी या किसी अन्य राज्य के SPSC का अध्यक्षइसके अतिरिक्त कोई भी सरकारी नियोजन
अनुच्छेद 319 — एक वाक्य में “ऊपर चढ़ो, नीचे नहीं — और UPSC का अध्यक्ष कहीं नहीं”

राज्य से संघ की ओर या सदस्य से अध्यक्ष की ओर जाना अनुज्ञेय है (ऊपर चढ़ना); संघ से राज्य के सदस्य बनने जैसा नीचे जाना अनुज्ञेय नहीं। और शीर्ष पर बैठा UPSC का अध्यक्ष सेवानिवृत्ति के बाद किसी भी सरकारी पद के लिए अपात्र है — यही सबसे कठोर नियम है।

7.4 कार्य — अनुच्छेद 320 एवं 321

सावधानी — UPSC क्या नहीं करता
उत्तर प्रदेश संदर्भ — UPPSC की स्थापना 1937
स्वयं जाँच — इस खंड से 3 प्रश्न

प्र.1 लोक सेवा आयोगों के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
1. संयुक्त राज्य लोक सेवा आयोग एक संवैधानिक निकाय है।
2. राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष की नियुक्ति राज्यपाल करते हैं, किंतु उन्हें केवल राष्ट्रपति हटा सकते हैं।
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:

Aकेवल 2Bन तो 1 और न ही 2C1 और 2 दोनोंDकेवल 1
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (A)संयुक्त राज्य लोक सेवा आयोग संसद की विधि से गठित होता है, अतः वह सांविधिक निकाय है, संवैधानिक नहीं — कथन 1 गलत। अनुच्छेद 316/317 के अनुसार नियुक्ति राज्यपाल करते हैं पर हटाने की शक्ति केवल राष्ट्रपति के पास है — कथन 2 सही।

प्र.2 निम्नलिखित में से कौन-सा युग्म सही सुमेलित नहीं है?

AUPSC सदस्य की आयु-सीमा — 65 वर्षBSPSC सदस्य की आयु-सीमा — 62 वर्षCUPSC के अध्यक्ष की सेवानिवृत्ति के बाद पात्रता — किसी राज्य लोक सेवा आयोग का अध्यक्षDUPSC का व्यय — भारत की संचित निधि पर भारित
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (C)अनुच्छेद 319 के अनुसार UPSC का अध्यक्ष सेवानिवृत्ति के बाद भारत सरकार या किसी राज्य सरकार के अधीन किसी भी पद के लिए अपात्र है — वह राज्य आयोग का अध्यक्ष भी नहीं बन सकता। यह छूट UPSC के सदस्य को प्राप्त है। शेष तीनों युग्म सही हैं।

प्र.3 नीचे दो कथन दिए गए हैं, जिनमें से एक को अभिकथन (A) तथा दूसरे को कारण (R) कहा गया है।
अभिकथन (A): संघ लोक सेवा आयोग की सलाह सरकार पर बाध्यकारी नहीं होती।
कारण (R): अनुच्छेद 323 के अधीन आयोग का वार्षिक प्रतिवेदन संसद के समक्ष उस ज्ञापन सहित रखा जाता है जिसमें सलाह स्वीकार न करने के कारण बताए जाते हैं।
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:

A(A) और (R) दोनों सही हैं, किन्तु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं करता हैB(A) गलत है, किन्तु (R) सही हैC(A) सही है, किन्तु (R) गलत हैD(A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या करता है
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (A)दोनों कथन तथ्यतः सही हैं, किंतु (R) उसका कारण नहीं है — बल्कि (R) उस स्थिति का परिणाम/उपचार है। सलाह इसलिए बाध्यकारी नहीं है क्योंकि संविधान ने आयोग को केवल परामर्शी भूमिका दी है; ज्ञापन की व्यवस्था इस अबाध्यता के दुरुपयोग को रोकने का उपाय है।

8. नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक — अनुच्छेद 148 से 151

8.1 पद का स्वरूप

नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (Comptroller and Auditor General — CAG) भारतीय लेखा एवं लेखा-परीक्षा विभाग का प्रमुख है और लोक धन का संरक्षक कहलाता है। डॉ. अंबेडकर ने संविधान सभा में कहा था कि यह “संविधान के अधीन सबसे महत्वपूर्ण अधिकारी” होगा — उनके अनुसार इसके कर्तव्य न्यायपालिका से भी अधिक महत्वपूर्ण हैं।

8.2 अनुच्छेद 149 से 151 — कर्तव्य एवं प्रतिवेदन

सुमेलन-तालिका 11 : CAG से संबंधित अनुच्छेद
अनुच्छेदविषयनिर्णायक बिंदु
148पद, नियुक्ति, शपथ एवं सेवा-शर्तेंस्वतंत्रता के सारे कवच इसी अनुच्छेद में
149कर्तव्य एवं शक्तियाँसंसद विधि द्वारा निर्धारित करेगी → CAG (कर्तव्य, शक्तियाँ एवं सेवा शर्तें) अधिनियम, 1971; 1976 के संशोधन ने केंद्र में लेखांकन को लेखा-परीक्षा से अलग किया
150संघ एवं राज्यों के लेखाओं का प्रारूपराष्ट्रपति द्वारा, CAG की सलाह पर विहित
151संपरीक्षा प्रतिवेदनसंघ के प्रतिवेदन राष्ट्रपति को → संसद के दोनों सदनों के समक्ष; राज्य के प्रतिवेदन राज्यपाल को → राज्य विधानमंडल के समक्ष
279“शुद्ध आगम (net proceeds)” का प्रमाणनकिसी कर/शुल्क के शुद्ध आगम का CAG का प्रमाणपत्र अंतिम होता है

8.3 CAG क्या-क्या संपरीक्षा करता है

सावधानी — “नियंत्रक” नाम भ्रामक है

भारत का CAG वास्तव में केवल महालेखापरीक्षक है, नियंत्रक नहीं। ब्रिटेन में CAG की अनुमति के बिना संचित निधि से धन नहीं निकाला जा सकता; भारत में धन निकालने का प्राधिकार कार्यपालिका के पास है और CAG केवल व्यय हो जाने के बाद उसकी संपरीक्षा करता है। दूसरा बिंदु — CAG “गोपनीय” व्यय (secret service expenditure) का विस्तृत ब्यौरा नहीं माँग सकता; वहाँ सक्षम प्राधिकारी का प्रमाणपत्र स्वीकार करना होता है। तीसरा — राज्यों के लिए अलग CAG नहीं होता; वही एक CAG संघ एवं सभी राज्यों की संपरीक्षा करता है (अनुच्छेद 149 एवं 151(2))।

8.4 प्रतिवेदन से लोक लेखा समिति तक — पूरी शृंखला

CAG के प्रतिवेदन का असली प्रभाव संसद/विधानमंडल में होता है — और वहाँ उसका वाहक है लोक लेखा समिति (Public Accounts Committee — PAC)। इसी कारण CAG को PAC का “मित्र, दार्शनिक एवं मार्गदर्शक” कहा जाता है।

1. संपरीक्षाCAG संघ/राज्य के लेखाओं की संपरीक्षा कर तीन प्रतिवेदन तैयार करता है — विनियोग लेखे, वित्त लेखे तथा सार्वजनिक उपक्रमों पर प्रतिवेदन
2. राष्ट्रपति कोअनुच्छेद 151(1) — संघ के प्रतिवेदन राष्ट्रपति को; राज्यों के प्रतिवेदन 151(2) के अधीन राज्यपाल को
3. सदन के समक्षराष्ट्रपति/राज्यपाल उन्हें संसद के दोनों सदनों/राज्य विधानमंडल के समक्ष रखवाते हैं — प्रायः वित्त मंत्री के माध्यम से
4. PAC को स्वतः निर्देशसदन में रखे जाते ही प्रतिवेदन लोक लेखा समिति को निर्दिष्ट हो जाते हैं — सार्वजनिक उपक्रमों वाला प्रतिवेदन सार्वजनिक उपक्रम समिति को
5. जाँच एवं प्रतिवेदनPAC विभागीय सचिवों को बुलाकर साक्ष्य लेती है; CAG मार्गदर्शक की भूमिका में रहता है। समिति का प्रतिवेदन सदन में प्रस्तुत होता है और सरकार कृत-कार्रवाई टिप्पणी देती है
परीक्षा-दृष्टि — वर्तमान स्थिति

भारत के वर्तमान नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक के. संजय मूर्ति हैं, जिन्होंने 21 नवंबर 2024 को शपथ ली (15वें CAG); उनके पूर्ववर्ती गिरीश चंद्र मुर्मू थे। प्रथम CAG वी. नरहरि राव थे। भारत का CAG कई अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं — जैसे संयुक्त राष्ट्र के कुछ निकायों — का बाह्य लेखा-परीक्षक भी रहा है, और INTOSAI (सर्वोच्च लेखा-परीक्षा संस्थाओं का अंतरराष्ट्रीय संगठन) में सक्रिय रहता है।

स्वयं जाँच — इस खंड से 3 प्रश्न

प्र.1 नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
1. उसकी पदावधि संविधान में छह वर्ष निर्धारित की गई है।
2. उसका वेतन एवं प्रशासनिक व्यय भारत की संचित निधि पर भारित है।
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:

Aकेवल 2Bन तो 1 और न ही 2C1 और 2 दोनोंDकेवल 1
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (A)संविधान में पदावधि नहीं दी गई; 6 वर्ष या 65 वर्ष की सीमा CAG (कर्तव्य, शक्तियाँ एवं सेवा शर्तें) अधिनियम, 1971 से आती है — कथन 1 गलत। वेतन एवं प्रशासनिक व्यय संचित निधि पर भारित हैं — कथन 2 सही।

प्र.2 सूची-I को सूची-II से सुमेलित कीजिए तथा सूचियों के नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए।
   सूची-I (अनुच्छेद)    सूची-II (विषय)
A. 148   1. लेखाओं का प्रारूप राष्ट्रपति द्वारा, CAG की सलाह पर
B. 149   2. संपरीक्षा प्रतिवेदन राष्ट्रपति/राज्यपाल को
C. 150   3. CAG की नियुक्ति एवं सेवा-शर्तें
D. 151   4. कर्तव्य एवं शक्तियाँ संसद विधि द्वारा
कूट:

AA-3, B-4, C-2, D-1BA-4, B-3, C-1, D-2CA-3, B-4, C-1, D-2DA-4, B-3, C-2, D-1
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (C)148 — नियुक्ति एवं सेवा-शर्तें; 149 — कर्तव्य एवं शक्तियाँ संसद विधि द्वारा; 150 — लेखाओं का प्रारूप; 151 — संपरीक्षा प्रतिवेदन। अतः A-3, B-4, C-1, D-2 सही है।

प्र.3 नीचे दो कथन दिए गए हैं, जिनमें से एक को अभिकथन (A) तथा दूसरे को कारण (R) कहा गया है।
अभिकथन (A): भारत का नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक वस्तुतः “नियंत्रक” की भूमिका नहीं निभाता।
कारण (R): भारत में संचित निधि से धन निकालने का प्राधिकार कार्यपालिका के पास है और CAG व्यय होने के बाद ही उसकी संपरीक्षा करता है।
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:

A(A) और (R) दोनों सही हैं, किन्तु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं करता हैB(A) गलत है, किन्तु (R) सही हैC(A) सही है, किन्तु (R) गलत हैD(A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या करता है
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (D)ब्रिटेन के विपरीत भारत में CAG की पूर्व-अनुमति के बिना भी संचित निधि से धन निकाला जा सकता है; उसकी भूमिका उत्तर-व्ययी संपरीक्षा तक सीमित है। अतः दोनों सही हैं और (R) ही (A) का कारण है।

9. महान्यायवादी (अनुच्छेद 76) एवं महाधिवक्ता (अनुच्छेद 165)

9.1 भारत का महान्यायवादी — अनुच्छेद 76

महान्यायवादी (Attorney General of India) देश का प्रथम विधि अधिकारी है। यह पद संविधान के भाग V (संघ) में रखा गया है — अर्थात् वह कार्यपालिका का ही अंग है, न्यायपालिका का नहीं।

सावधानी — महान्यायवादी के चार भ्रम

9.2 राज्य का महाधिवक्ता — अनुच्छेद 165

सुमेलन-तालिका 12 : महान्यायवादी (76) बनाम महाधिवक्ता (165)
आधारमहान्यायवादी — अनुच्छेद 76महाधिवक्ता — अनुच्छेद 165
स्तरसंघ का प्रथम विधि अधिकारीराज्य का प्रथम विधि अधिकारी
नियुक्तिराष्ट्रपतिराज्यपाल
अर्हताउच्चतम न्यायालय का न्यायाधीश होने के योग्यउच्च न्यायालय का न्यायाधीश होने के योग्य — 10 वर्ष न्यायिक पद या 10 वर्ष उच्च न्यायालय में अधिवक्ता
पदावधिराष्ट्रपति के प्रसादपर्यंतराज्यपाल के प्रसादपर्यंत
पारिश्रमिकराष्ट्रपति अवधारित करेंराज्यपाल अवधारित करें
सदन में अधिकारअनुच्छेद 88 — दोनों सदनों एवं समितियों में बोलने का अधिकार, मत का नहींअनुच्छेद 177 — राज्य विधानमंडल के दोनों सदनों एवं समितियों में बोलने का अधिकार, मत का नहीं
सुनवाई का क्षेत्रभारत के समस्त न्यायालयों मेंउस राज्य के समस्त न्यायालयों में
सहायकमहा-सॉलिसिटर, अपर महा-सॉलिसिटर (असंवैधानिक पद)अपर महाधिवक्ता, शासकीय अधिवक्ता (असंवैधानिक पद)
उत्तर प्रदेश संदर्भ

उत्तर प्रदेश के महाधिवक्ता का कार्यालय प्रयागराज में है, क्योंकि इलाहाबाद उच्च न्यायालय का मुख्य पीठ वहीं है; लखनऊ पीठ के लिए अपर महाधिवक्ता कार्यरत रहते हैं। यह ध्यान रखें कि महाधिवक्ता राज्य विधान सभा एवं विधान परिषद — दोनों में बोल सकता है (अनु. 177), क्योंकि UP द्विसदनीय विधानमंडल वाला राज्य है। उत्तर प्रदेश उन कुछ राज्यों में है जहाँ विधान परिषद है — इसलिए UPPSC में अनुच्छेद 177 का प्रश्न बनने की संभावना अधिक रहती है।

स्वयं जाँच — इस खंड से 3 प्रश्न

प्र.1 भारत के महान्यायवादी के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
1. उसे संसद की कार्यवाही में बोलने तथा मत देने का अधिकार है।
2. वह निजी विधि-व्यवसाय कर सकता है।
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:

Aकेवल 2Bन तो 1 और न ही 2C1 और 2 दोनोंDकेवल 1
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (A)अनुच्छेद 88 के अधीन महान्यायवादी को बोलने एवं भाग लेने का अधिकार है, मत देने का नहीं — कथन 1 गलत। वह पूर्णकालिक सरकारी सेवक नहीं है, अतः निजी वकालत कर सकता है (सरकार के विरुद्ध नहीं) — कथन 2 सही।

प्र.2 निम्नलिखित में से कौन-सा/से युग्म सही सुमेलित नहीं है/हैं?
   (पद)    (अनुच्छेद)
1. महाधिवक्ता — अनुच्छेद 165
2. महान्यायवादी का सदनों में बोलने का अधिकार — अनुच्छेद 88
3. महा-सॉलिसिटर — अनुच्छेद 76क
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:

A1 और 2Bकेवल 3C2 और 3Dकेवल 1
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (B)संविधान में महा-सॉलिसिटर (Solicitor General) का कोई उल्लेख नहीं है और “अनुच्छेद 76क” जैसा कोई अनुच्छेद ही नहीं है — अतः युग्म 3 सुमेलित नहीं है। युग्म 1 एवं 2 सही हैं।

प्र.3 नीचे दो कथन दिए गए हैं, जिनमें से एक को अभिकथन (A) तथा दूसरे को कारण (R) कहा गया है।
अभिकथन (A): महान्यायवादी की पदावधि संविधान में निश्चित नहीं की गई है।
कारण (R): वह राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद धारण करता है और उसे हटाने की कोई प्रक्रिया संविधान में नहीं दी गई है।
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:

A(A) और (R) दोनों सही हैं, किन्तु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं करता हैB(A) गलत है, किन्तु (R) सही हैC(A) सही है, किन्तु (R) गलत हैD(A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या करता है
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (D)“प्रसादपर्यंत” पदधारण का ही परिणाम है कि न कोई निश्चित अवधि है और न हटाने की कोई विहित प्रक्रिया। अतः दोनों सही हैं और (R) ही (A) की सही व्याख्या है।

10. वित्त आयोग — अनुच्छेद 280 एवं राज्य वित्त आयोग

10.1 अनुच्छेद 280 — गठन एवं संरचना

वित्त आयोग राजकोषीय संघवाद का संतुलन-चक्र (balancing wheel of fiscal federalism) कहलाता है। अनुच्छेद 280(1) के अनुसार राष्ट्रपति संविधान के प्रारंभ से दो वर्ष के भीतर तथा उसके बाद प्रत्येक पाँचवें वर्ष की समाप्ति पर या उससे पहले जब वे आवश्यक समझें, एक वित्त आयोग गठित करेंगे।

10.2 कार्य — अनुच्छेद 280(3) एवं 281

10.3 नवीनतम स्थिति — सोलहवाँ वित्त आयोग

परीक्षा-दृष्टि — वित्त आयोगों का त्वरित स्मरण

प्रथम वित्त आयोग (1951) — के.सी. नियोगी14वाँ — वाई.वी. रेड्डी, जिसने हस्तांतरण 32% से बढ़ाकर 42% किया। 15वाँ — एन.के. सिंह, जिसने जम्मू-कश्मीर के पुनर्गठन के बाद इसे 41% किया और असामान्य रूप से छह वर्ष (2020-21 से 2025-26) की अवधि दी। 16वाँ — अरविंद पनगढ़िया, 41% बरकरार। केंद्र-राज्य वित्तीय संबंधों का विस्तृत विवेचन अध्याय 4.3 में है।

10.4 राज्य वित्त आयोग — अनुच्छेद 243झ एवं 243म

सावधानी — अनुच्छेद 280 बनाम अनुच्छेद 243झ
आधारवित्त आयोग — अनुच्छेद 280राज्य वित्त आयोग — अनुच्छेद 243झ (एवं 243म)
गठनकर्ताराष्ट्रपतिराज्यपाल
किसके बीच बँटवारासंघ एवं राज्यों के बीचराज्य एवं उसके स्थानीय निकायों (पंचायत एवं नगरपालिका) के बीच
संरचनाअध्यक्ष + 4 सदस्य (संविधान में संख्या दी गई है)संविधान में संख्या नहीं दी गई — राज्य विधानमंडल तय करता है
अवधिप्रत्येक 5वें वर्ष या उससे पहलेप्रत्येक 5वें वर्ष (1993 के प्रारंभ से)
प्रतिवेदन कहाँराष्ट्रपति → संसद के दोनों सदन (अनु. 281)राज्यपालराज्य विधानमंडल, कृत-कार्रवाई ज्ञापन सहित
दोनों का सेतुअनुच्छेद 280(3)(ग) — केंद्रीय वित्त आयोग राज्य वित्त आयोग की सिफ़ारिशों के आधार पर यह बताता है कि राज्य की संचित निधि को कैसे संपूरित किया जाए ताकि स्थानीय निकायों के संसाधन बढ़ें

अतः यह कहना गलत है कि “राज्य वित्त आयोग की नियुक्ति राष्ट्रपति करते हैं” अथवा “राज्य वित्त आयोग केंद्र एवं राज्य के बीच करों का बँटवारा करता है”। यह दोनों वाक्य UPPSC के प्रिय distractor हैं।

उत्तर प्रदेश संदर्भ

उत्तर प्रदेश ने अनुच्छेद 243झ के अधीन अपना प्रथम राज्य वित्त आयोग 1994 में गठित किया और तब से क्रमशः आयोग गठित होते रहे हैं; ये आयोग राज्य के करों, शुल्कों एवं पथकर में ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत, जिला पंचायत तथा नगरीय निकायों के हिस्से की सिफ़ारिश करते हैं। 16वें वित्त आयोग की उस प्रवेश-शर्त पर विशेष ध्यान दें जिसके अनुसार राज्य वित्त आयोग का समय पर गठन न होने पर राज्य के स्थानीय निकाय केंद्रीय अनुदान से वंचित रह सकते हैं — यह प्रावधान UP जैसे विशाल स्थानीय-निकाय तंत्र वाले राज्य के लिए सीधे व्यावहारिक महत्व का है।

स्वयं जाँच — इस खंड से 3 प्रश्न

प्र.1 वित्त आयोग के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
1. इसकी सिफ़ारिशें भारत सरकार पर बाध्यकारी होती हैं।
2. इसमें एक अध्यक्ष तथा चार अन्य सदस्य होते हैं।
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:

Aकेवल 2Bन तो 1 और न ही 2C1 और 2 दोनोंDकेवल 1
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (A)आयोग की सिफ़ारिशें परामर्शी हैं, बाध्यकारी नहीं; उन्हें अनुच्छेद 281 के अधीन कृत-कार्रवाई ज्ञापन सहित संसद के समक्ष रखा जाता है — कथन 1 गलत। अनुच्छेद 280(1) के अनुसार आयोग में अध्यक्ष एवं चार अन्य सदस्य होते हैं — कथन 2 सही।

प्र.2 निम्नलिखित में से कौन-सा युग्म सही सुमेलित नहीं है?

Aराज्य वित्त आयोग का गठन — राज्यपाल द्वाराBवित्त आयोग का गठन — राष्ट्रपति द्वाराCराज्य वित्त आयोग की सदस्य-संख्या — संविधान में चार निर्धारितDवित्त आयोग के प्रतिवेदन का संसद में रखा जाना — अनुच्छेद 281
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (C)राज्य वित्त आयोग की संरचना संविधान में निर्धारित नहीं है — अनुच्छेद 243झ(2) के अनुसार सदस्यों की संख्या, अर्हता एवं चयन-रीति राज्य विधानमंडल विधि द्वारा तय करता है। “अध्यक्ष + चार सदस्य” वाला नियम केवल केंद्रीय वित्त आयोग (अनु. 280) का है।

प्र.3 सोलहवें वित्त आयोग के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
1. इसकी अध्यक्षता डॉ. अरविंद पनगढ़िया कर रहे हैं और इसका प्रतिवेदन 2026-27 से 2030-31 की अवधि के लिए है।
2. इसने राज्यों के लिए ऊर्ध्वाधर हस्तांतरण घटाकर 32% करने की सिफ़ारिश की है।
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:

Aकेवल 2Bन तो 1 और न ही 2C1 और 2 दोनोंDकेवल 1
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (D)16वें वित्त आयोग (अध्यक्ष — डॉ. अरविंद पनगढ़िया) का प्रतिवेदन 2026-27 से 2030-31 की अवधि के लिए है — कथन 1 सही। इसने हस्तांतरण 41% पर यथावत रखा, घटाया नहीं — कथन 2 गलत। (32% का आँकड़ा 13वें वित्त आयोग से जुड़ा है।)

11. अन्य संवैधानिक निकाय — अनुच्छेद 338, 338क, 338ख, 350ख

11.1 तीन आयोगों का विकास-क्रम

मूल संविधान के अनुच्छेद 338 में आयोग नहीं, बल्कि अनुसूचित जातियों एवं अनुसूचित जनजातियों के लिए एक विशेष अधिकारी (जिसे अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति आयुक्त कहा गया) की व्यवस्था थी। आगे की यात्रा तीन संशोधनों में पूरी हुई:

1950अनुच्छेद 338 — अजा/अजजा के लिए विशेष अधिकारी (आयुक्त); उसका प्रतिवेदन राष्ट्रपति को
1978 · 1987सरकारी संकल्प से गैर-सांविधिक बहु-सदस्यीय आयोग गठित — पहले “अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति आयोग”, फिर उसका पुनर्गठन
1990 · 65वाँ संशोधनविशेष अधिकारी के स्थान पर बहु-सदस्यीय राष्ट्रीय अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति आयोग — पहली बार संवैधानिक दर्जा (आयोग 1992 में अस्तित्व में आया)
2003 · 89वाँ संशोधनआयोग का विभाजनअनुच्छेद 338 = राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग, नया अनुच्छेद 338क = राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग। दोनों 19 फ़रवरी 2004 से पृथक रूप में कार्यरत
2018 · 102वाँ संशोधननया अनुच्छेद 338ख — राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा (पहले यह 1993 के अधिनियम से बना सांविधिक निकाय था); साथ ही अनुच्छेद 342क जोड़ा गया
2021 · 105वाँ संशोधनअनुच्छेद 342क(3) जोड़कर राज्यों/संघ राज्यक्षेत्रों की अपनी सामाजिक एवं शैक्षिक दृष्टि से पिछड़े वर्गों की सूची बनाने की शक्ति बहाल की गई

11.2 तीनों आयोगों का साझा ढाँचा

338 की तिकड़ी — क्रम में “जाति → जनजाति → पिछड़ा”

338 = राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग · 338क = राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग · 338ख = राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग। संशोधन भी इसी क्रम में — 65वाँ (1990) → 89वाँ (2003) → 102वाँ (2018)। और याद रखें — 350ख कोई आयोग नहीं, एक विशेष अधिकारी है।

11.3 अनुच्छेद 350ख — भाषाई अल्पसंख्यकों के लिए विशेष अधिकारी

उत्तर प्रदेश संदर्भ — भाषाई अल्पसंख्यक आयुक्त का प्रयागराज से रिश्ता

भाषाई अल्पसंख्यक आयुक्त का कार्यालय स्थापना (जुलाई 1957) के कुछ समय बाद इलाहाबाद (प्रयागराज) स्थानांतरित हुआ और दशकों तक वहीं रहा — इसी कारण अनेक पुरानी पुस्तकों में इसका मुख्यालय “इलाहाबाद” लिखा मिलता है। 1 जून 2015 से मुख्यालय नई दिल्ली कर दिया गया, जबकि प्रयागराज में अब भी उसका क्षेत्रीय कार्यालय है (अन्य क्षेत्रीय कार्यालय — बेलगावी, चेन्नई एवं कोलकाता)। परीक्षा में यदि “वर्तमान मुख्यालय” पूछा जाए तो उत्तर नई दिल्ली है; यदि “ऐतिहासिक रूप से किस नगर से जुड़ा रहा” पूछा जाए तो प्रयागराज (इलाहाबाद)

सुमेलन-तालिका 13 : अनुच्छेद ↔ निकाय ↔ जोड़ने वाला संशोधन
अनुच्छेदनिकाय/पदसंशोधन एवं वर्ष
338राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोगमूल रूप में विशेष अधिकारी; 65वाँ (1990) से आयोग; 89वाँ (2003) से केवल अजा
338कराष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग89वाँ संशोधन, 2003 (प्रभावी 19 फ़रवरी 2004)
338खराष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग102वाँ संशोधन, 2018
342कसामाजिक एवं शैक्षिक दृष्टि से पिछड़े वर्गों का विनिर्दिष्टीकरण102वाँ (2018); 105वाँ (2021) ने राज्यों की सूची-शक्ति बहाल की
350खभाषाई अल्पसंख्यकों के लिए विशेष अधिकारी7वाँ संशोधन, 1956 (राज्य पुनर्गठन आयोग की सिफ़ारिश पर)
324निर्वाचन आयोगमूल संविधान
280 · 243झवित्त आयोग · राज्य वित्त आयोगमूल संविधान · 73वाँ संशोधन, 1992
279कवस्तु एवं सेवा कर परिषद101वाँ संशोधन, 2016 — विवरण अध्याय 4.3 में
263अंतर-राज्य परिषदमूल संविधान; 1990 में राष्ट्रपति के आदेश से गठित (सरकारिया आयोग की सिफ़ारिश) — अध्याय 4.3
स्वयं जाँच — इस खंड से 3 प्रश्न

प्र.1 सूची-I को सूची-II से सुमेलित कीजिए तथा सूचियों के नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए।
   सूची-I (निकाय)    सूची-II (अनुच्छेद)
A. राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग   1. 350ख
B. राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग   2. 338
C. राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग   3. 338क
D. भाषाई अल्पसंख्यकों के लिए विशेष अधिकारी   4. 338ख
कूट:

AA-3, B-4, C-1, D-2BA-4, B-3, C-2, D-1CA-3, B-4, C-2, D-1DA-4, B-3, C-1, D-2
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (C)अनुसूचित जनजाति आयोग — 338क; पिछड़ा वर्ग आयोग — 338ख; अनुसूचित जाति आयोग — 338; भाषाई अल्पसंख्यक विशेष अधिकारी — 350ख। अतः A-3, B-4, C-2, D-1 सही है।

प्र.2 निम्नलिखित संशोधनों को सही कालक्रमानुसार व्यवस्थित कीजिए।
1. भाषाई अल्पसंख्यकों के लिए विशेष अधिकारी का उपबंध
2. राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की स्थापना
3. राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा
4. अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के लिए बहु-सदस्यीय आयोग की संवैधानिक व्यवस्था
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:

A1, 4, 3, 2B4, 1, 2, 3C4, 1, 3, 2D1, 4, 2, 3
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (D)7वाँ संशोधन (350ख) — 1956; 65वाँ संशोधन (बहु-सदस्यीय अजा-अजजा आयोग) — 1990; 89वाँ संशोधन (338क, अलग अजजा आयोग) — 2003; 102वाँ संशोधन (338ख) — 2018। अतः क्रम 1, 4, 2, 3 है।

प्र.3 राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
1. इसमें अध्यक्ष, उपाध्यक्ष तथा तीन अन्य सदस्य होते हैं।
2. यह आंग्ल-भारतीय समुदाय से संबंधित मामलों को भी देखता है।
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:

Aकेवल 2Bन तो 1 और न ही 2C1 और 2 दोनोंDकेवल 1
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (C)अनुच्छेद 338(2) के अनुसार आयोग में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष एवं तीन अन्य सदस्य होते हैं; तथा अनुच्छेद 338(10) के अनुसार “अनुसूचित जातियों” में आंग्ल-भारतीय समुदाय के प्रति निर्देश भी सम्मिलित हैं। दोनों कथन सही हैं।

12. प्रमुख वैधानिक एवं अर्ध-न्यायिक निकाय

12.1 वर्गीकरण पहले समझें — यही सबसे बड़ा जाल है

संवैधानिक निकाय — संविधान में सीधे वर्णित

  • निर्वाचन आयोग — अनु. 324
  • संघ लोक सेवा आयोग एवं राज्य लोक सेवा आयोग — अनु. 315–323
  • नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक — अनु. 148
  • महान्यायवादी (76) एवं महाधिवक्ता (165)
  • वित्त आयोग — अनु. 280; राज्य वित्त आयोग — 243झ/243म
  • राज्य निर्वाचन आयोग — 243ट/243यक
  • NCSC (338) · NCST (338क) · NCBC (338ख)
  • भाषाई अल्पसंख्यकों के लिए विशेष अधिकारी — 350ख
  • जीएसटी परिषद (279क) · अंतर-राज्य परिषद (263)
  • संशोधन के बिना समाप्त नहीं किए जा सकते

वैधानिक (सांविधिक) एवं कार्यपालक निकाय

  • वैधानिक — संसद/विधानमंडल की विधि से: NHRC एवं SHRC (1993), केंद्रीय एवं राज्य सूचना आयोग (RTI, 2005), लोकपाल एवं लोकायुक्त (2013), राष्ट्रीय महिला आयोग (1990), केंद्रीय सतर्कता आयोग (2003), राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग (1992), राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (2005), राष्ट्रीय हरित अधिकरण (2010), संयुक्त राज्य लोक सेवा आयोग
  • कार्यपालक/गैर-सांविधिक — सरकारी संकल्प या कार्यकारी आदेश से: नीति आयोग (2015), पूर्ववर्ती योजना आयोग (1950), राष्ट्रीय विकास परिषद (1952), केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) (1963), प्रशासनिक सुधार आयोग
  • ध्यान दें — केंद्रीय सूचना आयोग, लोकपाल एवं NHRC वैधानिक हैं, कार्यपालक नहीं; और कोई भी वैधानिक निकाय “संवैधानिक” नहीं कहलाता
  • विधि/संकल्प बदलकर ही समाप्त किए जा सकते हैं — संविधान संशोधन की आवश्यकता नहीं
सावधानी — यही वह प्रश्न है जिसमें सबसे अधिक अंक कटते हैं
संवैधानिक निकाय — एक पंक्ति में “चुनाव, सेवा, लेखा, वित्त — और तीन सौ अड़तीस की तिकड़ी”

चुनाव = निर्वाचन आयोग (324) एवं राज्य निर्वाचन आयोग (243ट) · सेवा = संघ/राज्य लोक सेवा आयोग (315–323) · लेखा = नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (148) · वित्त = वित्त आयोग (280) एवं राज्य वित्त आयोग (243झ) · तिकड़ी = 338, 338क, 338ख। इनके साथ दो विधि अधिकारी (76 एवं 165) तथा एक विशेष अधिकारी (350ख)। जो इस सूची में नहीं, वह संवैधानिक नहीं।

12.2 नीति आयोग

12.3 राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC)

12.4 सूचना आयोग, लोकपाल, महिला आयोग, सतर्कता आयोग एवं CBI

सुमेलन-तालिका 14 : निकाय ↔ आधार-विधि ↔ संरचना ↔ नियुक्ति-समिति
निकायआधार एवं वर्षसंरचना एवं पदावधिनियुक्ति-समिति
केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 — सांविधिक मुख्य सूचना आयुक्त + अधिकतम 10 सूचना आयुक्त। 2019 के संशोधन के बाद पदावधि एवं वेतन केंद्र सरकार तय करती है (नियमों से 3 वर्ष); आयु-सीमा 65 वर्ष प्रधानमंत्री (अध्यक्ष), लोक सभा में विपक्ष का नेता, प्रधानमंत्री द्वारा नामनिर्देशित एक केंद्रीय कैबिनेट मंत्री → नियुक्ति राष्ट्रपति
लोकपाल लोकपाल एवं लोकायुक्त अधिनियम, 2013 (16 जनवरी 2014 से प्रवृत्त) — सांविधिक; लोकपाल मार्च 2019 में गठित अध्यक्ष + अधिकतम 8 सदस्य, जिनमें कम-से-कम आधे न्यायिक; तथा कम-से-कम आधे सदस्य अजा/अजजा/पिछड़ा वर्ग/अल्पसंख्यक/महिला वर्ग से। पदावधि 5 वर्ष या 70 वर्ष प्रधानमंत्री (अध्यक्ष), लोक सभा अध्यक्ष, लोक सभा में विपक्ष का नेता, भारत के मुख्य न्यायमूर्ति या उनके द्वारा नामनिर्देशित उच्चतम न्यायालय का न्यायाधीश, तथा एक प्रख्यात विधिवेत्ता
राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) राष्ट्रीय महिला आयोग अधिनियम, 1990; आयोग 31 जनवरी 1992 को गठित — सांविधिक अध्यक्ष + 5 सदस्य + 1 सदस्य-सचिव; कम-से-कम एक-एक सदस्य अजा एवं अजजा से। पदावधि 3 वर्ष केंद्र सरकार द्वारा नामनिर्देशन (कोई संवैधानिक समिति नहीं) — प्रथम अध्यक्ष जयंती पटनायक
केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) 1964 में संथानम समिति की सिफ़ारिश पर संकल्प से; विनीत नारायण वाद (1997) के बाद सतर्कता आयोग अधिनियम, 2003 से सांविधिक केंद्रीय सतर्कता आयुक्त (अध्यक्ष) + अधिकतम 2 सतर्कता आयुक्त; पदावधि 4 वर्ष या 65 वर्ष; हटाना राष्ट्रपति द्वारा, उच्चतम न्यायालय की जाँच पर प्रधानमंत्री (अध्यक्ष), केंद्रीय गृह मंत्री, लोक सभा में विपक्ष का नेता → नियुक्ति राष्ट्रपति
केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) 1 अप्रैल 1963, गृह मंत्रालय के संकल्प से; शक्ति दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना अधिनियम, 1946 से — न संवैधानिक, न स्वयं सांविधिक निदेशक की न्यूनतम पदावधि 2 वर्ष (विनीत नारायण, 1997 एवं DSPE अधिनियम की धारा 4क); बाद के संशोधनों से इसे 5 वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है निदेशक — प्रधानमंत्री, लोक सभा में विपक्ष का नेता तथा भारत के मुख्य न्यायमूर्ति या उनके नामनिर्देशित न्यायाधीश की समिति (लोकपाल अधिनियम, 2013 द्वारा संशोधित)
उत्तर प्रदेश संदर्भ — UP लोकायुक्त एवं राज्य आयोग
स्वयं जाँच — इस खंड से 3 प्रश्न

प्र.1 निम्नलिखित में से कौन-सा/से युग्म सही सुमेलित नहीं है/हैं?
   (निकाय)    (प्रकृति)
1. वित्त आयोग — संवैधानिक निकाय
2. नीति आयोग — सांविधिक निकाय
3. राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग — संवैधानिक निकाय
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:

A1 और 2Bकेवल 2C2 और 3Dकेवल 1
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (B)नीति आयोग किसी अधिनियम से नहीं, केंद्रीय मंत्रिमंडल के संकल्प (1 जनवरी 2015) से बना है — अतः वह सांविधिक भी नहीं, केवल कार्यपालक निकाय है; युग्म 2 गलत। वित्त आयोग (अनु. 280) एवं NCBC (अनु. 338ख, 102वाँ संशोधन) दोनों संवैधानिक हैं।

प्र.2 सूची-I को सूची-II से सुमेलित कीजिए तथा सूचियों के नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए।
   सूची-I (निकाय)    सूची-II (आधार-विधि/वर्ष)
A. केंद्रीय सतर्कता आयोग   1. मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993
B. लोकपाल   2. सतर्कता आयोग अधिनियम, 2003
C. राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग   3. दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना अधिनियम, 1946
D. केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो   4. लोकपाल एवं लोकायुक्त अधिनियम, 2013
कूट:

AA-2, B-4, C-3, D-1BA-4, B-2, C-1, D-3CA-2, B-4, C-1, D-3DA-4, B-2, C-3, D-1
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (C)CVC — सतर्कता आयोग अधिनियम, 2003; लोकपाल — लोकपाल एवं लोकायुक्त अधिनियम, 2013; NHRC — मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993; CBI — दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना अधिनियम, 1946 से शक्ति। अतः A-2, B-4, C-1, D-3 सही है।

प्र.3 राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
1. 2019 के संशोधन के बाद उच्चतम न्यायालय का कोई भी भूतपूर्व न्यायाधीश आयोग का अध्यक्ष बन सकता है।
2. आयोग एक वर्ष से अधिक पुरानी घटना की जाँच नहीं कर सकता।
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:

Aकेवल 2Bन तो 1 और न ही 2C1 और 2 दोनोंDकेवल 1
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (C)2019 के संशोधन ने अध्यक्ष की पात्रता पूर्व मुख्य न्यायमूर्ति से बढ़ाकर उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश तक कर दी — कथन 1 सही। मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम के अनुसार आयोग एक वर्ष से पुरानी घटना की जाँच नहीं कर सकता — कथन 2 भी सही।

13. लोक नीति एवं अधिकार-मुद्दे — RTI, RTE, सेवा का अधिकार, नागरिक अधिकार-पत्र, ई-गवर्नेंस

13.1 सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005

सूचना का अधिकार किसी नए अनुच्छेद से नहीं आया — यह अनुच्छेद 19(1)(क) की वाक्-स्वातंत्र्य से निकला हुआ अधिकार है, जिसे उच्चतम न्यायालय ने उत्तर प्रदेश राज्य बनाम राज नारायण (1975) तथा एस.पी. गुप्ता (1981) में मान्यता दी। विधिक रूप 2005 में मिला।

13.2 शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009

13.3 सेवा का अधिकार

उत्तर प्रदेश संदर्भ — जनहित गारंटी अधिनियम एवं जनसुनवाई

13.4 नागरिक अधिकार-पत्र (Citizens' Charter)

13.5 ई-गवर्नेंस

स्वयं जाँच — इस खंड से 3 प्रश्न

प्र.1 सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
1. आवेदक को सूचना माँगने का कारण बताना आवश्यक है।
2. जीवन या स्वतंत्रता से संबंधित सूचना 48 घंटे के भीतर देनी होती है।
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:

Aकेवल 2Bन तो 1 और न ही 2C1 और 2 दोनोंDकेवल 1
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (A)अधिनियम की धारा 6(2) के अनुसार आवेदक को कोई कारण बताने की आवश्यकता नहीं — कथन 1 गलत। धारा 7(1) के परंतुक के अनुसार जीवन या स्वतंत्रता से संबंधित सूचना 48 घंटे में देनी होती है — कथन 2 सही।

प्र.2 निम्नलिखित में से कौन-सा युग्म सही सुमेलित नहीं है?

Aशिक्षा का अधिकार अधिनियम — 1 अप्रैल 2010 से प्रवृत्तBसेवा की गारंटी संबंधी प्रथम राज्य विधि — मध्य प्रदेश, 2010Cनागरिक अधिकार-पत्र की अवधारणा — भारत में 1991 में आरंभDसेवोत्तम मॉडल — सेवा-प्रदायगी, शिकायत-निवारण एवं क्षमता के तीन घटक
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (C)नागरिक अधिकार-पत्र की अवधारणा ब्रिटेन में 1991 में आरंभ हुई; भारत में इसे 1997 के मुख्यमंत्रियों के सम्मेलन में अपनाई गई कार्य-योजना के अंतर्गत लागू किया गया। शेष तीनों युग्म सही हैं।

प्र.3 नीचे दो कथन दिए गए हैं, जिनमें से एक को अभिकथन (A) तथा दूसरे को कारण (R) कहा गया है।
अभिकथन (A): शिक्षा का अधिकार अधिनियम का 25% आरक्षण वाला उपबंध अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थाओं पर लागू नहीं होता।
कारण (R): उच्चतम न्यायालय ने प्रमति एजुकेशनल ट्रस्ट (2014) में कहा कि यह उपबंध अनुच्छेद 30(1) के अधीन अल्पसंख्यकों के अधिकार का अतिक्रमण करेगा।
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:

A(A) और (R) दोनों सही हैं, किन्तु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं करता हैB(A) गलत है, किन्तु (R) सही हैC(A) सही है, किन्तु (R) गलत हैD(A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या करता है
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (D)प्रमति एजुकेशनल एंड कल्चरल ट्रस्ट (2014) में संविधान पीठ ने सहायताप्राप्त एवं गैर-सहायताप्राप्त — दोनों प्रकार की अल्पसंख्यक संस्थाओं को RTE के 25% उपबंध से बाहर रखा, क्योंकि वह अनुच्छेद 30(1) के अधिकार को क्षीण करता। अतः दोनों सही हैं और (R) ही (A) का कारण है।

14. एक दृष्टि में — अनुच्छेद-सूची, कालक्रम एवं निर्णायक तथ्य

14.1 निर्णायक संख्याएँ

29ग्यारहवीं अनुसूची के विषय
18बारहवीं अनुसूची के विषय
16भाग IX के अनुच्छेद (243–243ण)
18भाग IXक के अनुच्छेद (243त–243यछ)
1/3पंचायत/नगरपालिका में महिला आरक्षण
21चुनाव लड़ने की न्यूनतम आयु
5 वर्षपंचायत/नगरपालिका का कार्यकाल
6 माहविघटन के बाद चुनाव की सीमा
20 लाखमध्यवर्ती स्तर की छूट-सीमा
3 लाखवार्ड समिति अनिवार्यता
10 लाखमहानगर क्षेत्र की परिभाषा
41%16वें वित्त आयोग का हस्तांतरण

14.2 सम्पूर्ण अनुच्छेद-सूची — इस अध्याय के सभी उपबंध

सुमेलन-तालिका 15 : अनुच्छेद ↔ विषय — एक ही स्थान पर
अनुच्छेदविषय
40ग्राम पंचायतों का संगठन — नीति-निदेशक तत्व
76 · 88भारत का महान्यायवादी · सदनों में बोलने का अधिकार (मत का नहीं)
102 · 103सांसदों की निरर्हता के आधार · निरर्हता का विनिश्चय (राष्ट्रपति, निर्वाचन आयोग की सलाह पर)
148 · 149 · 150 · 151नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक — नियुक्ति/सेवा-शर्तें · कर्तव्य · लेखाओं का प्रारूप · संपरीक्षा प्रतिवेदन
165 · 177राज्य का महाधिवक्ता · राज्य विधानमंडल में बोलने का अधिकार
191 · 192विधायकों की निरर्हता के आधार · निरर्हता का विनिश्चय (राज्यपाल, आयोग की सलाह पर)
243 – 243णभाग IX — पंचायतें (73वाँ संशोधन)
243क · 243घ · 243छ · 243झ · 243ट · 243डग्राम सभा · आरक्षण · शक्तियाँ (11वीं अनुसूची) · राज्य वित्त आयोग · राज्य निर्वाचन आयोग · अपवर्जित क्षेत्र
243त – 243यछभाग IXक — नगरपालिकाएँ (74वाँ संशोधन)
243थ · 243ध · 243ब · 243म · 243यक · 243यघ · 243यङतीन प्रकार की नगरपालिकाएँ · वार्ड समिति · शक्तियाँ (12वीं अनुसूची) · वित्त आयोग · निर्वाचन · जिला योजना समिति · महानगर योजना समिति
263 · 279क · 280 · 281अंतर-राज्य परिषद · जीएसटी परिषद · वित्त आयोग · आयोग की सिफ़ारिशें संसद के समक्ष
315 – 323संघ एवं राज्य लोक सेवा आयोग — 316 नियुक्ति/पदावधि · 317 हटाना · 319 बाद की पात्रता · 320 कार्य · 322 व्यय भारित · 323 प्रतिवेदन
324 – 329भाग XV — निर्वाचन: 324 आयोग · 325 एक सामान्य नामावली · 326 वयस्क मताधिकार · 327/328 विधि-निर्माण · 329 न्यायालय-वर्जन
330क · 332क · 334क106वाँ संशोधन, 2023 — लोक सभा एवं विधान सभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई स्थान
338 · 338क · 338ख · 342कNCSC · NCST · NCBC · सामाजिक एवं शैक्षिक दृष्टि से पिछड़े वर्गों का विनिर्दिष्टीकरण
350 · 350क · 350खअभ्यावेदन की भाषा · प्राथमिक स्तर पर मातृभाषा में शिक्षा · भाषाई अल्पसंख्यकों के लिए विशेष अधिकारी

14.3 सम्पूर्ण कालक्रम

कालक्रम : स्थानीय शासन, निर्वाचन एवं निकाय — 1926 से 2026 तक
वर्षघटना
1926ली आयोग की सिफ़ारिश पर लोक सेवा आयोग की स्थापना (1 अक्टूबर); प्रथम अध्यक्ष सर रॉस बार्कर
1935 · 1937भारत शासन अधिनियम से संघीय लोक सेवा आयोग; उत्तर प्रदेश (संयुक्त प्रांत) लोक सेवा आयोग की स्थापना — 1 अप्रैल 1937
1947 · 1950संयुक्त प्रांत पंचायत राज अधिनियम, 1947 · निर्वाचन आयोग की स्थापना — 25 जनवरी 1950; योजना आयोग — 15 मार्च 1950
1950 · 1951जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 एवं 1951; प्रथम वित्त आयोग — के.सी. नियोगी (1951)
1952 · 1953सामुदायिक विकास कार्यक्रम · राष्ट्रीय प्रसार सेवा · राष्ट्रीय विकास परिषद (1952)
19567वाँ संविधान संशोधन — अनुच्छेद 350क एवं 350ख (राज्य पुनर्गठन आयोग की सिफ़ारिश पर)
1957 · 1959बलवंत राय मेहता समिति · राजस्थान के नागौर में पंचायती राज का उद्घाटन (2 अक्टूबर 1959)
1963 · 1964CBI की स्थापना (1 अप्रैल 1963) · संथानम समिति की सिफ़ारिश पर केंद्रीय सतर्कता आयोग
1966 · 1970 · 1971प्रथम प्रशासनिक सुधार आयोग की लोकपाल/लोकायुक्त सिफ़ारिश · ओडिशा का पहला लोकायुक्त कानून · महाराष्ट्र में लोकायुक्त की वास्तविक स्थापना
1975 · 1977तारकुंडे समिति · उत्तर प्रदेश लोकायुक्त अधिनियम, 1975 → संस्था 14 सितंबर 1977 से
1977–78 · 1985 · 1986 · 1988अशोक मेहता · जी.वी.के. राव · एल.एम. सिंघवी · थुंगन एवं गाडगिल समितियाँ
1988 · 198961वाँ संशोधन — मतदान आयु 18 · EVM को विधिक मान्यता एवं दलों का पंजीकरण (धारा 29क) · 64वाँ एवं 65वाँ विधेयक राज्य सभा में असफल · निर्वाचन आयोग अस्थायी रूप से तीन-सदस्यीय
1990 · 199265वाँ संशोधन — अजा/अजजा आयोग को संवैधानिक दर्जा · राष्ट्रीय महिला आयोग अधिनियम, 1990 (आयोग 31 जनवरी 1992) · दिनेश गोस्वामी समिति (1990)
1992 · 199373वाँ एवं 74वाँ संविधान संशोधन पारित · प्रवृत्त 24 अप्रैल 1993 एवं 1 जून 1993 · मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 · निर्वाचन आयोग स्थायी रूप से बहु-सदस्यीय (1 अक्टूबर 1993) · वोहरा समिति
1994 · 1996उत्तर प्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग की स्थापना — 23 अप्रैल 1994 · पेसा अधिनियम — 24 दिसंबर 1996
1997 · 1998विनीत नारायण निर्णय एवं नागरिक अधिकार-पत्र की कार्य-योजना · इंद्रजीत गुप्ता समिति (चुनावों के राज्य वित्त-पोषण पर)
2002 · 200386वाँ संशोधन — अनुच्छेद 21क · 89वाँ संशोधन338क (प्रभावी 19 फ़रवरी 2004) · सतर्कता आयोग अधिनियम, 2003 · राज्य सभा चुनाव में खुला मतपत्र
2005 · 2009 · 2010सूचना का अधिकार अधिनियम (12 अक्टूबर 2005 से पूर्णतः प्रवृत्त) · शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 (1 अप्रैल 2010 से) · मध्य प्रदेश लोक सेवा गारंटी अधिनियम, 2010
2013 · 2014लोकपाल एवं लोकायुक्त अधिनियम, 2013 (16 जनवरी 2014 से प्रवृत्त) · NOTA (27 सितंबर 2013) · लिली थॉमस (10 जुलाई 2013) · VVPAT का प्रथम प्रयोग (नोकसेन, नागालैंड)
2015 · 2016नीति आयोग — 1 जनवरी 2015 · डिजिटल इंडिया (1 जुलाई 2015) · 101वाँ संशोधन — जीएसटी परिषद (अनु. 279क)
2018 · 2019102वाँ संशोधन338ख (NCBC) · RTI (संशोधन) अधिनियम, 2019 · मानव अधिकार संरक्षण (संशोधन) अधिनियम, 2019 · लोकपाल का गठन (मार्च 2019) · सभी मतदान केंद्रों पर VVPAT
2021 · 2023105वाँ संशोधन — राज्यों की SEBC सूची-शक्ति बहाल · निर्वाचन विधि (संशोधन) अधिनियम, 2021 · अनूप बरनवाल (2 मार्च 2023) · CEC/EC नियुक्ति अधिनियम, 2023 · 106वाँ संशोधन (महिला आरक्षण) · 16वें वित्त आयोग का गठन — 31 दिसंबर 2023
2024 · 2025 · 2026निर्वाचन बॉण्ड असंवैधानिक (15 फ़रवरी 2024) · 100% VVPAT की माँग अस्वीकृत (अप्रैल 2024) · 129वाँ संशोधन विधेयक (“एक राष्ट्र, एक चुनाव”) संयुक्त संसदीय समिति को · 16वें वित्त आयोग का प्रतिवेदन राष्ट्रपति को (17 नवंबर 2025) एवं संसद में प्रस्तुत (1 फ़रवरी 2026)

14.4 रटने योग्य निर्णायक तथ्य

स्वयं जाँच — सम्पूर्ण अध्याय से 3 प्रश्न

प्र.1 सूची-I को सूची-II से सुमेलित कीजिए तथा सूचियों के नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए।
   सूची-I (निकाय/पद)    सूची-II (पदावधि अथवा आयु-सीमा)
A. संघ लोक सेवा आयोग का सदस्य   1. 4 वर्ष या 65 वर्ष
B. राज्य लोक सेवा आयोग का सदस्य   2. 3 वर्ष या 70 वर्ष
C. केंद्रीय सतर्कता आयुक्त   3. 6 वर्ष या 62 वर्ष
D. राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का अध्यक्ष   4. 6 वर्ष या 65 वर्ष
कूट:

AA-4, B-3, C-2, D-1BA-3, B-4, C-1, D-2CA-4, B-3, C-1, D-2DA-3, B-4, C-2, D-1
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (C)UPSC सदस्य — 6 वर्ष या 65 वर्ष; SPSC सदस्य — 6 वर्ष या 62 वर्ष; केंद्रीय सतर्कता आयुक्त — 4 वर्ष या 65 वर्ष; NHRC अध्यक्ष — 3 वर्ष या 70 वर्ष (2019 संशोधन)। अतः A-4, B-3, C-1, D-2 सही है।

प्र.2 निम्नलिखित में से कौन-सा/से युग्म सही सुमेलित नहीं है/हैं?
   (अनुच्छेद)    (विषय)
1. अनुच्छेद 243ब — नगरपालिकाओं की शक्तियाँ एवं बारहवीं अनुसूची
2. अनुच्छेद 243यङ — जिला योजना समिति
3. अनुच्छेद 243ण — पंचायत-निर्वाचन में न्यायालयीय हस्तक्षेप का वर्जन
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:

A1 और 2Bकेवल 2C2 और 3Dकेवल 1
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (B)अनुच्छेद 243यङ महानगर योजना समिति से संबंधित है; जिला योजना समिति अनुच्छेद 243यघ में है — युग्म 2 गलत। 243ब (नगरपालिकाओं की शक्तियाँ, बारहवीं अनुसूची) एवं 243ण (न्यायालय-वर्जन) सही हैं।

प्र.3 निम्नलिखित को सही कालक्रमानुसार व्यवस्थित कीजिए।
1. पेसा अधिनियम का अधिनियमन
2. सूचना का अधिकार अधिनियम का पूर्णतः प्रवृत्त होना
3. 74वें संविधान संशोधन का प्रवृत्त होना
4. राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:

A3, 1, 4, 2B3, 1, 2, 4C1, 3, 4, 2D1, 3, 2, 4
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (B)74वाँ संशोधन प्रवृत्त — 1 जून 1993; पेसा — 24 दिसंबर 1996; RTI पूर्णतः प्रवृत्त — 12 अक्टूबर 2005; NCBC को संवैधानिक दर्जा (102वाँ संशोधन) — 2018। अतः क्रम 3, 1, 2, 4 है।